नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश के चलते गंडक नदी में आए जबर्दस्त उफान ने बिहार के कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। इस प्राकृतिक आपदा की सबसे भीषण मार पश्चिम चंपारण जिले पर पड़ी है, जहां सीमावर्ती प्रखंडों में नदी का पानी बस्तियों में घुस गया है। नौतन, बैरिया, योगापट्टी और बगहा 02 प्रखंडों के तमाम हिस्सों में तेज बहाव ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और कई गांव पूरी तरह पानी से घिर चुके हैं।
डूबे आशियाने और बस्तियां, सामान बहा
नदी के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से नौतन प्रखंड के मंगलपुर कला, विशम्भरपुर और फुलियाखाड़ जैसे इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इसके अलावा योगापट्टी तथा बगहा 02 की अनेक ग्राम पंचायतों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि ग्रामीणों के पक्के और कच्चे मकानों में पानी समा गया है। घरों में रखा सारा घरेलू सामान, जिनमें अनाज, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर और परिवार के जरूरी कागजात शामिल थे, तेज धार में बह गए हैं या बर्बाद हो चुके हैं।
नावों और खुले आसमान तले शरण
विशम्भरपुर गांव के निवासी देवदत्त राम ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि गंडक की लहरों में उनका सबकुछ तबाह हो गया है। देवदत्त राम के अनुसार अब उनके परिवार के सामने नाव पर रहकर दिन काटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि इस संकट में नित्यकर्म, खाना पकाने और भोजन की भारी दिक्कत हो रही है, यहां तक कि पीने के स्वच्छ पानी के लिए भी ग्रामीण तरस रहे हैं।
तटबंधों पर विषैले जीवों का खतरा
फुलियाखाड़ की रहने वाली सरिता देवी ने बताया कि सब कुछ डूब जाने के बाद अब परिवार के साथ बांधों और मुख्य सड़कों की पटरियों पर गुजर-बसर करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि नहरों और तटबंधों के किनारे लगाए गए अस्थायी तंबुओं में रात बिताना बेहद डरावना है, क्योंकि वहां सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतु लगातार निकल रहे हैं। उधर वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नहरें भी लबालब भरकर उफन रही हैं और किनारों पर शरण लिए परिवारों पर दोबारा डूबने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।


















