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दुमोदा गांव में तेंदुए का खूनी हमला: 3 साल के दिलखुश की मौत पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, समझाइश के बाद शांत हुआ मामलाराजस्थान
21 अग॰ 2026, 11:57 am (35 दिन पहले)· 2

दुमोदा गांव में तेंदुए का खूनी हमला: 3 साल के दिलखुश की मौत पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, समझाइश के बाद शांत हुआ मामला

सवाई माधोपुर के दुमोदा गांव में घर के आंगन में खेल रहे तीन साल के मासूम दिलखुश को तेंदुआ उठा ले गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग की देरी से गुस्साए ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन के साथ समझौता हुआ।

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर टाइगर रिजर्व से सटे फलौदी रेंज के दुमोदा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। घर के आंगन में परिजनों के साथ खेल रहे तीन वर्षीय मासूम दिलखुश को अचानक आए एक तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया। इस दुखद हादसे के बाद गांव में तनाव और गहरा आक्रोश फैल गया। वन विभाग की कथित देरी से गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार सहमति बन गई, जिसके बाद परिजन मासूम के शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुए।

आंगन में खेल रहे बच्चे पर तेंदुए का अचानक हमला

घटना की रात तीन साल का दिलखुश पुत्र संजय बैरवा अपने परिजनों के साथ घर के खुले आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान पास के जंगली इलाके से एक खूंखार तेंदुआ अचानक आबादी क्षेत्र में दाखिल हुआ और बच्चे पर झपट पड़ा। तेंदुआ मासूम को अपने मुंह में दबाकर अंधेरे में जंगल की ओर भागने लगा। बच्चे की मां ने अदम्य साहस दिखाते हुए तेंदुए के मुंह से अपने बेटे को छुड़ाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वह तेंदुए की ताकत के आगे बेबस साबित हुई और बेहद सदमे में बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी।

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मासूम के बचाव के लिए परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए टॉर्च और लाठियां लेकर तेंदुए का पीछा करना शुरू कर दिया। पीछा करते हुए ग्रामीण गांव से सटे जंगल की पहाड़ी की ओर बढ़े। काफी तलाश के बाद पहाड़ी पर झाड़ियों के बीच मासूम दिलखुश गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। ग्रामीण उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

वन विभाग की देरी पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा और वन चौकी में आगजनी

मासूम की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना की तुरंत सूचना दिए जाने के बावजूद वन विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी लगभग तीन घंटे तक न तो मौके पर पहुंचा और न ही अस्पताल आया। इस प्रशासनिक लापरवाही से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने फलौदी रेंज की वन चौकी पर धावा बोल दिया। गुस्साए लोगों ने चौकी में तोड़फोड़ की और वहां खड़ी एक वनकर्मी की मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के सीमावर्ती गांवों में आए दिन हिंसक वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से आबादी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम या सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है। वनकर्मियों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की कमी के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से असंतोष व्याप्त था, जो इस दुखद हादसे के बाद उग्र आंदोलन के रूप में बाहर आया।

कोतवाली थाने में वार्ता के बाद इन शर्तों पर बनी सहमति

घटना के बाद उपजे भारी तनाव और ग्रामीणों की आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। सुबह कोतवाली थाने में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक के परिजनों, गांव के प्रबुद्ध लोगों और वन प्रशासन के अधिकारियों के बीच एक द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन किया गया। वार्ता के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मृतक के परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने, एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, फलौदी रेंज के पूरे वन स्टाफ को हटाने, गांवों की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण करने और वन चौकी में हुई तोड़फोड़ व आगजनी के मामले में ग्रामीणों पर कोई कानूनी कार्रवाई न करने की मांग शामिल थी।

गहन विचार-विमर्श और लंबी बातचीत के बाद वन प्रशासन ने कई मांगों पर अपनी सहमति व्यक्त की। समझौते के तहत वन विभाग ने मृतक के परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने तथा नियमानुसार उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, फलौदी रेंज की फॉरेस्टर सुमन गुर्जर को तत्काल प्रभाव से वन चौकी से हटाने और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई करने पर सहमति बनी। साथ ही, वन चौकी में हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटना में किसी भी ग्रामीण के खिलाफ पुलिस या विभागीय कार्रवाई न करने का भी निर्णय लिया गया।

चार बहनों का इकलौता भाई था मासूम, क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी

तीन साल का दिलखुश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी चार बहनें हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले हुई इस दर्दनाक त्रासदी से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल छाया हुआ है। पोस्टर्माटम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

दूसरी ओर, वन विभाग के उप वन संरक्षक (डीएफओ) ने बताया कि आबादी क्षेत्र में हमला करने वाले तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग द्वारा विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें फलौदी रेंज से सटे जंगलों और पहाड़ी इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं और तेंदुए की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे रात के समय सतर्क रहें और बच्चों को घर के बाहर अकेला न छोड़ें।

सवाल-जवाब

दुमोदा गांव में यह हादसा कैसे हुआ?
घर के आंगन में खेल रहे तीन साल के दिलखुश पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया और उसे मुंह में दबाकर जंगल की ओर ले गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों ने वन चौकी पर प्रदर्शन और आगजनी क्यों की?
सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग की टीम लगभग तीन घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची, जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने वन चौकी में तोड़फोड़ की और बाइक को आग लगा दी।
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच क्या समझौता हुआ?
प्रशासन ने एक परिजन को संविदा नौकरी, नियमानुसार मुआवजा, फॉरेस्टर सुमन गुर्जर को हटाने, लापरवाह कर्मियों पर जांच और ग्रामीणों पर कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया।
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग क्या कदम उठा रहा है?
डीएफओ के अनुसार, हमलावर तेंदुए की तलाश और उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की कई टीमों को फलौदी रेंज के जंगलों में तैनात किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

रणथंभौर के बफर जोन से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है। दुमोदा गांव की यह घटना न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सुरक्षा उपायों के अभाव में ग्रामीणों का गुस्सा किसी भी वक्त हिंसक हो सकता है। यदि समय रहते आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास प्रभावी सुरक्षा दीवार या फेंसिंग और त्वरित प्रतिक्रिया दल का गठन नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर बड़े टकराव का कारण बनते रहेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

रणथंभौर के बफर जोन से जुड़े इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब केवल स्थानीय सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन चुका है। सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुरक्षा बुनियादी ढांचे और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र के अभाव में ऐसे हादसे स्थानीय समुदायों और प्रशासनिक मशीनरी के बीच अविश्वास को और गहरा करते हैं। यदि आबादी के करीब प्रभावी फेंसिंग और वन विभाग की ओर से समय पर आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह स्थिति न केवल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बल्कि ग्रामीण आजीविका और क्षेत्र की सामाजिक स्थिरता को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

सवाई माधोपुर के दुमोदा गांव की यह घटना रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बफर जोन और गांवों की सीमा पर बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करती है। वन विभाग द्वारा तीन घंटे की देरी से पहुंचना और उसके बाद उपजा जनआक्रोश यह साबित करता है कि संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का भारी अभाव है। यदि सीमावर्ती बस्तियों में सुरक्षा दीवार, नियमित गश्त और त्वरित राहत के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो इस तरह के हादसों के बाद प्रशासनिक दफ्तरों और चौकियों पर जनता का गुस्सा भविष्य में और भी हिंसक रूप ले सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

रणथंभौर के सीमावर्ती गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब जानलेवा रूप ले चुका है। मां का अदम्य साहस और तेंदुए का आबादी के बीच आकर बच्चे को उठा ले जाना यह बताता है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों में मानवीय अतिक्रमण और जंगल में भोजन-पानी की कमी उन्हें रिहायशी इलाकों का रुख करने पर मजबूर कर रही है। वन चौकी में आगजनी की घटना व्यवस्था के प्रति जनता के गहरे आक्रोश को दर्शाती है। यदि प्रशासन ने गांवों के चारों ओर सोलर फेंसिंग या सुरक्षा दीवार बनाने और वन्यजीवों की निगरानी का पुख्ता तंत्र जल्द विकसित नहीं किया, तो यह कानूनी-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

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