राजस्थान में म्यूल बैंक खातों पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, 10 हजार से अधिक संदिग्धों को भेजा समनवैश्विक सुस्ती के बीच दुनिया में सबसे तेज दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, प्रमुख अर्थशास्त्रियों का भरोसा बढ़ाखरनाल मेले में हाईवे पर 25-30 सवारों वाली जीप से खतरनाक स्टंट, पुलिस ने जब्त किया वाहनपलामू के किसान सतीश दुबे ने मौसमी के बाग में उगाई कुरथी, खाली जमीन से निकाला चारे और दाल का फॉर्मूलाउत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में नार घाट का कारोबारी इतिहास, कभी पीतल और अनाज के बड़े बंदरगाह के रूप में थी पहचानचित्रकूट में सरयू नदी के पुराने बहाव क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने की तैयारी, यूपी और एमपी प्रशासन ने शुरू किया संयुक्त सीमांकनप्राइवेसी नेटवर्क में तेज उछाल और संस्थागत निवेश के बीच ज़ीकैश में जोरदार तेजीजापान के खिलाफ सांस रोक देने वाले मुकाबले में 2 रन से जीतकर भारत बना 200 टी20 मैच जीतने वाला पहला देशलालबागचा राजा के पंडाल में आम कतार में लगे राजपाल यादव, कानूनी मुश्किलों के बीच बप्पा के चरणों में टेका मत्थाअमेरिकी डॉलर में मजबूती और कमजोर आर्थिक आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर पर फिसला
निर्वाचन आयोग में मतभेद की चर्चाओं के बीच आंतरिक फैसलों पर उठे सवाल, विपक्ष ने भी साधा निशानाभारत
23 सित॰ 2026, 11:03 am (43 मिनट पहले)· 0

निर्वाचन आयोग में मतभेद की चर्चाओं के बीच आंतरिक फैसलों पर उठे सवाल, विपक्ष ने भी साधा निशाना

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर समेत प्रमुख फैसलों पर आंतरिक मतभेद की बातों को खारिज करते हुए सर्वसम्मति का दावा किया है, जबकि कई प्रशासनिक मुद्दों पर आपत्तियों की चर्चाओं को लेकर विपक्ष हमलावर है।

निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। आयोग के शीर्ष स्तर पर एसआईआर तथा अन्य अहम कदमों को लेकर एक राय न होने की अटकलें सामने आई थीं। इसके बाद आयोग के आधिकारिक स्तर पर इन बातों का खंडन किया गया है। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों समेत सभी महत्वपूर्ण कदम पूरी सर्वसम्मति से उठाए गए हैं। इन सभी निर्णयों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की पूरी सहमति शामिल रही है।

फैसलों पर आपत्तियों की चर्चा और विपक्ष का रुख

आयोग की ओर से मतभेदों को सिरे से खारिज किए जाने के बावजूद आंतरिक स्तर पर कई विषयों पर असहमति दर्ज कराए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है और विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने भी तीखा हमला बोलते हुए बड़ा दावा किया है।

ये भी पढ़ें

मतदाता सूची और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे

चर्चाओं में सामने आई आपत्तियों का दायरा केवल एसआईआर तक ही सीमित नहीं है। ऐसी बातें सामने आई हैं जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी द्वारा आयोग के कई आदेशों तथा फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने का उल्लेख किया गया है। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम काटे जाने और उन्हें दोबारा शामिल करने के तौर-तरीके, चुनावी डेटा की संपूर्ण सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली तथा आयोग के भीतर नीतियां तय करने की समूची प्रक्रिया शामिल बताई गई हैं।

कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र और आयोग का पक्ष

इन जानकारियों के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से अपनी आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त तक पहुंचाई गई थीं। इसके अलावा दोनों आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष यही बना हुआ है कि संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार का टकराव नहीं है और एसआईआर सहित सभी नीतियों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर एकमत से स्वीकृति दी है।

सवाल-जवाब

निर्वाचन आयोग ने मतभेद की खबरों पर क्या सफाई दी है?
आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने मतभेद की खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि एसआईआर समेत सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
किन चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराए जाने की बात कही गई है?
सूत्रों के हवाले से चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कई प्रशासनिक और नीतिगत आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने की बात सामने आई है।
आयुक्तों की आपत्तियों में कौन-से प्रमुख विषय शामिल बताए गए हैं?
आपत्तियों में नए मतदाताओं का पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने व बहाल करने के नियम, चुनावी डेटा की सुरक्षा, आईटी सिस्टम और आयोग की निर्णय प्रक्रिया शामिल हैं।
इस मामले पर किस विपक्षी नेता ने बड़ा दावा किया है?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है।
क्या कैबिनेट सेक्रेटरी को भी पत्र लिखे जाने की चर्चा है?
सूत्रों के हवाले से यह दावा सामने आया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियों के संदर्भ में कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 मिनट पहले

आयोग चाहे लाख सफाई दे कि सब ठीक है, पर कैबिनेट सेक्रेटरी तक बात पहुंचना और अंदरखाने असहमति की चर्चाएं उठना आम बात नहीं है। धुआं उठा है तो आग कहीं तो होगी ही।

Michael Anderson@michael-anderson·3 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। अमेरिकी चुनाव आयोग में भी जब अंदरखाने मतभेद सामने आते हैं, तो बात व्हाइट हाउस तक पहुँच ही जाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

अगर चुनाव आयोग के अंदर ही फैसलों पर इतनी असहमति है और कैबिनेट तक चिट्ठियां पहुंच रही हैं, तो पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है। सिर्फ ऊपर से सब ठीक होने का दावा करने से शक खत्म नहीं होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·31 मिनट पहले

करण भाई, बात तो सही है। अगर अंदर ही इतनी चिट्ठियां चल रही हैं, तो सिर्फ सफाई देने से भरोसा थोड़ी बन जाएगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp