राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
गणेश चतुर्थी से पहले आगरा के मूर्तिकारों का कमाल, कई राज्यों में भेजी जा रही हैं इको-फ्रेंडली प्रतिमाएंभारत
12 सित॰ 2026, 11:45 am (47 दिन पहले)· 1

गणेश चतुर्थी से पहले आगरा के मूर्तिकारों का कमाल, कई राज्यों में भेजी जा रही हैं इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं

आगरा के सेंटर पार्क के पास मूर्तिकार लीला देवी का परिवार पिछले 20 वर्षों से पर्यावरण-अनुकूल गणेश मूर्तियां बना रहा है, जिनकी मांग यूपी के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात तक है।

उत्तर प्रदेश का आगरा शहर न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी असाधारण हस्तकला और बेजोड़ कारीगरी के लिए भी जाना जाता है। ताजमहल जैसी भव्य संरचनाओं के निर्माण में दिखने वाला अद्भुत हुनर आज भी यहां के स्थानीय कलाकारों में जिंदा है। इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए आगरा के मूर्तिकार अब आगामी गणेश चतुर्थी त्योहार की तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित कार्यशालाओं में दिन-रात काम चल रहा है, जहां कलाकार भगवान गणेश की बेहद आकर्षक और सुंदर प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।

इन दिनों आगरा की विभिन्न कार्यशालाओं में गजब की रौनक देखने को मिल रही है। कोई कलाकार भगवान गणेश को अलग-अलग मनमोहक मुद्राओं में ढालने में लगा है, तो कोई उन्हें बेहद जीवंत रंगों और महीन डिजाइनों से सजाने में जुटा हुआ है। खास बात यह है कि आगरा में तैयार होने वाली इन खूबसूरत गणेश प्रतिमाओं की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर देखी जा रही है। स्थानीय कारीगरों का कहना है कि गणेश चतुर्थी के आगमन से काफी पहले ही उन्हें मूर्तियों के ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं, जिससे इस वर्ष बेहतरीन कारोबार की उम्मीद जगी है।

ये भी पढ़ें

दो दशकों से जारी है इको-फ्रेंडली मूर्तियों का निर्माण

आगरा के सेंटर पार्क के समीप बड़े पैमाने पर मूर्तियों के निर्माण का कार्य किया जाता है। यहां एक समर्पित परिवार पिछले 20 वर्षों से लगातार भगवान गणेश की मूर्तियां बनाने के काम में लगा हुआ है। इस पारंपरिक कार्यशाला को चलाने वाली महिला मूर्तिकार लीला देवी ने बताया कि उनका पूरा परिवार इस काम में सक्रिय रूप से हाथ बंटाता है। वे विशेष रूप से पर्यावरण-अनुकूल यानी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। लीला देवी के अनुसार, पहले वे दूसरे स्थानों पर यह कार्य करती थीं, लेकिन पिछले दो दशकों से वे इसी जगह पर स्थापित होकर गणेश मूर्तियां बना रही हैं।

लीला देवी की कार्यशाला में बनने वाली मूर्तियां अपनी सुंदर बनावट और चटकीले रंगों के कारण ग्राहकों को खूब पसंद आती हैं। यही वजह है कि त्योहार आते ही लोग खुद यहां खिंचे चले आते हैं। मूर्तियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे इन मूर्तियों को तैयार करने के लिए POP और खड़िया मिट्टी का उपयोग करती हैं। यह मिश्रण पर्यावरण को किसी भी तरह से दूषित नहीं करता है और विसर्जन के दौरान आसानी से घुल जाता है।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों समेत अन्य राज्यों में भारी मांग

आगरा के इन कुशल मूर्तिकारों की कला अब केवल स्थानीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसकी धाक देश के कई हिस्सों में स्थापित हो चुकी है। मूर्तिकार लीला देवी ने बताया कि उनके द्वारा तैयार की गई भगवान गणेश की मूर्तियों की मांग उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे लखनऊ, अलीगढ़, कानपुर, इटावा और मैनपुरी में अत्यधिक रहती है। उत्तर प्रदेश की सीमा से बाहर भी इनकी कला की बड़ी मांग है, जिसके तहत गुजरात के सूरत, महाराष्ट्र के मुंबई और राजस्थान के कई शहरों से प्रतिमाओं के लिए एडवांस ऑर्डर प्राप्त होते हैं।

त्योहार को ध्यान में रखते हुए इस समय कार्यशालाओं में काम की गति बहुत तेज हो गई है। ग्राहकों की पसंद और आयोजन के स्तर को ध्यान में रखते हुए यहां एक फुट से लेकर सात फुट तक की ऊंचाई वाली गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। लीला देवी ने कीमतों के बारे में बताते हुए कहा कि मूर्तियों की दर उनके आकार और उन पर की गई बारीक नक्काशी के आधार पर तय होती है। उनके यहां न्यूनतम 2 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 8 हजार रुपये तक की बेहद आकर्षक गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें समय पर पूरा करने के लिए पूरा परिवार दिन-रात काम कर रहा है।

सवाल-जवाब

आगरा में ये मूर्तियां मुख्य रूप से कहां बनाई जा रही हैं?
ये मूर्तियां आगरा के सेंटर पार्क के पास बड़े पैमाने पर बनाई जा रही हैं, जहां एक परिवार पिछले 20 वर्षों से यह काम कर रहा है।
इन मूर्तियों को बनाने में किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
इन मूर्तियों को बनाने में मुख्य रूप से POP और खड़िया मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण को दूषित नहीं करती हैं।
मूर्तियों की ऊंचाई और उनका मूल्य कितना है?
यहाँ 1 फुट से लेकर 7 फुट तक की मूर्तियां बनाई जाती हैं। इनकी कीमत डिजाइन और आकार के हिसाब से 2,000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये तक होती है।
आगरा की बनी इन मूर्तियों की सप्लाई किन राज्यों में होती है?
इन मूर्तियों की सप्लाई उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा गुजरात (सूरत), महाराष्ट्र (मुंबई) और राजस्थान जैसे राज्यों में की जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp