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गुजरात पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा से राहत, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की घोषणागुजरात
10 अक्तू॰ 2026, 3:49 pm (19 दिन पहले)· 1

गुजरात पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा से राहत, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की घोषणा

गुजरात सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को पुलिस भर्ती की परीक्षा से छूट देने का निर्णय लिया है, जिससे चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं को सीधे लाभ मिलेगा।

गुजरात सरकार ने रक्षा बलों में अपनी सेवा पूरी कर चुके पूर्व अग्निवीरों के हित में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। राज्य के पुलिस विभाग में भर्ती होने के इच्छुक पूर्व अग्निवीरों को अब चयन परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने आधिकारिक रूप से यह रियायत देने की घोषणा की है, जिससे चार साल बाद सेना से लौटने वाले नौजवानों को नागरिक सुरक्षा व्यवस्था में करियर बनाने का सीधा अवसर मिल सकेगा।

शारीरिक दक्षता छूट और कोटे के बाद नया फैसला

लिखित परीक्षा से मुक्ति दिए जाने से पहले भी राज्य सरकार ने इन पूर्व सैनिकों के लिए कई रियायतों की घोषणा की थी। पूर्व अग्निवीरों को पहले ही पुलिस बहाली की शारीरिक परीक्षा से छूट दी जा चुकी है और उनकी अधिकतम उम्र सीमा में भी ढील का नियम बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, गुजरात पुलिस, कारागार विभाग और वन विभाग की विशिष्ट रिक्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पहले से निर्धारित की गई है। इस नई घोषणा के जुड़ने से भर्ती प्रक्रिया उनके लिए बेहद सुगम हो जाएगी।

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अग्निपथ योजना की रूपरेखा और सेवा शर्तें

भारत सरकार अपनी महत्वाकांक्षी अग्निपथ योजना के तहत युवाओं का चयन भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के अल्पकालिक कार्यकाल के लिए करती है। इस प्रक्रिया से चुने गए सैनिकों को अग्निवीर नाम दिया गया है। योजना के नियमों के अनुसार केवल 17.5 से 21 वर्ष के बीच के युवा ही इस भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने के पात्र होते हैं। चार साल का सैन्य कार्यकाल पूरा होने पर कुल दल के 25 प्रतिशत सर्वश्रेष्ठ सैनिकों को सेना में नियमित और स्थायी सेवा प्रदान की जाती है, जबकि शेष 75 प्रतिशत जवानों को एकमुश्त विदाई देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है।

चार साल के कार्यकाल का मासिक वेतन ढांचा

सैन्य सेवा के दौरान अग्निवीरों के वेतन का स्तर साल दर साल बढ़ता रहता है। पहले वर्ष में प्रत्येक अग्निवीर को 30 हजार रुपये का मासिक मानदेय और नियमानुसार अन्य भत्ते मिलते हैं। दूसरे वर्ष में यह मासिक वेतन बढ़कर 33 हजार रुपये और साथ में भत्ते हो जाता है। तीसरे साल में जवानों को प्रतिमाह 36 हजार 500 रुपये के साथ भत्तों का भुगतान किया जाता है। सेवा के अंतिम यानी चौथे वर्ष में मानदेय की राशि 40 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है, जिसके साथ सभी लागू भत्ते भी दिए जाते हैं।

सवाल-जवाब

गुजरात में पूर्व अग्निवीरों को पुलिस भर्ती में क्या नई छूट मिली है?
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी के अनुसार पूर्व अग्निवीरों को अब गुजरात पुलिस भर्ती की चयन परीक्षा से पूरी तरह छूट दी जाएगी।
पूर्व अग्निवीरों को पहले से कौन सी सुविधाएं मिल रही थीं?
उन्हें शारीरिक परीक्षा से छूट, उम्र सीमा में रियायत और पुलिस, जेल तथा वन विभाग में 20 फीसदी आरक्षण पहले ही दिया जा चुका है।
अग्निपथ योजना में युवाओं की आयु सीमा क्या तय है?
इस योजना के तहत 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के बीच की आयु वाले युवा भर्ती के लिए पात्र होते हैं।
चार साल की सेवा के बाद कितने अग्निवीरों को स्थायी किया जाता है?
कुल अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को स्थायी सेवा मिलती है, जबकि 75 प्रतिशत सेवामुक्त हो जाते हैं।
अग्निवीरों को पहले और चौथे साल में कितना मासिक वेतन मिलता है?
पहले साल में 30 हजार रुपये प्रतिमाह और चौथे साल में 40 हजार रुपये प्रतिमाह के साथ लागू भत्ते दिए जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·18 दिन पहले

मेरे भाई ने जब चार साल की फौज की नौकरी पूरी की थी, तब उसे वापस आकर नौकरी ढूंढने में बहुत पसीना बहाना पड़ा था। गुजरात सरकार का यह कदम वाकई उन युवाओं के चेहरे पर मुस्कान ले आएगा जो देश की सेवा के बाद अपने भविष्य को लेकर फिक्रमंद रहते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

अग्निवीरों के लिए लिखित परीक्षा की छूट से चार साल बाद लौटने वाले युवाओं का भविष्य वाकई आसान हो जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

अर्जुन, बात तो ठीक है पर लिखित परीक्षा हटने से क्या सच में सबको बिना परेशानी के सही जगह नौकरी मिल जाएगी?

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

अग्निवीरों के लिए यह कदम वाकई राहत देने वाला है। यूपी में भी जब ऐसी घोषणा हुई थी, तब युवाओं में काफी उम्मीद जगी थी। चार साल की फौज की नौकरी के बाद अगर परीक्षा की टेंशन खत्म हो जाए, तो सेटल होना आसान हो जाता है। गुजरात सरकार ने सही समय पर फैसला लिया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन भाई, बात तो सही है पर लिखित परीक्षा से छूट देने से क्या सच में पुलिस का स्तर कमज़ोर नहीं पड़ेगा? फौज का काम अलग है, कानून की पढ़ाई अलग।

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