आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जहां आम जीवन को सुगम बनाने के लिए किया जा रहा है, वहीं अपराध जगत में भी इसके दुरुपयोग के नए मामले सामने आ रहे हैं। गुजरात के साणंद स्थित प्रसिद्ध उमिया माताजी मंदिर में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने एक ऐसे ही अनोखे गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस वारदात में शामिल पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान लक्ष्मण गुर्जर, किशन गुर्जर, मुकेशनाथ कालबेलिया, सुरेशनाथ कालबेलिया और अजयनाथ कालबेलिया के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान इस चोरी की जो साजिश सामने आई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है।
गूगल मैप और सोशल मीडिया से बनाई चोरी की योजना
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड महज 18 साल का लक्ष्मण गुर्जर था। लक्ष्मण ने सोशल मीडिया से प्रेरणा लेकर गूगल मैप का सहारा लिया और मंदिर को निशाना बनाने का फैसला किया। उसने सबसे पहले गूगल मैप पर उमिया माताजी मंदिर को खोजा और वहां की तस्वीरें देखीं। तस्वीरों में मंदिर के भीतर कीमती सामान होने का अंदाजा मिलने के बाद उसने वहां बड़ी चोरी करने की योजना बनाई। इसके बाद लक्ष्मण ने व्यक्तिगत रूप से मंदिर परिसर की रेकी की, जहां उसने प्रवेश और निकास के रास्तों का बारीकी से निरीक्षण किया। अपनी योजना को सटीक रूप देने के लिए उसने गूगल मैप के माध्यम से उस पूरी सड़क की मैपिंग की जहां साथियों को खड़ा होना था। उसने स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए वीडियो तैयार किया और अपने बाकी चार साथियों को भेज दिया ताकि हर सदस्य को अपनी स्थिति की जानकारी रहे।
भीलवाड़ा से गुजरात आकर बनाई पांच लोगों की मंडली
लक्ष्मण गुर्जर और किशन गुर्जर दोनों सगे भाई हैं और मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। वे दोनों अक्सर राजस्थान से गुजरात के साणंद इलाके में सब्जी बेचने के सिलसिले में आते-जाते रहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात मुकेशनाथ कालबेलिया, सुरेशनाथ कालबेलिया और अजयनाथ कालबेलिया से हुई, जिसके बाद पांच लोगों का यह गिरोह तैयार हुआ। वारदात वाले दिन लक्ष्मण ने गिरोह के सभी सदस्यों को बोपल क्षेत्र में स्थित वकील साहेब ब्रिज के पास एकत्र होने का निर्देश दिया। यहां पहुंचने पर उसने पुलिस की डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए सभी सदस्यों के मोबाइल फोन जमा करवा लिए। इसके बाद वे सभी बोलेरो गाड़ी से मंदिर की तरफ रवाना हुए और मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर दूर गाड़ी पार्क करके पैदल चोरी करने पहुंचे।
पुराने आरोपी भाई का दिमाग और मोबाइल लोकेशन से बचाव
इस पूरे घटनाक्रम में लक्ष्मण के भाई किशन गुर्जर की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। किशन पहले भी चोरी के एक मामले में गिरफ्तार हो चुका था, जिसके कारण उसे पुलिस की कार्यप्रणाली और सर्विलांस तकनीकों का अच्छा ज्ञान था। पुलिस की लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए किशन ने पूरी वारदात के दौरान अपने मोबाइल फोन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया। चोरी की वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद दोनों भाई चांदी के गहने लेकर राजस्थान भाग गए। वहां उन्होंने उमिया माताजी मंदिर से चुराए गए चांदी के आभूषणों को पिघलाया और उन्हें 92,000 रुपये में बेच दिया। बिक्री से मिले रुपयों में से उन्होंने 10,000 रुपये का इस्तेमाल गाड़ी के लिए डीजल खरीदने में किया।
10 दिन पुलिस से बचने की मन्नत और अगली चोरी से पहले गिरफ्तारी
लक्ष्मण गुर्जर ने चोरी करने से पहले उमिया माताजी से एक अनोखी मन्नत मांगी थी। उसका मानना था कि अगर वह चोरी के बाद 10 दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से बचा रहा, तो वह माताजी को 10,000 रुपये का चढ़ावा देगा। राजस्थान में चांदी बेचकर मिले पैसों में से उसने 10,000 रुपये मंदिर में चढ़ावे के रूप में अर्पित करके अपनी मन्नत पूरी की। हालांकि, इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियां यहीं खत्म नहीं होने वाली थीं। वे अहमदाबाद के इसनपुर इलाके में टायरों की एक बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। इससे पहले कि वे इस दूसरी वारदात को अंजाम दे पाते, साणंद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के सभी पांचों सदस्यों को धर दबोचा और पूरे मामले का भंडाफोड़ कर दिया।



















