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कानपुर में उफान पर गंगा, बैराज से शुक्लागंज तक फैला सैलाब, प्रयागराज और वाराणसी की तरफ बढ़ा खतराभारत
10 सित॰ 2026, 2:11 pm (1 घंटे पहले)· 2

कानपुर में उफान पर गंगा, बैराज से शुक्लागंज तक फैला सैलाब, प्रयागराज और वाराणसी की तरफ बढ़ा खतरा

कानपुर में गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बैराज के सभी गेट खोलकर भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर निचले इलाकों के लिए गंभीर संकट बन गया है। नदी का पानी अपने अब तक के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों और तटवर्ती बस्तियों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।

भय के साये में ग्रामीण और डूबते रास्ते

बनियापुरवा और भोपालपुरवा जैसे कई गांवों में पानी गलियों को पार कर रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ जगहों पर जलस्तर कमर तक पहुंच गया है। चैनपुरवा समेत अन्य बस्तियों में भी स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है। ग्रामीणों को अपने घरों के डूबने और खाने-पीने के सामान के खराब होने की चिंता सता रही है। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। हर दो घंटे में पानी का स्तर करीब एक सेंटीमीटर बढ़ रहा है, जिससे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

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समुद्र जैसा विशाल रूप और प्रशासन की सक्रियता

गंगा बैराज से लेकर शुक्लागंज तक का पूरा इलाका किसी समंदर की तरह नजर आ रहा है। पानी के तेज बहाव और दूर तक फैले फैलाव ने तटवर्ती इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। प्रशासन की तरफ से यह तैयारी की जा रही है कि यदि हालात ज्यादा बिगड़ते हैं, तो लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा सके।

लाखों क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज और खुले बैराज के गेट

लोअर गंगा कैनाल के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि बैराज से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा चुका है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैराज के सभी 30 गेट पूरी तरह खोल दिए गए हैं। जलस्तर में यदि और इजाफा होता है, तो पानी छोड़े जाने की मात्रा को और बढ़ाया जा सकता है। उपजिलाधिकारी सदर अनुभव सिंह ने बताया कि प्रभावित गांवों विशेषकर बनियापुरवा में राहत कार्यों के लिए ट्रैक्टरों की व्यवस्था की गई है। सिंचाई विभाग के गेज रीडर उत्तम पाल के अनुसार पानी लगातार बढ़ रहा है और शुक्लागंज में यह चेतावनी बिंदु तक पहुंच चुका है, जिसके चलते आगे का समय और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सवाल-जवाब

कानपुर में गंगा का जलस्तर कहां तक पहुंच गया है?
गंगा बैराज पर जलस्तर 114.620 मीटर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जबकि शुक्लागंज में यह 113 मीटर के चेतावनी बिंदु को छू चुका है।
बैराज से कितना पानी छोड़ा जा रहा है?
गंगा बैराज से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है और इसके सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं।
कौन-से गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं?
बनियापुरवा, भोपालपुरवा और चैनपुरवा जैसे गांवों में पानी गलियों और घरों तक पहुंच गया है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
पानी बढ़ने की रफ्तार क्या है?
सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर हर दो घंटे में करीब एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है।
प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?
जिला प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं और प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मदद के लिए ट्रैक्टर लगाए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

कानपुर बैराज से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज और सभी तीस गेटों का खुलना केवल स्थानीय बाढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रयागराज और वाराणसी जैसे downstream शहरों के लिए भी गंभीर प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर रहा है। आपदा प्रबंधन तंत्र को अब निचले इलाकों से समय रहते विस्थापन और राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति पर तुरंत कड़े कदम उठाने होंगे, क्योंकि हर दो घंटे में बढ़ता जलस्तर खतरे की घंटी है।

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

करण मल्होत्रा ने बिल्कुल सही रेखांकित किया है कि कानपुर से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने का यह असर सिर्फ स्थानीय नहीं है। बैराज के सभी तीस गेटों का खुलना और हर दो घंटे में एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि प्रयागराज और वाराणसी जैसे डाउनस्ट्रीम शहरों तक यह सैलाब पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। निचले इलाकों से लोगों और मवेशियों का सुरक्षित विस्थापन अब प्रशासन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए, क्योंकि ट्रैक्टरों जैसी स्थानीय व्यवस्थाओं के सहारे ज्यादा समय तक बचाव कार्य चलाना मुश्किल होगा।

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