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दून घाटी और मसूरी के आसपास शाम बिताने के लिए बेहतरीन ढलते सूरज के नजारेउत्तराखंड
27 सित॰ 2026, 7:58 am (40 दिन पहले)· 3

दून घाटी और मसूरी के आसपास शाम बिताने के लिए बेहतरीन ढलते सूरज के नजारे

देहरादून और मसूरी की वादियों में ढलती शाम के खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के लिए जॉर्ज एवरेस्ट, मालदेवता और गन हिल जैसे प्रमुख स्थानों की पूरी जानकारी।

उत्तराखंड की हसीन वादियों में जब दिन ढलने लगता है, तब आसमान में बिखरने वाले सुनहरे और नारंगी रंग पूरे माहौल को एक अलग ही जादुई शांति से भर देते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत पाने और सुकून के चंद पल तलाशने वाले मुसाफिरों के लिए देहरादून और उसके नजदीकी पहाड़ी इलाके शाम के वक्त बेहद खास बन जाते हैं। यदि आप भी कैमरे में प्रकृति के खूबसूरत लम्हे कैद करना चाहते हैं या ठंडी हवाओं के बीच सूर्यास्त देखना पसंद करते हैं, तो दून घाटी और मसूरी की पहाड़ियों में कई शानदार ठिकाने मौजूद हैं। इन जगहों पर पहुंचकर ढलते सूरज को निहारना एक यादगार अनुभव साबित होता है।

जॉर्ज एवरेस्ट की चोटी से दिखता 360 डिग्री विहंगम दृश्य

मसूरी की ऊंची पहाड़ियों और दून घाटी के बीच स्थित जॉर्ज एवरेस्ट सूर्यास्त देखने के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में गिना जाता है। इस स्थान की खासियत यह है कि यहाँ से चारों दिशाओं का यानी पूरा 360 डिग्री का खुला पैनोरमिक नजारा दिखाई देता है। शाम के समय जब सूर्य धीरे-धीरे पहाड़ों की ओट में छिपने लगता है, तो पूरा क्षितिज लाल और सुनहरी आभा से जगमगा उठता है।

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सफर की बात करें तो देहरादून रेलवे स्टेशन अथवा आईएसबीटी से इस चोटी की दूरी करीब 38 किलोमीटर बैठती है। यहाँ पहुँचने के लिए सैलानी देहरादून से मसूरी का रुख करते हुए अपनी निजी गाड़ी, टैक्सी या किराए की स्कूटी के जरिए हाथीपांव चौक तक जा सकते हैं। हाथीपांव पहुँचने के उपरांत शिखर की तरफ जाने के लिए एक छोटा सा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है, जो बेहद सुगम है।

सोन नदी के किनारे मालदेवता का शांत वातावरण

शहरी आपाधापी और कोलाहल से दूर जाकर प्रकृति के सानिध्य में वक्त गुजारने के इच्छुक लोगों के लिए मालदेवता एक शानदार विकल्प है। यह जगह सोंग नदी के किनारे बसी है, जहाँ कलकल बहते पानी पर पड़ती सूरज की अंतिम किरणें पानी की सतह को सुनहरे रंग में तब्दील कर देती हैं। नदी की मंद आवाज और उसके ऊपर से बहकर आने वाली ठंडी बयार ढलती शाम को बेहद सुहावना बना देती है।

देहरादून के मुख्य शहर अथवा रेलवे स्टेशन से मालदेवता की दूरी महज 18 किलोमीटर के आसपास है। रायपुर रोड के रास्ते होते हुए आप ऑटो रिक्शा, टैक्सी अथवा अपनी दोपहिया या चौपहिया गाड़ी से केवल 40 से 50 मिनट के सफर में यहाँ बेहद आसानी से पहुँच सकते हैं।

कैमल्स बैक रोड पर शाम की सुकून भरी चहलकदमी

मसूरी में स्थित कैमल्स बैक रोड अपनी शांत पगडंडियों और ऊंट के कूबड़ जैसी बनावट वाली प्राकृतिक चट्टान के कारण जानी जाती है। इसी चट्टानी आकार के चलते इस रास्ते का नाम कैमल्स बैक रोड पड़ा है। यहाँ की शांत सड़क पर टहलते हुए ढलते हुए सूरज को देखना मन को असीम तसल्ली प्रदान करता है।

यह स्थान देहरादून से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और मसूरी के मशहूर मॉल रोड के बेहद नजदीक पड़ता है। पर्यटक देहरादून से बस अथवा टैक्सी पकड़कर मसूरी पहुँच सकते हैं। इसके बाद लाइब्रेरी चौक से पैदल चलकर अथवा स्थानीय रिक्शे की मदद से इस मार्ग तक सुगमता से पहुँचा जा सकता है।

घने साल के पेड़ों के बीच देहरादून जू की हरियाली

देहरादून से मसूरी की ओर बढ़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित देहरादून जू घने साल के जंगलों से घिरा हुआ इलाका है। शाम के वक्त जब सूरज की किरणें साल के विशाल वृक्षों की पत्तियों और डालियों से छनकर जमीन तक पहुँचती हैं, तो पूरा परिदृश्य बेहद नयनाभिराम बन जाता है। बच्चों और परिवार के साथ शाम का वक्त बिताने के लिए यह बेहद अनुकूल स्थल है।

यह केंद्र देहरादून के मुख्य बाजार से केवल 10 किलोमीटर के फासले पर स्थित है। राजपुर रोड के माध्यम से स्थानीय सिटी बस, विक्रम, ऑटो रिक्शा अथवा निजी वाहन की सहायता से यहाँ बेहद कम समय में पहुँचा जा सकता है।

गन हिल की ऊंचाई से दून घाटी की टिमटिमाती बत्तियां

मसूरी की दूसरी सबसे ऊंची चोटी मानी जाने वाली गन हिल से एक तरफ जहां हिमालय की गगनचुंबी बर्फीली चोटियां नजर आती हैं, वहीं दूसरी तरफ नीचे फैली पूरी दून घाटी का विस्तार दिखाई देता है। शाम के समय जब सूरज ढलता है, तो नीचे घाटी में घरों और सड़कों पर जलने वाली बत्तियां टिमटिमाने लगती हैं, जो ऊपर से देखने पर तारों जैसी प्रतीत होती हैं।

देहरादून से मसूरी पहुंचने के उपरांत पर्यटक मॉल रोड पर स्थित झूला घर से केबल कार यानी रोपवे लेकर गन हिल पहुंच सकते हैं। इसके अलावा जो लोग पैदल चलने का शौक रखते हैं, वे लगभग 20 मिनट की चढ़ाई पूरी करके भी इस चोटी तक जा सकते हैं।

क्लाउड्स एंड के ओक और देवदार के जंगलों में सन्नाटा

मसूरी के पश्चिमी छोर पर बसा क्लाउड्स एंड ओक और देवदार के घने जंगलों से घिरा अत्यंत एकांत और शांत इलाका है। यहाँ की हरियाली के बीच ढलता सूरज फोटोग्राफी के शौकीनों और शांति की तलाश करने वालों के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार करता है।

यह खूबसूरत कोना देहरादून से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, जबकि मसूरी के लाइब्रेरी चौक से इसकी दूरी 7 किलोमीटर आगे पड़ती है। देहरादून से निजी वाहन अथवा टैक्सी लेकर मसूरी-हाथीपांव वाले रास्ते से होते हुए सीधे क्लाउड्स एंड तक का सफर तय किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

देहरादून रेलवे स्टेशन से जॉर्ज एवरेस्ट की दूरी कितनी है?
देहरादून रेलवे स्टेशन या आईएसबीटी से जॉर्ज एवरेस्ट लगभग 38 किलोमीटर दूर स्थित है।
मालदेवता पहुँचने में कितना समय लगता है और यह शहर से कितनी दूर है?
मालदेवता देहरादून के मुख्य शहर से करीब 18 किलोमीटर दूर है, जहाँ रायपुर रोड से 40 से 50 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
गन हिल तक पहुँचने के लिए कौन से साधन उपलब्ध हैं?
मसूरी मॉल रोड के झूला घर से केबल कार लेकर या लगभग 20 मिनट पैदल चढ़ाई करके गन हिल पहुँचा जा सकता है।
मसूरी के लाइब्रेरी चौक से क्लाउड्स एंड कितना आगे पड़ता है?
क्लाउड्स एंड मसूरी के लाइब्रेरी चौक से लगभग 7 किलोमीटर आगे पश्चिमी छोर पर स्थित है।
परिवार और बच्चों के साथ शांत शाम बिताने के लिए देहरादून के सबसे पास कौन सा स्थान है?
देहरादून जू शहर के केंद्र से केवल 10 किलोमीटर दूर है और परिवारों के लिए एक बेहतरीन शांत स्थान है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·40 दिन पहले

अमेरिका की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कभी इन पहाड़ों की शांति में बैठकर ढलता सूरज देखने का मन करता है। जॉर्ज एवरेस्ट का यह नजारा वाकई कमाल का है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

जॉर्ज एवरेस्ट और मालदेवता दोनों जगह शाम को भीड़ बहुत बढ़ जाती होगी, ऐसे में क्या वहां शांति से सूर्यास्त देखना वाकई मुमकिन है?

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। वीकेंड पर तो इन जगहों पर टूरिस्ट्स की इतनी भीड़ हो जाती है कि शांति मिलना मुश्किल है, फिर भी मंडे या ट्यूज़डे को जाना ठीक रहता है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

मालदेवता का नाम आते ही मन शांत हो जाता है, सच में वीकेंड पर बैठने की बहुत प्यारी जगह है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

रोहन जी, बात तो सही है आपकी, पर आजकल वहाँ शाम ढलने के बाद सड़क पर पुलिस की गश्त का भी थोड़ा ध्यान रखना चाहिए, कई बार मनचले परेशान करते हैं।

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