कर्नाटक के गुलबर्गा जिले में एक भयानक और हृदय विदारक वारदात सामने आई है, जहां पारिवारिक विवाद के चलते एक व्यक्ति ने आत्मघाती कदम उठाते हुए अपने ससुराल में खुद को विस्फोटकों से उड़ा लिया। अलंद तालुका स्थित मटकी टांडा गांव में मंगलवार सुबह हुई इस त्रासदी में 49 वर्षीय व्यक्ति और उसकी 15 साल की नाबालिग बेटी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भयावह धमाके में परिवार के पांच अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलसकर घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पारिवारिक कलह और घटना की पृष्ठभूमि
पुलिस द्वारा जुटाई गई प्राथमिक जानकारी के मुताबिक मृतक व्यक्ति की पहचान शिवलाल राठौड़ के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 49 वर्ष थी। शिवलाल महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक पत्थर की खदान में मजदूरी और काम करता था। पिछले लंबे समय से उसका अपनी पत्नी सविता के साथ गंभीर घरेलू विवाद चल रहा था। घर में रोज-रोज होने वाले झगड़ों और तनाव से परेशान होकर सविता कुछ समय पूर्व अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर पुणे से अपने मायके आ गई थी। उसके साथ उसकी 15 वर्षीय बेटी वीरा और 19 वर्षीय बेटा प्रकाश मटकी टांडा गांव में रहने लगे थे। पत्नी का मायके में ही टिके रहना और पारिवारिक विवाद का समाधान न हो पाना शिवलाल को लगातार नागवार गुजर रहा था। इसी आक्रोश में उसने एक बेहद खौफनाक और जानलेवा योजना तैयार कर ली।
कमरा बंद कर किया आत्मघाती धमाका
मंगलवार की सुबह शिवलाल अचानक पुणे से अपने ससुराल मटकी टांडा पहुंच गया। घर के भीतर प्रवेश करते ही उसने अपनी पत्नी सविता और ससुराल के अन्य सदस्यों के साथ तीखी बहसबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते कहासुनी इतनी अधिक बढ़ गई कि शिवलाल ने अपना आपा पूरी तरह खो दिया। इससे पहले कि घर में मौजूद लोग उसकी नीयत समझ पाते या बचाव का प्रयास करते, उसने बहुत ही फुर्ती से कमरे का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उस वक्त उस बंद कमरे के भीतर उसकी पत्नी सविता, बेटी वीरा, बेटा प्रकाश और कुछ अन्य रिश्तेदार मौजूद थे।
शिवलाल अपनी कमर पर औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाली जिलेटिन स्टिक्स की बेल्ट बांधकर ससुराल पहुंचा था। जैसे ही उसने कमरे की कुंडी बंद की, उसने बिना किसी हिचकिचाहट के धमाका करने वाला बटन दबा दिया। विस्फोट इतना भीषण और तेज था कि पूरे कमरे की छत और दीवारें दहल गईं तथा धमाके की गूंज से पूरा मटकी टांडा गांव कांप उठा।
बेटी की दर्दनाक मौत और घायलों का इलाज
इस आत्मघाती धमाके में शिवलाल राठौड़ के शरीर के चीथड़े उड़ गए और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से शिवलाल के पास ही बैठी उसकी 15 साल की बेटी वीरा भी इस तेज विस्फोट की सीधी चपेट में आ गई और उसने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं कमरे में उपस्थित अन्य लोग भी इस धमाके की आग और मलबे से बुरी तरह झुलस गए।
घायलों में शिवलाल की पत्नी सविता, उसका 19 वर्षीय बेटा प्रकाश, 30 वर्षीय रिश्तेदार सुरेखा चव्हाण, 12 वर्षीय विवेक चव्हाण तथा नितेश नाम का एक अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। पड़ोसियों और ग्रामीणों की मदद से सभी पांचों घायलों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार घायलों में से कुछ की शारीरिक स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा देखरेख में रखा गया है।
औद्योगिक विस्फोटक की तस्करी और पुलिस जांच
इस दिलदहला देने वाले अपराध के बाद कर्नाटक पुलिस के समक्ष सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वाणिज्यिक श्रेणी का इतना खतरनाक विस्फोटक पुणे से गुलबर्गा तक कैसे पहुंचाया गया। क्योंकि शिवलाल पुणे में पत्थर की खदान में कार्यरत था, इसलिए वह चट्टानों को तोड़ने वाले कमर्शियल एक्सप्लोसिव्स और डिटोनेटर की कार्यप्रणाली तथा इस्तेमाल से अच्छी तरह वाकिफ था।
शुरुआती तफ्तीश के दौरान पुलिस को यह प्रबल आशंका है कि शिवलाल ने खदान कार्यस्थल से ही चुपचाप जिलेटिन स्टिक्स और डिटोनेटर चुराए थे और उन्हें छिपाकर पुणे से गुलबर्गा लाया था। कर्नाटक पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि खदानों से विस्फोटक सामग्री की चोरी या अनधिकृत आवाजाही कैसे संभव हुई। क्या खदान प्रबंधन के स्तर पर सुरक्षा में कोई बड़ी लापरवाही हुई थी? जो मामला शुरुआत में सामान्य घरेलू कलह प्रतीत हो रहा था, उसने अब एक गंभीर आपराधिक और औद्योगिक सुरक्षा उल्लंघन का रूप धारण कर लिया है।



















