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गाजियाबाद की आवासीय सोसाइटी में मासूम बच्ची पर तीन कुत्तों का जानलेवा हमला, सीसीटीवी फुटेज आया सामनेउत्तर प्रदेश
3 सित॰ 2026, 6:09 pm (55 दिन पहले)· 1

गाजियाबाद की आवासीय सोसाइटी में मासूम बच्ची पर तीन कुत्तों का जानलेवा हमला, सीसीटीवी फुटेज आया सामने

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित स्टार रामेश्वरम सोसाइटी परिसर में मंगलवार को तीन आवारा कुत्तों ने 6 साल की बच्ची पर हमला कर घायल कर दिया। पास से गुजर रही एक महिला ने बच्ची की जान बचाई, जबकि नगर निगम की लापरवाही से स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित एक बहुमंजिला आवासीय परिसर में मंगलवार को सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली वारदात सामने आई। राजनगर एक्सटेंशन इलाके की प्रसिद्ध स्टार रामेश्वरम सोसाइटी के अंदर परिसर में टहल रही छह साल की मासूम बच्ची पर अचानक तीन आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला बोल दिया। आवारा कुत्तों ने बच्ची को चारों तरफ से घेर लिया और उसे बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। यह पूरी खौफनाक वारदात सोसाइटी के सुरक्षा कैमरों यानी सीसीटीवी (CCTV) में कैद हो गई है, जिसका वीडियो देखकर हर कोई सिहर उठा है।

महिला की तत्परता से बची मासूम की जान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता बच्ची अपने परिवार के साथ इसी स्टार रामेश्वरम सोसाइटी में रहती है। घटना के वक्त वह रोजाना की तरह सोसाइटी परिसर में टहल रही थी। इसी दौरान परिसर में घूम रहे तीन स्ट्रीट डॉग्स ने बच्ची को अकेला पाकर उस पर झपट्टा मारा। कुत्ते उसे नीचे गिराकर काटने लगे। गनीमत यह रही कि उसी समय पास से एक महिला गुजर रही थी। महिला ने जैसे ही कुत्तों को बच्ची को घेरकर काटते देखा, उसने तुरंत निडरता दिखाते हुए शोर मचाया और कुत्तों को भगाने की कोशिश की। महिला की सूझबूझ और तत्परता के कारण तीनों कुत्ते वहां से भाग खड़े हुए, जिससे बच्ची की जान बाल-बाल बच सकी।

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सोसाइटी परिसर में चीख-पुकार और दहशत का माहौल

कुत्तों के हमले के बाद घायल मासूम काफी देर तक सोसाइटी के कॉमन एरिया में बैठकर रोती और बिलखती रही। अचानक हुए इस भयावह हमले से बच्ची बुरी तरह सहमी हुई थी। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर और घटना की जानकारी मिलते ही सोसाइटी के तमाम निवासी मौके पर जमा हो गए। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत बच्ची को संभाला और उसे चुप कराने तथा प्राथमिक सांत्वना देने का प्रयास किया। इस घटना के बाद से पूरी सोसाइटी के अभिभावक और बच्चे गहरे खौफ के साए में हैं।

नगर निगम की निष्क्रियता पर भड़के स्थानीय निवासी

इस घटना ने आवासीय परिसरों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सोसाइटी के निवासियों का आरोप है कि परिसर के अंदर आवारा कुत्तों का जमावड़ा और उनका आक्रामक व्यवहार लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। इससे पहले भी ये कुत्ते सोसाइटी में रहने वाले कई अन्य लोगों और बच्चों पर हमले कर चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारियों से लिखित एवं मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन की ओर से आवारा कुत्तों को पकड़ने या बंध्याकरण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता

सोसाइटी में दोबारा हुई इस आवारा कुत्तों के हमले की वारदात के बाद से बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। निवासियों का कहना है कि नगर निगम की लगातार चुप्पी और ढुलमूल रवैये के कारण परिसर में बच्चों का अकेला खेलना या टहलना भी जानलेवा साबित हो रहा है। सोसाइटी के लोगों ने मांग की है कि नगर निगम तुरंत संज्ञान लेते हुए परिसर से खूंखार कुत्तों को हटाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करे।

सवाल-जवाब

गाजियाबाद की किस सोसाइटी में कुत्तों के हमले की घटना हुई?
यह घटना गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित स्टार रामेश्वरम सोसाइटी में मंगलवार को हुई।
कुत्तों के हमले का शिकार हुई बच्ची की उम्र कितनी है?
हमले का शिकार हुई मासूम बच्ची की उम्र 6 साल है और वह अपने परिवार के साथ उसी सोसाइटी में रहती है।
बच्ची को कुत्तों के हमले से किसने बचाया?
सोसाइटी परिसर से गुजर रही एक महिला ने तुरंत शोर मचाकर और हिम्मत दिखाकर कुत्तों को भगाया और बच्ची की जान बचाई।
क्या इस घटना का कोई प्रमाण या वीडियो उपलब्ध है?
हाँ, कुत्तों के हमले की यह पूरी वारदात सोसाइटी परिसर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हुई है।
सोसाइटी के निवासियों का नगर निगम पर क्या आरोप है?
निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद गाजियाबाद नगर निगम ने आवारा कुत्तों को हटाने या नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·55 दिन पहले

गाजियाबाद के इस मामले ने दिखा दिया है कि नगर निगम की कागजी कार्रवाई और दावों से इतर जमीनी हकीकत कितनी भयावह है। सुरक्षित माने जाने वाले gated communities के भीतर इस तरह का आक्रामक हमला स्थानीय प्रशासन की नीतिगत नाकामी का सीधा परिणाम है। यदि नगर निगम ने पहले की शिकायतों पर औपचारिकता के बजाय ठोस कदम उठाए होते, तो यह नौबत न आती। अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश के शहरी निकायों को विशेष अभियान चलाकर जवाबदेही तय करनी होगी, अन्यथा अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेजने से डरते रहेंगे और आक्रोश सड़कों पर फूटेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 दिन पहले

इस घटना ने केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर नहीं किया है, बल्कि यह कानूनी और सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा मोड़ है। भारतीय न्याय संहिता और संबंधित स्थानीय कानूनों के तहत, आवारा पशुओं के कारण होने वाली ऐसी गंभीर चोटों के मामलों में नगर निकाय और आरडब्ल्यूए की कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो कानूनी मोर्चे पर भी जनहित याचिका और मुआवजे की मांग को लेकर बड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय निकायों को अपनी कार्यप्रणाली बदलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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