पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस्लामाबाद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में नया घटनाक्रम सामने आया। 'यादगार-ए-फतह' स्मारक के भव्य उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक साथ मंच पर उपस्थित रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में भारत को लेकर आक्रामक तेवर दिखाए और जल अधिकारों से लेकर सीमा सुरक्षा तक कई कड़े दावे किए। हालांकि उनके इस भाषण को पाकिस्तान के भीतर जारी गंभीर अंदरूनी संकटों से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भारत पर आक्रामक रुख और सिंधु जल का मुद्दा
इस्लामाबाद में जनता को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ का मुख्य जोर सिंधु जल संधि और कश्मीर के संवेदनशील मुद्दों पर रहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में दावा किया कि पाकिस्तान के हिस्से आने वाले पानी की एक-एक बूंद उनके देश के लिए एक सख्त रेड लाइन की तरह है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भारत को सही रास्ते पर आना होगा, अन्यथा उसे सीधा और करारा जवाब दिया जाएगा। अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का समर्थक है, लेकिन उनकी इस शांतिप्रिय नीति को किसी भी सूरत में कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए दोहराया कि वहां के लोगों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
मई 2025 के संघर्ष का जिक्र और अमेरिका की भूमिका
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण के दौरान मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव और उसके बाद लागू हुए सीजफायर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इस युद्धविराम को पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत के रूप में चित्रित किया। देश की सेना और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद देश का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। इसी नैरेटिव को स्थापित करने के उद्देश्य से 'यादगार-ए-फतह' का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने 2025 के युद्धविराम को अंजाम तक पहुंचाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता और भूमिका की खुलकर तारीफ की और आने वाले समय में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई।
आंतरिक अशांति और बलूचिस्तान-पीओके पर मौन
शहबाज शरीफ के इस उग्र बयान के पीछे की वजह पाकिस्तान की वर्तमान घरेलू स्थिति मानी जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकार के खिलाफ उठ रहे जोरदार विरोध प्रदर्शनों ने शासन की नींंव हिला दी है। ऐसे में विदेश नीति और भारत विरोधी बयानबाजी का सहारा लेकर जनभावनाओं को सहलाने का प्रयास किया गया। भाषण की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में आम नागरिकों द्वारा किए जा रहे बड़े पैमाने के प्रदर्शनों का कोई जिक्र नहीं किया गया। इसी तरह बलूचिस्तान में स्थानीय नागरिकों के खिलाफ जारी सैन्य अभियानों और वायुसेना की ओर से की गई एयरस्ट्राइक पर भी प्रधानमंत्री ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। घरेलू मोर्चे पर घिरी सरकार ने बाहरी चुनौतियों पर तीखे बयान देकर अंदरूनी सवालों से पल्ला झाड़ लिया।


















