महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की कार्यप्रणाली को लेकर पुणे की सड़कों पर पिछले दस दिनों से जारी छात्रों का तीखा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। राज्य प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताने और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक निर्णय सख्त और पारदर्शी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को एमपीएससी सुधार और जांच समिति का सचिव नियुक्त करना रहा। युवाओं के बीच उनकी निष्पक्ष छवि और सख्त फैसलों की साख के चलते समिति में उनके शामिल होते ही आंदोलनकारी छात्रों का आक्रोश शांत हो गया।
पुणे में छात्रों का 10 दिवसीय आंदोलन और आयोग पर लगे आरोप
पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर एमपीएससी की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी पिछले 10 दिनों से लगातार धरना दे रहे थे। छात्रों का मुख्य आरोप आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर था। प्रदर्शनकारी छात्र संघों का कड़ा रुख था कि जब तक आयोग के चेयरमैन विवेक भीमांवर को उनके पद से हटाया नहीं जाता, तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगे। परीक्षा प्रणाली की शुचिता और अपने करियर को लेकर छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा था।
जांच कमेटी का गठन और चेयरमैन का छुट्टी पर जाना
मामले की गंभीरता और युवाओं के व्यापक असंतोष को देखते हुए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व जज दिलीप भोसले को सौंपी गई है, जबकि आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को समिति के सदस्य-सचिव की अहम जिम्मेदारी दी गई है। समिति के गठन और जांच के आदेश के तुरंत बाद एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमांवर ने नैतिक आधार का हवाला देते हुए जांच पूरी होने तक औपचारिक रूप से लंबी छुट्टी पर जाने की घोषणा कर दी, जिससे प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हुआ।
सरकार से वार्ता और मानी गई प्रमुख मांगें
छात्रों के विरोध को शांत करने के लिए मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के नेतृत्व में सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से सीधे संवाद किया। वार्ता के दौरान प्रशासन ने अभ्यर्थियों की कई बड़ी मांगों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया
- 70,000 पदों पर भर्ती: राज्य में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करते हुए अगले तीन वर्षों के भीतर 70,000 रिक्त पदों पर नई भर्तियां पूरी की जाएंगी।
- ग्रुप-सी परीक्षा में सीटें: जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में रिक्तियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जाएगी ताकि अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
- पुलिस केस वापस: पिछले 10 दिनों के आंदोलन के दौरान छात्र प्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
- नियुक्तियों में बैकग्राउंड चेक: भविष्य में आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एमपीएससी के चेयरमैन और सचिव पद पर नियुक्ति से पहले संबंधित अधिकारियों का कड़ा बैकग्राउंड चेक अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
इन सभी आश्वासनों और औपचारिक घोषणाओं के बाद छात्रों ने अपना धरना प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की।
गरीबी से निकलकर यूपीएससी में 20वीं रैंक हासिल करने का सफर
आईएएस तुकाराम मुंढे की गिनती महाराष्ट्र के सबसे साहसी और चर्चित नौकरशाहों में होती है। एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे मुंढे बचपन में नंगे पैर स्कूल जाया करते थे। आर्थिक संघर्षों के बावजूद उन्होंने बिना किसी कोचिंग संस्थान का सहारा लिए स्व-अध्ययन के दम पर 2004 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। इसके बाद 2005 में वह महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी बने। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद से ही वे अपनी ईमानदारी, बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करने और नियमों के कठोर पालन के लिए जाने जाते हैं।
21 साल का करियर और 25 से अधिक तबादलों का रिकॉर्ड
तुकाराम मुंढे को आम जनता के बीच उनके साहसी फैसलों और भ्रष्ट तंत्र पर सीधी चोट के कारण ‘सिंघम’ अफसर के उपनाम से जाना जाता है। आम लोगों के हितों को सर्वोपरि रखने की इसी कार्यशैली के चलते उन्हें अपने 21 साल के सेवाकाल में 25 से अधिक बार तबादलों का सामना करना पड़ा है। चाहे सोलापुर में अवैध रेत माफिया के खिलाफ कड़े कदम उठाना हो या फिर नवी मुंबई में नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए बहु-करोड़ की विवादित परियोजनाओं पर रोक लगाना, मुंढे हमेशा चर्चा के केंद्र में रहे। अक्टूबर 2026 में उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स में भी विशेष रूप से फीचर किया गया था।
प्रशासनिक पदों पर तुकाराम मुंढे का सफरनामा
अपने दो दशकों से लंबे करियर में तुकाराम मुंढे ने विभिन्न नगर निगमों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार संभाला है
- खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): करियर के शुरुआती दौर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में काम करते हुए प्रशासनिक प्रबंधन को मजबूती दी।
- नवी मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (2017): म्यूनिसिपल कमिश्नर के रूप में जनसंवाद बढ़ाने के लिए ‘वॉक विद द कमिश्नर’ जैसी अनूठी पहल शुरू की और जनहित में कड़े नीतिगत निर्णय लिए।
- पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (2017-18): प्रबंध निदेशक के पद पर रहते हुए कर्मचारियों की अनधिकृत अनुपस्थिति और अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की, साथ ही बस किराए और परिचालन ढांचे में व्यापक सुधार किए।
- नासिक म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (2018): म्यूनिसिपल कमिश्नर के तौर पर नगर निगम में पारदर्शी कार्यसंस्कृति विकसित की।
- मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (2018): महाराष्ट्र सरकार के राज्य योजना विभाग में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई।
- नागपुर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (2020): म्यूनिसिपल कमिश्नर के रूप में नागरिक सुविधाओं में सुधार और स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए कड़े अभियान चलाए।
- स्वास्थ्य सेवा आयुक्त, महाराष्ट्र (अक्टूबर 2022 - नवंबर 2022): सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति तय करने और प्रशासनिक भ्रष्टाचार रोकने के लिए बड़े पैमाने पर औचक निरीक्षण अभियान चलाए।
- खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त (2026): खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कई नामी होटलों और बड़े रेस्टोरेंट पर सीलबंदी की कठोर कार्रवाई की, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी।
- सचिव, एमपीएससी सुधार समिति (अक्टूबर 2026): लोक सेवा आयोग में सुधार और पेपर लीक के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष समिति में सदस्य-सचिव का जिम्मा संभाला।
अब राज्य भर के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता और तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाली यह जांच समिति भर्ती प्रणाली में कितना बुनियादी सुधार और पारदर्शिता ला पाती है।

















