अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंतुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यानबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकानवजात को दूध पिलाने में थोड़ी सी लापरवाही भी बन सकती है जानलेवा, बाल रोग विशेषज्ञ ने बताए जरूरी नियमअमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का दिया आदेश, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में हलचलअमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट अटकने से डिजिटल एसेट बाजार को मिली नई ऊर्जा, मैट हॉगन ने गिनाए फायदेराजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अंतिम चरण में, जानिए कब से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभजिमीकंद और सूरन काटने पर नहीं होगी हाथों में खुजली, शेफ रणवीर बरार ने बताए पकाने के आसान नुस्खे
हिमाचल प्रदेश से बंदरों की नसबंदी का मॉडल सीखेंगे असम के 6 विधायकअसम
13 सित॰ 2026, 4:21 pm (18 दिन पहले)· 4

हिमाचल प्रदेश से बंदरों की नसबंदी का मॉडल सीखेंगे असम के 6 विधायक

असम विधानसभा का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हिमाचल प्रदेश का दौरा करेगा, जहां वे बंदरों की आबादी नियंत्रित करने और नसबंदी अभियान के तौर-तरीकों का अध्ययन करेंगे।

असम के छह विधायकों का एक दल जल्द ही हिमाचल प्रदेश के दौरे पर जाएगा। इस यात्रा का मुख्य मकसद पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे नसबंदी कार्यक्रम का विस्तृत अध्ययन करना है। असम सरकार यह देखना चाहती है कि इस सफल मॉडल को अपने राज्य में अपनाकर इंसानों और बंदरों के बीच बढ़ रहे टकराव को कैसे कम किया जा सकता है।

संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य

असम के संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, इस अध्ययन दल में राज्य विधानसभा के छह विधायक शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में मृणाल सैकिया, रूपज्योति कुर्मी, धीरज गोवाला, प्रकाश दास, रूपेश गोवाला और मृदुल दत्ता को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह दल हिमाचल प्रदेश में बंदरों की नसबंदी के लिए बनाए गए बुनियादी ढांचे, फील्ड संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करेगा।

ये भी पढ़ें

विधानसभा बजट सत्र से जुड़ा पृष्ठभूमि

विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजने का यह फैसला असम विधानसभा के पिछले बजट सत्र के दौरान हुई गंभीर चर्चाओं के बाद लिया गया है। राज्य के कई हिस्सों में बंदरों के बढ़ते उपद्रव को लेकर विधायकों ने चिंता जताई थी। इन संसदीय चर्चाओं के बाद असम के वन विभाग ने बंदरों की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों के साथ एक विशेष बैठक भी आयोजित की थी, जिसमें दीर्घकालिक समाधान पर सहमति बनी थी।

हिमाचल प्रदेश का 2007 से जारी मॉडल

हिमाचल प्रदेश भी लंबे समय से बंदरों की अनियंत्रित आबादी की समस्या से जूझता रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में बड़े पैमाने पर बंदरों का बंध्याकरण करने की योजना शुरू की थी। तब से लेकर अब तक वहां लगभग एक लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इस निरंतर प्रयास से बंदरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि रोकने और आवासीय क्षेत्रों में इंसानों के साथ संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिली है।

असम में फसलों को नुकसान और भावी रणनीति

असम में बंदरों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें रीसस मकाक प्रजाति के बंदर खेती और बागवानी फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। राज्य के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बंदरों द्वारा फसलों को नष्ट किए जाने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। असम सरकार अब हिमाचल प्रदेश के अनुभवों का लाभ उठाकर अपने यहां भी एक व्यवस्थित नसबंदी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है, ताकि कृषि क्षति को रोका जा सके।

सवाल-जवाब

असम के विधायक हिमाचल प्रदेश का दौरा क्यों कर रहे हैं?
वे हिमाचल प्रदेश के बंदर नसबंदी कार्यक्रम का अध्ययन करने जा रहे हैं ताकि असम में बंदरों की आबादी नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के कदम उठाए जा सकें।
असम के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से विधायक शामिल हैं?
इस प्रतिनिधिमंडल में छह विधायक शामिल हैं: मृणाल सैकिया, रूपज्योति कुर्मी, धीरज गोवाला, प्रकाश दास, रूपेश गोवाला और मृदुल दत्ता।
हिमाचल प्रदेश ने अपना बंदर नसबंदी कार्यक्रम कब शुरू किया था?
हिमाचल प्रदेश ने अपने बंदर नसबंदी अभियान की शुरुआत वर्ष 2007 में की थी।
हिमाचल प्रदेश में अब तक कितने बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है?
वर्ष 2007 से शुरू हुए कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश में अब तक लगभग एक लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है।
असम में कौन सी बंदर प्रजाति फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है?
असम में रीसस मकाक प्रजाति के बंदर कृषि और बागवानी फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp