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गांव के तालाबों से हटेगा प्लास्टिक, आजमगढ़ में शुरू हुई सौ पंचायतों की मुहिमउत्तर प्रदेश
5 जुल॰ 2026, 10:23 am (116 दिन पहले)· 4

गांव के तालाबों से हटेगा प्लास्टिक, आजमगढ़ में शुरू हुई सौ पंचायतों की मुहिम

आजमगढ़ जिला प्रशासन ने जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए 100 ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक मुक्त मॉडल तालाब बनाने की योजना शुरू की है, जिसका पहला चरण 22 ब्लॉकों से शुरू हो रहा है.

आजमगढ़ जिले में शहरी इलाकों के साथ-साथ अब गांवों की सूरत बदलने पर भी जोर दिया जा रहा है. जिला प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में हरियाली बढ़ाने और पानी बचाने के मकसद से एक नई योजना पर काम शुरू किया है, जिसके तहत गांव के तालाबों को पूरी तरह प्लास्टिक से मुक्त बनाया जाएगा और उनके आसपास हरा भरा माहौल भी तैयार किया जाएगा. इसका सीधा फायदा गांव में रहने वाले लोगों को बेहतर वातावरण के रूप में मिलेगा.

इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी नाम से एक अभियान चलाया जा रहा है. इसकी शुरुआत आजमगढ़ जिले की 100 ग्राम पंचायतों से की जा रही है, जहां पर्यावरण के अनुकूल और प्लास्टिक मुक्त मॉडल तालाब बनाए जाएंगे. प्रशासन का मानना है कि इन तालाबों के तैयार होते ही गांवों में जल संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव आएगा, साथ ही आसपास की प्रकृति और मूक जानवरों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा. योजना दो चरणों में लागू की जाएगी. पहले चरण में जिले के 22 ब्लॉकों में से हर ब्लॉक से एक-एक तालाब चुना गया है, जबकि दूसरे चरण में हर ब्लॉक से चार-चार तालाब चुने जाएंगे.

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तालाबों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की खास व्यवस्था

इन मॉडल तालाबों की सबसे बड़ी खासियत यही रहेगी कि इनमें कहीं भी प्लास्टिक का नामोनिशान नहीं होगा. साफ सफाई बनाए रखने के लिए तालाबों में फिल्टर चैंबर लगाए जाएंगे, जिससे आसपास गंदगी न फैले और स्वच्छता बनी रहे. साथ ही तालाब को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए अलग से पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे, ताकि जमीन के अंदर पानी को रिचार्ज करने का काम भी बेहतर तरीके से हो सके. एक बार यह तालाब तैयार हो जाएं तो गांव वाले इनका इस्तेमाल खेतों की सिंचाई करने और मवेशियों के लिए पानी के स्रोत के तौर पर भी कर सकेंगे.

पानी को साफ रखने के लिए बायो फिल्टर और पौधे

तालाब का पानी हमेशा साफ बना रहे, इसके लिए ग्रे वॉटर के तालाब में पहुंचने से पहले ही बायो फिल्टर सिस्टम लगाए जाएंगे. इसके अलावा नाली के आखिरी छोर पर कंकर और रेत का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि गंदा पानी सीधे तालाब में न मिले. तालाब के चारों ओर कई तरह के उपयोगी पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध रहे और हरियाली बनी रहे. इस पूरी कवायद का मकसद तालाबों को सिर्फ पानी जमा करने की जगह न बनाकर, गांव के पर्यावरण को सुधारने का एक जरिया बनाना है.

अधिकारी ने बताया योजना का मकसद

इस पूरे मामले पर जिला पंचायती राज अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के मकसद से यह मॉडल तालाब विकसित किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इससे गांव में रहने वाले लोगों को सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि यह तालाब खेतों की सिंचाई और पशुओं के लिए भी उतने ही उपयोगी साबित होंगे.

सवाल-जवाब

आजमगढ़ में कितनी ग्राम पंचायतों में मॉडल तालाब बनाए जाएंगे?
शुरुआत में जिले की 100 ग्राम पंचायतों में यह मॉडल तालाब बनाए जाएंगे.
यह अभियान किस नाम से चलाया जा रहा है?
इसे मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी अभियान नाम दिया गया है.
पहले चरण में कितने ब्लॉकों में तालाब चुने गए हैं?
प्रथम चरण में जिले के 22 ब्लॉकों में से हर ब्लॉक में एक-एक तालाब चुना गया है.
दूसरे चरण में क्या योजना है?
दूसरे चरण में हर ब्लॉक में चार-चार तालाब चुने जाएंगे.
तालाब में पानी साफ रखने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?
ग्रे वॉटर के प्रवेश से पहले बायो फिल्टर सिस्टम और नाली के अंत में कंकर-रेत का इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही फिल्टर चैंबर भी बनाए जाएंगे.
इन तालाबों का उपयोग किन कामों में होगा?
इनका उपयोग खेतों की सिंचाई, पशुपालन और भूजल रिचार्ज के लिए किया जा सकेगा.
इस पहल पर अधिकारी ने क्या कहा?
जिला पंचायती राज अधिकारी पवन कुमार ने कहा कि इससे जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीणों को सिंचाई व पशुपालन में फायदा होगा.
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