राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पड़ने वाले घड़साना क्षेत्र में खेतों की प्यास बुझाने के लिए चल रहा विरोध प्रदर्शन एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। देर रात राज्य सरकार के नुमाइंदों और आंदोलनरत किसानों के प्रतिनिधियों के बीच चली लंबी बातचीत किसी सर्वसम्मत नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस वार्ता में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल भी किसान संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ मौजूद रहे। प्रशासन और किसान नेताओं के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण सहमति की कोई नई राह नहीं निकल सकी।
सिंचाई बारी के फॉर्मूले पर फंसा पेंच
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ खेतों में सिंचाई के पानी के वितरण का चक्र है। घड़साना के किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि उन्हें छह प्लस दो सिंचाई बारी का हक दिया जाए, जिससे फसलों को पर्याप्त पानी मिल सके। इसके विपरीत राज्य सरकार की तरफ से वार्ता की मेज पर पांच प्लस दो सिंचाई बारी का प्रस्ताव रखा गया। दोनों पक्षों के बीच इसी एक बिंदु को लेकर गतिरोध बना हुआ है। किसान प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना था कि छह प्लस दो से कम बारी उन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, जबकि सरकार अपने दिए गए पांच प्लस दो के प्रस्ताव से आगे बढ़ने को तैयार नहीं दिखी। इस अंतर को देर रात तक चली वार्ता में भी पाटा नहीं जा सका और वार्ता बिना किसी ठोस समाधान के खत्म हो गई।
आमजन की सुविधा के लिए हाईवे से हटा जाम
पानी के संकट को लेकर किसानों ने पिछले दो दिनों से मुख्य हाईवे पर चक्काजाम कर रखा था। इस नाकेबंदी के चलते दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं और वहां से गुजरने वाले मुसाफिरों, स्थानीय नागरिकों तथा खुद किसानों को भी भारी असुविधाओं से दो-चार होना पड़ रहा था। लोगों की इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए हनुमान बेनीवाल ने हाईवे जाम को तुरंत खोलने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे के आंदोलन और रणनीति से जुड़े तमाम फैसले अब किसान संघर्ष समिति के स्तर पर ही स्वतंत्र रूप से लिए जाएंगे। समिति अब सरकार के रुख और किसानों की प्राथमिकताओं की समीक्षा करके आंदोलन का नया खाका तैयार करेगी।
अधिकारों की लड़ाई और चुनावी व्यस्तता का दायरा
वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को किसानों की समस्याओं और मांगों के प्रति गंभीर रवैया अपनाना चाहिए और जल्द से जल्द उचित हल निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनका पूरा हक दिलाने के लिए लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी। बेनीवाल ने यह भी साझा किया कि पंचायती राज चुनाव की व्यस्तताओं के कारण वे संघर्ष समिति के आगामी कार्यक्रमों में व्यक्तिगत रूप से शरीक नहीं हो सकेंगे। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनावी व्यस्तता के बावजूद किसानों के इस संघर्ष को उनका पूरा समर्थन हमेशा मिलता रहेगा। अब समूचे इलाके की निगाहें संघर्ष समिति के अगले कदम और शासन के साथ संभावित आगामी चर्चा पर टिकी हैं।


















