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हल्दीघाटी के 450 साल: मोहन भागवत बोले, मुगल सेना पीछे हटी तो फिर जीत किसकी मानी जाएराजस्थान
17 जून 2026, 6:13 pm (87 दिन पहले)· 2

हल्दीघाटी के 450 साल: मोहन भागवत बोले, मुगल सेना पीछे हटी तो फिर जीत किसकी मानी जाए

उदयपुर के गांधी ग्राउंड में महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी विजय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध अनिर्णीत नहीं, बल्कि महाराणा प्रताप की विजय था।

महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी विजय दिवस के मौके पर उदयपुर के गांधी ग्राउंड में एक भव्य आयोजन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत बतौर मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता शामिल हुए। बड़ी तादाद में पहुंचे लोगों ने इस अवसर पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को याद किया।

इस कार्यक्रम का असली मकसद हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को एक नए नज़रिये से समाज के सामने रखना था। मंच से वक्ताओं ने यह बात उठाई कि बरसों तक हल्दीघाटी के युद्ध को बिना किसी नतीजे वाला बताने की कोशिश होती रही, मगर अब अलग-अलग ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और तथ्यों के सहारे महाराणा प्रताप की विजय वाले पक्ष को सामने लाया जा रहा है। मौजूद लोगों ने महाराणा प्रताप के योगदान को भारतीय स्वाभिमान और आज़ादी की भावना का प्रतीक बताया।

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सिर्फ दो सेनाओं की लड़ाई नहीं थी हल्दीघाटी

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने साफ कहा कि हल्दीघाटी का संग्राम केवल महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच की भिड़ंत भर नहीं था। यह पूरे समाज के स्वाभिमान, सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा का युद्ध था। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष और महाराणा प्रताप की जयंती का एक ही समय में आना अपने आप में ऐतिहासिक और प्रेरणा देने वाला संयोग है।

संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि लोगों को यह बात ठीक से समझनी होगी कि हल्दीघाटी में विजय महाराणा प्रताप की हुई थी। उनके मुताबिक यह महज़ किसी एक शासक की जीत नहीं थी, बल्कि उस दौर में भारत की स्वतंत्र चेतना और आत्मसम्मान की जीत थी। भागवत ने यह भी कहा कि इतिहास में कई बार ऐसे नैरेटिव गढ़े गए जिनमें तथ्यों को अलग ढंग से पेश किया गया, और अब वह समय आ गया है जब असली तथ्यों को सामने लाया जाए।

मुगल सेना पीछे हटी, तो विजय किसकी?

भागवत ने एक अहम तर्क रखते हुए कहा कि खुद मुगल इतिहासकारों के लेखों में भी इसका जिक्र मिलता है कि युद्ध के बाद मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था। इसी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि अगर लड़ाई के बाद मुगल सेना पीछे हट गई, तो फिर विजय आखिर किसकी मानी जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हल्दीघाटी की लड़ाई में सिर्फ महाराणा प्रताप और उनकी सेना ही नहीं, बल्कि समाज का हर तबका उनके साथ खड़ा था। भागवत के अनुसार महाराणा प्रताप ने अपने पूरे जीवन और संघर्ष से यह संदेश दिया कि भारत कभी झुकने वाला राष्ट्र नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जब-जब देश और संस्कृति पर संकट आया, तब-तब इस भूमि ने ऐसे वीर पैदा किए जिन्होंने आक्रांताओं का डटकर सामना किया।

आज भी करोड़ों के लिए प्रेरणा हैं महाराणा प्रताप

संघ प्रमुख ने आगे कहा कि इतिहास में सम्मान उसी को नसीब होता है जिसने समाज और राष्ट्र के लिए संघर्ष किया हो। उन्होंने ध्यान दिलाया कि आज भी पूरे देश में महाराणा प्रताप की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है, और यही बात लोगों के मन में उनके प्रति आदर और उनके आदर्शों की स्वीकार्यता को दर्शाती है।

महाराणा प्रताप के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का जिक्र करते हुए भागवत ने प्रसिद्ध पंक्ति “माई एहड़ा पूत जण, जेड़ा राणा प्रताप” का उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने, समाज को संगठित बनाए रखने और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति से भरे माहौल में सामूहिक वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ, और इस मौके पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया।

सवाल-जवाब

मोहन भागवत ने हल्दीघाटी युद्ध को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध अनिर्णीत नहीं था, बल्कि उसमें महाराणा प्रताप की विजय हुई थी और यह भारत की स्वतंत्र चेतना तथा आत्मसम्मान की जीत थी।
यह कार्यक्रम कहां और किस अवसर पर हुआ?
यह आयोजन उदयपुर के गांधी ग्राउंड में महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी विजय दिवस के अवसर पर हुआ।
भागवत ने मुगल सेना के पीछे हटने का तर्क कैसे दिया?
उन्होंने कहा कि मुगल इतिहासकारों के लेखों में भी मिलता है कि युद्ध के बाद मुगल सेना पीछे हट गई थी, और सवाल उठाया कि ऐसे में विजय किसकी मानी जाए।
कार्यक्रम का समापन कैसे हुआ?
कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ और लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
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