उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद को पूरे विश्व में कांच की नगरी के रूप में पहचाना जाता है। महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली कांच की चूड़ियों का निर्माण इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है। शहर में तैयार होने वाली विविध प्रकार की चूड़ियों की बिक्री के लिए एक विशाल बाजार सजता है, जहां खरीदारी के सिलसिले में भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी खरीदार पहुंचते हैं। आज भले ही यह बाजार बेहद विशाल और आधुनिक डिजाइनों से गुलजार दिखता हो, लेकिन इसकी शुरुआत दशकों पहले बेहद सादे स्तर पर हुई थी, जब स्थानीय कारोबारी सिर्फ बिना सजावट वाली सादी चूड़ियां बनाकर बेचा करते थे। उस दौर में गिनी-चुनी दुकानें हुआ करती थीं और लोग अपने रिहाइशी मकानों के निचले हिस्से में चूड़ियां रखकर कारोबार चलाते थे।
150 से 200 साल पुराना इतिहास और कारीगरी की शुरुआत
फिरोजाबाद में चूड़ियों के कारोबार से जुड़े बी.एस. गुप्ता के अनुसार, मशहूर चूड़ी बाजार गली बोहरान का इतिहास शहर में चूड़ी निर्माण की शुरुआत के साथ ही जुड़ा हुआ है। लगभग 150 से 200 वर्ष पहले स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने इस हुनर और व्यापार की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में कारीगर त्रिकोणीय आकार के एक छोटे से बेलन का सहारा लेकर अलग-अलग नाप और साइज की चूड़ियां तैयार करते थे। समय बीतने के साथ यह घरेलू हुनर एक व्यवस्थित रूप लेने लगा और कांच के छोटे-छोटे उद्योग स्थापित होने लगे।
इसी विकास क्रम के दौरान फिरोजाबाद के घंटाघर के नजदीक स्थित गली बोहरान में चूड़ियों की दुकानें सजनी शुरू हुईं। उस समय घंटाघर के पास से गुजरने वाला मार्ग ही आगरा जाने का मुख्य रास्ता हुआ करता था, जिससे वहां आवाजाही हमेशा बनी रहती थी। इसी रणनीतिक स्थान का लाभ उठाते हुए स्थानीय निवासियों ने बोहरान गली में अपने घरों के नीचे दुकानें स्थापित कीं और साथ ही चूड़ियों के गोदाम भी तैयार कर लिए। यहां से अन्य शहरों के व्यापारियों को माल भेजा जाने लगा और धीरे-धीरे यह गली थोक और खुदरा व्यापार का केंद्र बन गई।
सादी चूड़ियों से सुनहरी बर्क और हिल्ल डिजाइन तक का सफर
प्रारंभिक दौर में बोहरान गली की दुकानों पर सिर्फ सादी चूड़ियां बिकती थीं, जिनमें किसी प्रकार की अतिरिक्त सजावट या नक्काशी नहीं होती थी। वक्त के साथ कारीगरों ने अपने काम में नए प्रयोग शुरू किए। चूड़ियों की कटिंग की कला विकसित हुई और बाद में कुशल कारीगरों ने सोने की बर्क लगाकर विशेष प्रकार की हिल्ल चूड़ियों का निर्माण करना शुरू किया। इन नवाचारों ने फिरोजाबाद की चूड़ियों को एक विशिष्ट आकर्षण दिया, जिससे बोहरान गली का बाजार समय के साथ सबसे प्राचीन और विख्यात चूड़ी केंद्र में तब्दील हो गया।
हजारों दुकानों में फैली विस्तृत वैरायटी और खरीदारों का भरोसा
वर्तमान समय में बोहरान गली का बाजार फैंसी चूड़ियों और खूबसूरत कंगनों के विशाल संग्रह के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ के निवासी और फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉ. अमित यादव ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गली बोहरान में खरीदारी करने पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह बाजार अत्यंत विशाल और सुंदर है, जहां हजारों की संख्या में चूड़ियों की दुकानें मौजूद हैं और एक से बढ़कर एक अनूठे डिजाइन उपलब्ध हैं।
वहीं खरीदारी के लिए पहुंचीं डॉ. कल्पना यादव ने बताया कि बोहरान गली के बाजार में अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण और सही चूड़ियां मिलती हैं। यहां चूड़ियों के दाम काफी किफायती और वाजिब रहते हैं, जिसके चलते लोग दूर-दराज से विशेष रूप से इसी बाजार में खरीदारी करने के लिए आते हैं।















