भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे परिसर में बीटेक के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या की दुखद घटना के बाद संस्थान में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की व्यापक कवायद शुरू हो गई है। परिसर में घटी इस अप्रिय घटना ने छात्र समुदाय के बीच तनाव और अकेलेपन के मुद्दों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए संस्थान का प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हुआ है और विद्यार्थियों के मानसिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से कई संरचनात्मक सुधारों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
संस्थान परिसर में हाल ही में एक ओपन हाउस सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों ने आमने-सामने बैठकर खुलकर संवाद किया। इस विचार-विमर्श में विद्यार्थियों को सुरक्षित, सहयोगात्मक और तनावमुक्त परिवेश उपलब्ध कराने के लिए व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई। प्रशासनिक नेतृत्व ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि इन प्रस्तावों को मात्र औपचारिक कागजी कार्यवृत्त तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि परिसर के दैनिक जीवन में जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव लागू किए जाएंगे।
सीनियर विद्यार्थियों के लिए भी ट्विन-शेयरिंग कमरों की योजना
संस्थान अपने पारंपरिक आवासीय ढांचे में बुनियादी फेरबदल करने की तैयारी में है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार केवल प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी विद्यार्थियों को साझा यानी शेयरिंग कमरे दिए जाते थे, जबकि सीनियर कक्षाओं में पहुंचते ही विद्यार्थियों को एकल यानी सिंगल रूम आवंटित करने का नियम था। इस नीति की समीक्षा करते हुए अब भविष्य के नए छात्रावासों में ट्विन-शेयरिंग मॉडल अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत एक कमरे में दो छात्र साथ रहेंगे।
प्रशासन इस साझा आवास व्यवस्था को वर्तमान सीनियर छात्रों पर भी लागू करने के विकल्प तलाश रहा है। विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों का आकलन है कि एकल कमरों में लंबे समय तक अकेले रहने से विद्यार्थियों में अलगाव, निराशा और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। कमरे में एक साथी की मौजूदगी से रोजमर्रा के जीवन में संवाद बना रहता है, जिससे छात्र अपनी चिंताएं और व्यक्तिगत परेशानियां एक-दूसरे से साझा कर पाते हैं और उन्हें जरूरी भावनात्मक संबल मिलता है।
काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार और बाहरी विशेषज्ञों का खर्च वहन
विद्यार्थियों की मानसिक भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता सूची में रखते हुए संस्थान ने परामर्श और थेरेपी सेवाओं के कार्यक्षेत्र को तत्काल प्रभाव से बढ़ा दिया है। इस संदर्भ में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स ने सभी विद्यार्थियों को आधिकारिक ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि परिसर के 6 प्रमुख छात्रावासों और छात्र कल्याण केंद्र में मनोवैज्ञानिक परामर्श के समय को बढ़ा दिया गया है, ताकि जरूरतमंद विद्यार्थियों को बिना किसी देरी के त्वरित सहायता मिल सके।
इसके अतिरिक्त प्रशासन ने अपनी पूर्व नीति को पुनः रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को यह सुरक्षा भरोसा दिया है कि यदि वे परिसर से बाहर अपनी पसंद के किसी स्वतंत्र पेशेवर काउंसलर, मनोचिकित्सक या अधिकृत एजेंसी से सहायता लेना चाहते हैं, तो उसका पूरा वित्तीय भार संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। विद्यार्थियों को यह सलाह भी दी गई है कि वे अपने संकाय संरक्षकों यानी फैकल्टी मेंटर्स के माध्यम से इन सुविधाओं का निःसंकोच लाभ उठाएं।
संकाय सदस्यों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श प्रक्रिया
समग्र परिवेश को संवेदनशील बनाने के लिए केवल प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा निर्णय लेने के बजाय जमीनी स्तर पर सुझाव जुटाए जा रहे हैं। इसी क्रम में संकाय सदस्यों, प्रोफेसरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ विस्तृत प्रश्नावली और डिजिटल फॉर्म साझा किए गए हैं। इन परामर्श प्रपत्रों के माध्यम से शिक्षकों से पूछा गया है कि छात्रों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत तनाव को प्रबंधित करने के लिए पाठ्यक्रम, छात्रावास और परिसर के माहौल में कौन से नए कदम उठाए जा सकते हैं। इस विषय पर विभिन्न विभागों और पूरे संस्थान के स्तर पर कई दौर की गहन बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।

















