बहराइच जिले की महसी तहसील में घाघरा नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लिए हर बरसात एक डरावना मौसम बनकर आती थी। बारिश बढ़ने के साथ ही नदी का बहाव इतना तेज हो जाता था कि कटान अपने चरम पर पहुंच जाती थी, जिसमें पक्के और कच्चे दोनों तरह के मकान और किसानों के खेत बहा ले जाती थी, जो कई परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया थे। लेकिन पिछले साल से इस बर्बादी के सिलसिले पर काफी हद तक रोक लग गई है, और इसकी वजह है सिंचाई विभाग की एक आधुनिक तकनीक, जिसे जियोट्यूब कहा जाता है।
टिकुरी गांव में दिखा बदलाव
महसी क्षेत्र के टिकुरी गांव के प्रधान संजय कुमार त्रिवेदी बताते हैं कि योगी सरकार के निर्देश पर पिछली बार बाढ़ आने से पहले ही यह खास जियोट्यूब लगवाया गया था। ये विशाल ट्यूब 50-50 मीटर लंबे हैं और इन्हें नदी के किनारे-किनारे लगातार कतार में बिछाया गया, जिससे नदी के तेज बहाव की धार टूट जाती है और वह किनारे तक पहुंचने से पहले ही कमजोर पड़ जाती है। इसका फायदा कई गांवों को मिला है। त्रिवेदी के मुताबिक, पिछले साल भी इसके लगने के बाद कटान काफी हद तक थम गई थी, और इस बार भी नदी की कटान पूरी तरह बेअसर होती दिख रही है।
इतना मजबूत क्यों है यह खास ट्यूब
इस जियोट्यूब की खासियत उसमें इस्तेमाल हुए धागों में है, जो न तो जल्दी कटते हैं और न ही पानी में सड़ते हैं। नदी की तेज लहरें और पानी का भारी दबाव भी इन धागों को नुकसान नहीं पहुंचा पाता। सबसे अहम बात यह है कि महीनों तक लगातार पानी में डूबे रहने के बावजूद यह सामग्री जल्दी खराब नहीं होती। मजबूती और टिकाऊपन का यही मिश्रण जियोट्यूब को कटान का एक लंबे समय तक चलने वाला समाधान बनाता है, न कि एक ऐसा अस्थायी उपाय जिसे हर साल दोबारा लगाना पड़े।
जिन्हें डर था सब कुछ खोने का, उन्हें मिली राहत
सालों तक हर बाढ़ के मौसम में घर, खेत या जमीन खोने का डर बना रहता था, जो कई परिवारों ने पीढ़ियों में बनाई या जोड़ी थी। अब यह डर कम होने के साथ ही तटीय इलाकों के लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रशासन की इस कारगर योजना और सरकार के तेज फैसलों की वजह से महसी तहसील के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को असली राहत मिली है।
हर जगह खतरा अभी टला नहीं
इतनी प्रगति के बावजूद बहराइच की नानपारा, महसी और कैसरगंज तहसीलों के कई गांवों में अब भी कटान की समस्या बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि वह इन इलाकों में नुकसान रोकने के लिए लगातार कदम उठा रहा है, लेकिन अधिकारी यह भी मानते हैं कि नदी किनारे के कई और हिस्से ऐसे हैं जहां अभी तक जियोट्यूब नहीं लगाए गए हैं और वहां इनकी सख्त जरूरत है।

















