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गमले के पौधों को घोंघों से बचाने के आसान घरेलू उपाय और सही तरीकेउत्तराखंड
5 सित॰ 2026, 8:33 pm (17 दिन पहले)· 2

गमले के पौधों को घोंघों से बचाने के आसान घरेलू उपाय और सही तरीके

घोंघे रात के समय गमले के पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। नमी और अंधेरी जगहों पर छिपने वाले इन जीवों से पौधों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ खास और आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं।

बागवानी के शौकीन लोगों के सामने अक्सर यह समस्या आती है कि उनके खूबसूरत पौधों की हरी-भ हरी पत्तियां अचानक कटने लगती हैं। इसके पीछे अक्सर घोंघों का हाथ होता है, जो दिन के वक्त मिट्टी की सतह या बर्तनों की ओट में छिपे रहते हैं और रात ढलते ही बाहर आकर पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन जीवों को भगाने और इनकी संख्या पर लगाम लगाने के लिए रात का वक्त सबसे सही माना जाता है। आप एक टॉर्च की मदद से गमलों के आसपास नजर रख सकते हैं। जब ये जीव दिखाई दें, तो इन्हें सीधे हाथों से छूने की बजाय दस्तानों या पुराने कागज का इस्तेमाल करके हटाएं। लगातार कुछ दिनों तक ऐसा करने से इनकी तादाद में भारी कमी दर्ज की जा सकती है।

केवल पौधों के ऊपरी हिस्से पर नजर रखना नाकाफी है, क्योंकि ये जीव नमी और अंधेरे को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। ये अक्सर गमले के नीचे रखी प्लेटों, स्टैंड के कोनों और आसपास की दरारों में शरण लेते हैं। सिंचाई के बाद यदि प्लेट में पानी भरा रह जाए, तो उसे तुरंत बाहर निकाल दें और उस हिस्से को सूखा रखें। कई बार लोगों को लगता है कि पौधे में कोई बीमारी लग गई है, जबकि असली वजह रात के वक्त चुपके से पत्तियां कुतरने वाले ये जीव होते हैं।

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बची हुई कॉफी का इस्तेमाल कई लोग इन जीवों को दूर भगाने के लिए करते हैं, लेकिन इसे मिट्टी के ऊपर बहुत मोटी परत के रूप में डालना सही तरीका नहीं है। ऐसा करने से मिट्टी की सेहत और पौधे पर बुरा असर पड़ सकता है। यदि आप इसका इस्तेमाल करना चाहते भी हैं, तो बहुत थोड़ी मात्रा में सूखी कॉफी को गमले के बाहरी हिस्से के पास रखें, ताकि वह सीधे जड़ों के संपर्क में न आए।

बगीचे या जीमेल गमलों में बिखरी सूखी पत्तियां, सड़ी हुई घास और लगातार गीली रहने वाली जैविक सामग्री घोंघों के छिपने के लिए आदर्श जगह बन जाती है। इसलिए पौधों के आसपास की जगह को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी होता है। खासकर बरसात के दिनों में यह सावधानी और ज्यादा बढ़ जाती है। हर कुछ दिनों के अंतराल पर ऊपर जमा कचरे को साफ करते रहें और जरूरत से ज्यादा मल्च या पत्तियों की परत न जमने दें। साफ और सूखी सतह होने पर इन जीवों के लिए वहां छिपना बेहद मुश्किल हो जाता है।

यदि आप रोजाना शाम के वक्त पौधों में बहुत ज्यादा पानी डालते हैं, तो गमले की मिट्टी रातभर गीली बनी रहती है, जो इन जीवों को बहुत आकर्षित करती है। हमेशा पौधों की जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें और यदि संभव हो, तो सुबह के वक्त पानी देने की आदत डालें। इससे दिन के समय अतिरिक्त नमी भाप बनकर उड़ जाती है और मिट्टी को सूखने का मौका मिलता है। यह भी ध्यान रखें कि हर पौधे को हर दिन पानी की आवश्यकता नहीं होती है।

रसोई में मौजूद लहसुन की मदद से एक हल्का और असरदार स्प्रे तैयार किया जा सकता है। कुछ लहसुन की कलियों को पानी में अच्छी तरह कुचलकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें और फिर उस पानी को छान लें। इस घोल को बहुत ही कम मात्रा में पौधों की पत्तियों पर छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि, सीधे पूरे पौधे पर डालने से पहले एक-दो पत्तियों पर इसका परीक्षण जरूर कर लें, क्योंकि तेज गंध वाले घरेलू नुस्खे ज्यादा होने पर पत्तियों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

यदि आपका गमला सीधे गीली जमीन या लगातार नमी वाली जगह पर रखा है, तो इन जीवों के लिए वहां तक पहुंचना बहुत आसान हो जाता है। गमले को किसी स्टैंड या ऊंचाई पर रखने से इनकी आवाजाही पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। आसपास पानी बिल्कुल जमा न होने दें और गमले की बाहरी दीवारों व नीचे के हिस्से की समय-समय पर जांच करते रहें। यह छोटा सा बदलाव खासकर बालकनी और बरसात के मौसम में रखे पौधों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।

जब पौधे सुरक्षित दिखने लगें और घोंघे नजर आना बंद हो जाएं, तो भी इन उपायों को तुरंत बंद न करें। कुछ दिनों तक लगातार रात के समय निरीक्षण जारी रखें, क्योंकि छिपे हुए जीव या उनके अंडे बाद में फिर से उभर सकते हैं। यदि मिट्टी के अंदर छोटे-छोटे पारदर्शी या सफेद गुच्छे जैसे अंडे दिखाई दें, तो उन्हें सावधानी से बाहर निकालकर नष्ट कर दें और उस जगह को पूरी तरह साफ कर दें। गमले में अत्यधिक नमी और गंदगी की समस्या को दूर रखकर ही पौधों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

सवाल-जवाब

गमले के पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान कौन पहुंचाता है?
घोंघे और स्लग रात के समय निकलकर गमले के पौधों की पत्तियां कुतरते हैं और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
घोंघों को पकड़ने का सबसे सही समय कौन सा है?
रात का समय सबसे सही होता है क्योंकि ये जीव दिन में छिपकर रहते हैं और रात में बाहर आते हैं।
घोंघों को हटाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए?
इन्हें हाथों से छूने की बजाय दस्तानों या पुराने कागज की मदद से हटाना चाहिए।
पौधों में पानी कब देना चाहिए?
संभव हो तो सुबह के वक्त पानी देना चाहिए ताकि दिन में अतिरिक्त नमी सूख सके।
क्या कॉफी का इस्तेमाल घोंघों के लिए फायदेमंद है?
सूढ़ी कॉफी की थोड़ी मात्रा गमले के बाहरी हिस्से पर रखी जा सकती है, लेकिन मोटी परत डालना हानिकारक हो सकता है।
लहसुन के स्प्रे का उपयोग कैसे करें?
लहसुन को पानी में कुचलकर और छानकर हल्का स्प्रे तैयार किया जाता है, जिसे पत्तियों पर छिड़का जा सकता है।
गमले को जमीन पर रखने से क्या समस्या होती है?
सीधे गीली जमीन पर रखे गमलों तक घोंघे आसानी से पहुंच जाते हैं, इसलिए स्टैंड का उपयोग करना चाहिए।
घोंघे गायब होने के बाद भी क्या करना चाहिए?
कुछ दिनों तक रात में निरीक्षण जारी रखना चाहिए और छिपे हुए अंडे या कीटों को साफ करना चाहिए।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

यह लेख घरेलू बागवानी के एक अहम पहलू को छूता है, लेकिन इसे शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण प्रबंधन और किचन वेस्ट के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण से जोड़कर देखना चाहिए। उत्तर प्रदेश के शहरी इलाकों में जहाँ बालकनी गार्डनिंग तेजी से बढ़ रही है, वहाँ नमी और जल निकासी की गलत प्रबंधन से न केवल पौधे खराब होते हैं, बल्कि कीटों का प्रकोप भी बढ़ता है। आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर जैविक अपशिष्ट के प्रबंधन और पौधों की देखभाल के लिए आरडब्ल्यूए (RWA) और नगर निकायों को ऐसे व्यावहारिक उपायों के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि घरेलू स्तर पर हरित आवरण को सुरक्षित रखा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

अपराध और कानून व्यवस्था की विशेष रिपोर्टिंग के दायरे से परे हटकर देखें तो शहरी आवासों में बागवानी से जुड़े विवाद और लापरवाही कई बार पड़ोसी विवादों या हाउसिंग सोसाइटियों में जल निकासी जैसी बुनियादी नागरिक समस्याओं का कारण बन जाती है। बालकनी और परिसरों में नमी के गलत प्रबंधन से पनपने वाले कीट और जलभराव का मुद्दा सिर्फ व्यक्तिगत बागवानी का नहीं, बल्कि आरडब्ल्यूए और स्थानीय निकायों के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता नियमों के दायरे से भी जुड़ा है, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

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