संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक संघर्ष के बीच भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। भारत ने दुनिया के मंच पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक आतंकवाद के बड़े सरगना किसी दूरदराज के जंगलों या गुफाओं में नहीं, बल्कि आबादी के बीच सुरक्षित ठिकानों पर पलते हैं। इस दौरान अलकायदा और ओसामा बिन लादेन के पुराने मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आतंकवादियों को मिलने वाले संरक्षण की तरफ आकर्षित किया जा सके।
एबटाबाद और 9/11 के मास्टरमाइंड का उदाहरण
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात रखते हुए अतीत के उन उदाहरणों को याद किया जो पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति नीति को बेनकाब करते हैं। भारत ने याद दिलाया कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड और अलकायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन किसी अज्ञात गुफा में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के एबटाबाद शहर के एक सुरक्षित परिसर में छिपा हुआ था। बाद में एक सटीक सैन्य कार्रवाई यानी ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर के तहत उसे उसी ठिकाने पर ढेर किया गया था। इसके अलावा, 9/11 के अन्य मुख्य साजिशकर्ताओं और उसके सहयोगियों को भी दूरदराज के इलाकों की बजाय घनी आबादी वाले शहरी और रिहायशी क्षेत्रों से ही गिरफ्तार किया गया था।
लश्कर और जैश को मिल रहा है पुराना संरक्षण
इन पुराने मामलों का हवाला देते हुए भारत ने रेखांकित किया कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ने के लिए केवल कुछ गिने-चुले आतंकवादियों को निशाना बनाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए उस पूरे तंत्र, बुनियादी ढांचे और सुरक्षित माहौल को ध्वस्त करना होगा जो इन तत्वों को पनाह देता है। हालांकि सीधे तौर पर नाम लेने से बचते हुए भारत ने कड़े शब्दों में चेताया कि अतीत में जिस तरह का सुरक्षित माहौल अलकायदा के शीर्ष नेताओं को मुहैया कराया जाता था, ठीक वैसा ही संरक्षण आज के समय में भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साझा कार्रवाई की अपील
भारत ने वैश्विक मंच से साफ किया कि जब तक आतंकवादियों को मिलने वाली सरकारी या स्थानीय पनाहगाहों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं हो सकती। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुरजोर अपील की कि आतंकवाद के इन पनाहगाहों और मददगारों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि दुनिया के किसी अन्य देश या किसी भी निर्दोष परिवार को आतंकवाद की वजह से अपनों को न खोना पड़े और वैश्विक शांति सुनिश्चित हो सके।
अफगानिस्तान में शांति और मानवीय सहायता पर जोर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की अफगानिस्तान पर आयोजित बैठक के दौरान भारत ने वहां की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास लाना भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत ने जानकारी दी कि उसने अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में कुल मिलाकर 500 से ज्यादा अलग-अलग विकास परियोजनाओं में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है और युद्धग्रस्त देश के नागरिकों के लिए मानवीय मदद का सिलसिला लगातार जारी रखा है।
अफगानिस्तान को भारत की ओर से चिकित्सा और खाद्यान्न मदद
भारत ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए अफगानिस्तान को 17 टन आवश्यक दवाइयां और जरूरी मेडिकल सामान भेजा गया है। इसके अलावा, साल 2021 से लेकर अब तक अफगानिस्तान के जरूरतमंद लोगों के लिए 50 हजार टन से ज्यादा गेहूं और करीब 450 टन से अधिक जीवन रक्षक दवाइयां तथा वैक्सीन की खेप पहुंचाई जा चुकी है ताकि वहां के आम नागरिकों की मुश्किलों को कम किया जा सके।
अफगानिस्तान में आतंकवाद के ठिकानों पर चिंता
सहायता कार्यों का ब्योरा देने के साथ-साथ भारत ने अफगानिस्तान की धरती पर पनप रहे आतंकवाद और वहां के आतंकी संगठनों को मिलने वाले बाहरी समर्थन पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को इन आतंकी नेटवर्क्स और उनकी पनाहगाहों के खिलाफ एकजुट होकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान के लगभग 4.8 करोड़ नागरिकों की मानवीय जरूरतों और उनकी गंभीर स्थिति को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसके लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।























