अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन बुधवार को अचानक उग्र रूप ले बैठा। यिंगकियोंग शहर में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों के साथ तीखी झड़प की, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया और तूतिंग-यिंगकियोंग क्षेत्र के स्थानीय विधायक अलो लिबांग के आवास परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की। जिस समय यह घटना घटी, उस आवास में राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक ठहरे हुए थे। यह पूरा बवाल मुख्यमंत्री पेमा खांडू के जिले के आधिकारिक दौरे के दौरान देखने को मिला, जिससे कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई।
सड़कें जाम और मंत्रियों का घेराव
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने जिले के प्रमुख रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया। यिंगकियोंग-कोमकार-गेकू मार्ग और दाईते दाईमे की तरफ जाने वाले संपर्कों पर चक्काजाम किए जाने से जिले के कई हिस्सों में गाड़ियों की रफ्तार थम गई। ग्रैंड सियांग होटल के बाहर स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने उपमुख्यमंत्री चौना मीन, कैबिनेट मंत्री ओजिंग तासिंग, कैबिनेट मंत्री न्यातो दुकाम और मुख्यमंत्री के सलाहकार निनॉन्ग एरिंग के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। ये सभी नेता मुख्यमंत्री पेमा खांडू की प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में शामिल होने जा रहे थे।
नारेबाजी, पुलिस वाहन में आगजनी और लाठीचार्ज
हाथों में 'नो पीएफआर, नो सर्वे' और 'गो बैक सीएम' की तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रशासन प्रभावित होने वाले स्थानीय समुदायों के साथ आमने-सामने खुली बातचीत करने के बजाय सिर्फ अधिकारियों के साथ बंद कमरों में बैठकें क्यों कर रहा है। तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब जनरल ग्राउंड से लोअर मार्केट की तरफ बढ़ रही एक विशाल रैली को सुरक्षाबलों ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। दाईते दाईमे पुल के पास एक पुलिस वाहन में आग लगा दी गई, जबकि अलग-अलग जगहों पर कई सरकारी गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और नुकसान पहुंचाया गया।
गेकू में पहले भी हुई थी झड़प
सियांग घाटी में सुरक्षाबलों और ग्रामीणों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार की हिंसा से ठीक दो दिन पहले, 28 सितंबर को गेकू में ग्रामीणों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के जवानों के बीच गंभीर टकराव हुआ था। उस समय हुए बवाल के बाद प्रशासन ने चार लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया था। स्थानीय आबादी परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) की गतिविधियों और सर्वे कार्य का कड़ा विरोध कर रही है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सर्वे का काम तत्काल प्रभाव से रोका जाए और प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को वापस बुलाया जाए।
सरकार का रुख और असम से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
राज्य सरकार का तर्क है कि 11,000 मेगावाट का यह प्रोजेक्ट इलाके के आर्थिक और सामाजिक विकास को रफ्तार देगा, युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा और जल व ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। अपनी आधिकारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने क्षेत्र में पानी से जुड़ी दोहरी चुनौतियों का उल्लेख किया, जहां एक तरफ ऊपरी नदी में अचानक पानी का भारी बहाव बढ़ जाता है, वहीं दूसरी तरफ सूखे मौसम में जल संकट पैदा हो जाता है। उन्होंने जिम्मेदार जल प्रबंधन पर जोर दिया। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीएफआर केवल एक प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन है और इसे बांध निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए। खांडू ने कहा है कि यदि परियोजना तकनीकी रूप से व्यावहारिक नहीं पाई जाती है तो इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और जनता की इच्छा के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। दूसरी ओर, असम विधानसभा में वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवव्रत सैकिया ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि सियांग परियोजना से असम के निचले मैदानी इलाकों, वहां के नाजुक पर्यावरण और आम जनता की सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित असर का गहन और निष्पक्ष अध्ययन कराया जाए।





















