भारत में अपनी मेहनत और अनूठे तरीकों से बिजनेस करने वालों की कोई कमी नहीं है। लोग अपने हुनर के बल पर ऐसे नायाब तरीके ढूंढ निकालते हैं कि देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखा नजारा जमशेदपुर से रांची जाने वाले हाईवे पर देखने को मिल रहा है, जहाँ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मुरादाबाद जिलों से आए कुछ लोगों ने एक ट्रक को ही पूरी तरह से कपड़ों का चलता-फिरता शोरूम बना दिया है। आइए इस दिलचस्प कारोबार के बारे में विस्तार से जानते हैं।
बिना दुकान किराए पर लिए शुरू किया कारोबार
इन कारोबारियों ने बाजार में किसी महँगी दुकान को किराए पर लेने या स्थायी जगह तलाशने की जहमत नहीं उठाई है। इसके बजाय, उन्होंने सड़क के किनारे तिरपाल का सहारा लेकर अपना पूरा व्यापार सजा लिया है। इनके पास सर्दियों के मौसम में काम आने वाले गर्म कपड़ों से लेकर रजाई, कंबल, शॉल, तकिए और दरियाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्राहकों को एक ही छत के नीचे यानी एक ही जगह पर कपड़े और घरेलू इस्तेमाल का सारा सामान मिल जाता है, जिससे राहगीर और स्थानीय लोग रुककर खरीदारी कर रहे हैं।
रेहान मलिक ने साझा किया अपना अनुभव
इस अनूठी दुकान के संचालक रेहान मलिक का कहना है कि उन्हें व्यापार करने के लिए किसी महँगी पक्की दुकान या बाजार की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती है। वे लोग अपना सारा माल ट्रक में भरकर अलग-अलग शहरों का रुख करते हैं और सड़क किनारे उपयुक्त जगह देखकर तिरपाल तानकर दुकान लगा लेते हैं। इस तरीके से जहाँ एक तरफ दुकान का भारी किराया बच जाता है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुँचने का बेहतरीन अवसर भी मिल जाता है।
रेहान मलिक के अनुसार, वे अपने सामान की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते हैं ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे। लोग सामान को खुद देखकर और उसकी क्वालिटी को परखकर ही खरीदारी करते हैं। वे अपने साथ विभिन्न प्रकार के गर्म कपड़े और घरेलू जरूरत का सामान रखते हैं ताकि आने वाले ग्राहकों को पर्याप्त विकल्प मिल सकें। इसी फॉर्मूले के तहत उनका यह अनोखा कारोबार एक शहर से सफर करते हुए दूसरे शहर तक आसानी से चलता रहता है।
सर्दियों की आहट के साथ उमड़ने लगी भीड़
जमशेदपुर में अब गुलाबी ठंड ने धीरे-धीरे अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी है। सुबह और शाम के समय हल्के जाड़े का अहसास होने के साथ ही आम लोगों ने अपनी सर्दियों की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। ऐसे में हाईवे के किनारे लगाई गई इस अस्थायी दुकान पर खरीदारों की अच्छी-खासी चहल-पहल देखने को मिल रही है। लोग अपनी जरूरत और जेब के बजट के अनुसार रजाई, कंबल और अन्य ऊनी कपड़ों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। अगर कीमतों की बात की जाए, तो यहाँ कंबल की शुरुआती कीमत करीब 300 से 400 रुपये तक बताई जा रही है। कम बजट में सर्दियों का जरूरी सामान मिलने के कारण यह दुकान लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
कम लागत में स्वरोजगार की एक नई मिसाल
यह अनोखा कारोबार उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो बहुत कम लागत में अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। सही योजना, कड़ी मेहनत और ग्राहकों की नब्ज को समझकर बिना किसी बड़ी दुकान के भी सफलता हासिल की जा सकती है। रेहान मलिक और उनके साथियों का यह चलता-फिरता बिजनेस मॉडल यह साबित करता है कि अगर सोच में नयापन हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो सड़क किनारे खड़ा एक अदद ट्रक भी कमाई का एक शानदार जरिया बन सकता है।
























