निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। आयोग के शीर्ष स्तर पर एसआईआर तथा अन्य अहम कदमों को लेकर एक राय न होने की अटकलें सामने आई थीं। इसके बाद आयोग के आधिकारिक स्तर पर इन बातों का खंडन किया गया है। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों समेत सभी महत्वपूर्ण कदम पूरी सर्वसम्मति से उठाए गए हैं। इन सभी निर्णयों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की पूरी सहमति शामिल रही है।
फैसलों पर आपत्तियों की चर्चा और विपक्ष का रुख
आयोग की ओर से मतभेदों को सिरे से खारिज किए जाने के बावजूद आंतरिक स्तर पर कई विषयों पर असहमति दर्ज कराए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है और विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने भी तीखा हमला बोलते हुए बड़ा दावा किया है।
मतदाता सूची और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे
चर्चाओं में सामने आई आपत्तियों का दायरा केवल एसआईआर तक ही सीमित नहीं है। ऐसी बातें सामने आई हैं जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी द्वारा आयोग के कई आदेशों तथा फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने का उल्लेख किया गया है। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम काटे जाने और उन्हें दोबारा शामिल करने के तौर-तरीके, चुनावी डेटा की संपूर्ण सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली तथा आयोग के भीतर नीतियां तय करने की समूची प्रक्रिया शामिल बताई गई हैं।
कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र और आयोग का पक्ष
इन जानकारियों के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से अपनी आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त तक पहुंचाई गई थीं। इसके अलावा दोनों आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष यही बना हुआ है कि संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार का टकराव नहीं है और एसआईआर सहित सभी नीतियों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर एकमत से स्वीकृति दी है।






















