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गंगा घाटों से 24 घंटे में हटाया गया 7 हजार मीट्रिक टन कचरा, हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बाद बड़ा अभियानभारत
13 अग॰ 2026, 12:22 am (1 दिन पहले)· 2

गंगा घाटों से 24 घंटे में हटाया गया 7 हजार मीट्रिक टन कचरा, हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बाद बड़ा अभियान

कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद हरिद्वार में गंगा नदी के घाटों पर 7 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया था, जिसे नगर निगम के 1,000 से अधिक कर्मचारियों ने भारी मशीनों और 89 ट्रकों की मदद से साफ किया।

कांवड़ यात्रा के समापन के बाद उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में गंगा नदी के तटों पर बड़े पैमाने पर गंदगी का मंजर देखने को मिला। लाखों कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर लौट गए, लेकिन पीछे घाटों पर पुराने कपड़े, जूते-चप्पल, पॉलीथीन बैग, फटे झोले और सड़ा हुआ भोजन भारी मात्रा में छोड़ गए। इस स्थिति से निपटने और धार्मिक स्थल को स्वच्छ बनाने के लिए हरिद्वार नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने एक विशाल 24 घंटे का सफाई अभियान संचालित किया।

घाटों पर बिखरा 7 हजार मीट्रिक टन कचरा और सफाई कर्मियों की मुस्तैदी

यात्रा समाप्त होने के तुरंत बाद गंगा तटों की स्थिति काफी खराब थी। हर तरफ गीले कपड़े और भोजन के अवशेष पड़े होने के कारण दुर्गंध फैल रही थी। इस कचरे का कुल वजन लगभग 7 हजार मीट्रिक टन आंका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 1,000 से अधिक सफाई कर्मचारियों को काम पर लगाया गया जिन्होंने रात भर अभियान चलाकर घाटों की सफाई की।

89 बड़े ट्रकों और भारी मशीनों से कचरे का निस्तारण

बिखरे हुए कचरे को समेटने के लिए भारी मशीनों का सहारा लिया गया। जमा किए गए कचरे को 89 से ज्यादा बड़े ट्रकों में भरकर हरिद्वार शहर की सीमा से बाहर भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष की कांवड़ यात्रा में 4 करोड़ 80 लाख से अधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। इस विशाल जनसमूह के कारण व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, फिर भी नगर निगम रोज रात में सफाई अभियान चलाकर दिनभर की गंदगी साफ करता आ रहा था।

अंतिम दो दिनों में डाक कांवड़ का दबाव और 95 प्रतिशत सफाई का लक्ष्य

कांवड़ यात्रा के अंतिम दो दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बहुत अधिक बढ़ गई थी। मुख्य रूप से डाक कांवड़ लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अंतिम 48 घंटों में सफाई कार्य बाधित रहा। इसी वजह से मात्र दो दिनों के भीतर 7 हजार मीट्रिक टन का भारी कचरा घाटों पर इकट्ठा हो गया। मुख्य नगर आयुक्त नंदर कुमार के अनुसार, नगर निगम ने सुभाष घाट, नई घाट, अलकनंदा घाट और विष्णु घाट पर 95 प्रतिशत सफाई का काम पूरा कर लिया है।

सफाई के बाद गंगा आरती और हालिया हादसे की जानकारी

व्यापक स्वच्छता अभियान पूरा होने के उपरांत गंगा घाटों पर पारंपरिक गंगा आरती का आयोजन किया गया। आरती में शामिल भक्तों ने प्रशासनिक तत्परता की सराहना की, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं को स्वयं स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। कांवड़ यात्रा के दौरान पूर्व में एक दुखद हादसा भी सामने आया था, जिसमें गंगनहर में डूबते हुए एक साथी को बचाने के प्रयास में चंडीगढ़ से आए 4 कांवड़ियों की डूबने से मृत्यु हो गई थी। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार में गंगा नदी में डूबते एक व्यक्ति को एसडीआरएफ के जवान द्वारा सुरक्षित बचाए जाने का मामला भी प्रकाश में आया था।

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सवाल-जवाब

कांवड़ यात्रा के बाद हरिद्वार के गंगा घाटों से कितना कचरा निकला?
कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद गंगा के घाटों से लगभग 7 हजार मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया गया।
इस कचरे को साफ करने में कितने कर्मचारी और वाहन लगाए गए?
सफाई अभियान में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को लगाया गया तथा कचरा हटाने के लिए 89 से ज्यादा बड़े ट्रकों का उपयोग किया गया।
इस वर्ष हरिद्वार में कितने कांवड़िए पहुंचे थे?
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान 4 करोड़ 80 लाख से अधिक कांवड़िए हरिद्वार आए थे।
किन मुख्य घाटों पर 95 प्रतिशत तक सफाई पूरी हो चुकी है?
मुख्य नगर आयुक्त नंदर कुमार के अनुसार सुभाष घाट, नई घाट, अलकनंदा घाट और विष्णु घाट को 95 प्रतिशत तक साफ कर दिया गया है।
अंतिम दो दिनों में सफाई का काम क्यों रुक गया था?
यात्रा के अंतिम दो दिनों में डाक कांवड़ लाने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण सफाई का काम नहीं हो पाया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

हरिद्वार में 4 करोड़ 80 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने और मात्र 24 घंटे में 7 हजार मीट्रिक टन कचरा उठाने का यह अभियान धार्मिक आयोजनों में पर्यावरण प्रबंधन की बड़ी चुनौती को रेखांकित करता है। भविष्य में इस तरह के विशाल आयोजनों के दौरान कचरा निस्तारण के लिए और अधिक विकेंद्रीकृत प्रणालियों और जनसहभागिता की दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता होगी, ताकि नदी की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह घटना न केवल स्वच्छता प्रबंधन की बड़ी चुनौती को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के प्रशासनिक दायित्वों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। चार करोड़ अस्सी लाख की भारी भीड़ के प्रबंधन के दौरान घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना एक पेचीदा मामला रहा, जिसमें बचाव प्रयासों के बावजूद कुछ दुखद हादसे भी हुए। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए कानून-व्यवस्था और नगर निगम को भीड़ नियंत्रण तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अधिक पुख्ता और अग्रिम रणनीति बनानी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि विशाल आयोजनों में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का ढांचा केवल उत्तर-उत्सव सफाई तक सीमित नहीं रह सकता। 4 करोड़ 80 लाख श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ दर्शाती है कि आगामी पर्वों में निरंतर निगरानी और पूर्व-नियोजित डंपिंग जोन जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं अनिवार्य होंगी, अन्यथा पारिस्थितिकी और लोक स्वास्थ्य पर गंभीर संकट आ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान 4 करोड़ 80 लाख श्रद्धालुओं के आने से कानून-व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता की गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई। मात्र 24 घंटे में 7 हजार मीट्रिक टन कचरा हटाना प्रशासनिक मुस्तैदी को दर्शाता है, लेकिन यह घटना इस बात की भी समीक्षा की मांग करती है कि आगामी आयोजनों में पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के लिए कानूनी और नियामकीय प्रावधानों को अधिक सख्त कैसे बनाया जाए।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह विशाल जनसैलाब न केवल उत्तराखंड बल्कि उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक समन्वय की एक बड़ी परीक्षा है। जब लाखों श्रद्धालु सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हैं, तो अंतर-राज्यीय परिवहन और स्थानीय निकायों पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। भविष्य के ऐसे आयोजनों में केवल सफाई अभियान पर निर्भर रहने के बजाय, स्रोत पर ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि धार्मिक पर्यटन और पारिस्थितिकी संतुलन के बीच एक स्थायी तालमेल बनाया जा सके।

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