80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को एक पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प साझा किया। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने देश की युवा पीढ़ी से एक खास अपील करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए 1 से 2 घंटे का समय देने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि युवाओं द्वारा दिया गया यह छोटा सा योगदान देश के लिए एक बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। विशेष रूप से वर्तमान में चल रही राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू और सटीक बनाने में युवाओं की यह सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
डिजिटल जनगणना अभियान में युवाओं की अहम भूमिका
देश में आयोजित होने वाली जनगणना का कार्य केवल जनसंख्या के आंकड़े एकत्र करने तक सीमित नहीं होता। यह एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नागरिकों से जुड़ी बारीकियों और सटीक जानकारियों को दर्ज किया जाता है। यही आंकड़े आने वाले वर्षों में देश की विकास नीतियों, जन कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के निर्माण का आधार बनते हैं। इस बार जनगणना की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है, जिससे हर नागरिक आसानी से इसका हिस्सा बन सके।
1-2 घंटे का योगदान और विवरण दर्ज करने में शुद्धता
परंपरागत रूप से सरकारी प्रतिनिधि घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी दर्ज करते हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में घरों तक पहुंचने की जिम्मेदारी और समय की कमी के कारण कभी-कभी जल्दबाजी में विवरण दर्ज करते वक्त छोटी-मोटी मानवीय गलतियां होने की संभावना बनी रहती है। इन त्रुटियों को समाप्त करने के उद्देश्य से इस बार स्वयं जानकारी भरने की डिजिटल सुविधा दी गई है, जिसके तहत लोग अपने मोबाइल फोन के जरिए घर बैठे ही जनगणना की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठकर इस प्रक्रिया को पूरा करें। उन्होंने विशेष ध्यान दिलाने की बात कही कि नाम, पते और अन्य आवश्यक विवरणों की स्पेलिंग बिल्कुल सही हो ताकि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक या सरकारी कार्य में परेशानी का सामना न करना पड़े।
बुजुर्गों को डिजिटल सहायता और 2047 का संकल्प
परिवार के कई बुजुर्ग सदस्य डिजिटल तकनीक या मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करने में पूरी तरह सहज नहीं होते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने घरों में जागरूकता का माहौल बनाएं। युवा वर्ग 1 से 2 घंटे का समय निकालकर अपने घर के बुजुर्गों को इस पूरी ऑनलाइन व्यवस्था के बारे में समझा सकते हैं और उनकी जानकारी खुद मोबाइल पर दर्ज कर सकते हैं। युवाओं का यह छोटा सा प्रयास न केवल देश के जनगणना आंकड़ों को सटीक बनाएगा, बल्कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी नई गति प्रदान करेगा।



















