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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, लादेन और एबटाबाद का जिक्र कर खोली पोलभारत
17 सित॰ 2026, 8:12 am (1 दिन पहले)· 2

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, लादेन और एबटाबाद का जिक्र कर खोली पोल

संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। भारत ने याद दिलाया कि ओसामा बिन लादेन एबटाबाद में सुरक्षित छिपा था और आज भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पनाह मिल रही है।

संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक संघर्ष के बीच भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। भारत ने दुनिया के मंच पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक आतंकवाद के बड़े सरगना किसी दूरदराज के जंगलों या गुफाओं में नहीं, बल्कि आबादी के बीच सुरक्षित ठिकानों पर पलते हैं। इस दौरान अलकायदा और ओसामा बिन लादेन के पुराने मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आतंकवादियों को मिलने वाले संरक्षण की तरफ आकर्षित किया जा सके।

एबटाबाद और 9/11 के मास्टरमाइंड का उदाहरण

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात रखते हुए अतीत के उन उदाहरणों को याद किया जो पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति नीति को बेनकाब करते हैं। भारत ने याद दिलाया कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड और अलकायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन किसी अज्ञात गुफा में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के एबटाबाद शहर के एक सुरक्षित परिसर में छिपा हुआ था। बाद में एक सटीक सैन्य कार्रवाई यानी ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर के तहत उसे उसी ठिकाने पर ढेर किया गया था। इसके अलावा, 9/11 के अन्य मुख्य साजिशकर्ताओं और उसके सहयोगियों को भी दूरदराज के इलाकों की बजाय घनी आबादी वाले शहरी और रिहायशी क्षेत्रों से ही गिरफ्तार किया गया था।

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लश्कर और जैश को मिल रहा है पुराना संरक्षण

इन पुराने मामलों का हवाला देते हुए भारत ने रेखांकित किया कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ने के लिए केवल कुछ गिने-चुले आतंकवादियों को निशाना बनाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए उस पूरे तंत्र, बुनियादी ढांचे और सुरक्षित माहौल को ध्वस्त करना होगा जो इन तत्वों को पनाह देता है। हालांकि सीधे तौर पर नाम लेने से बचते हुए भारत ने कड़े शब्दों में चेताया कि अतीत में जिस तरह का सुरक्षित माहौल अलकायदा के शीर्ष नेताओं को मुहैया कराया जाता था, ठीक वैसा ही संरक्षण आज के समय में भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों को मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साझा कार्रवाई की अपील

भारत ने वैश्विक मंच से साफ किया कि जब तक आतंकवादियों को मिलने वाली सरकारी या स्थानीय पनाहगाहों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं हो सकती। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुरजोर अपील की कि आतंकवाद के इन पनाहगाहों और मददगारों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि दुनिया के किसी अन्य देश या किसी भी निर्दोष परिवार को आतंकवाद की वजह से अपनों को न खोना पड़े और वैश्विक शांति सुनिश्चित हो सके।

अफगानिस्तान में शांति और मानवीय सहायता पर जोर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की अफगानिस्तान पर आयोजित बैठक के दौरान भारत ने वहां की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास लाना भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत ने जानकारी दी कि उसने अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में कुल मिलाकर 500 से ज्यादा अलग-अलग विकास परियोजनाओं में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है और युद्धग्रस्त देश के नागरिकों के लिए मानवीय मदद का सिलसिला लगातार जारी रखा है।

अफगानिस्तान को भारत की ओर से चिकित्सा और खाद्यान्न मदद

भारत ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए अफगानिस्तान को 17 टन आवश्यक दवाइयां और जरूरी मेडिकल सामान भेजा गया है। इसके अलावा, साल 2021 से लेकर अब तक अफगानिस्तान के जरूरतमंद लोगों के लिए 50 हजार टन से ज्यादा गेहूं और करीब 450 टन से अधिक जीवन रक्षक दवाइयां तथा वैक्सीन की खेप पहुंचाई जा चुकी है ताकि वहां के आम नागरिकों की मुश्किलों को कम किया जा सके।

अफगानिस्तान में आतंकवाद के ठिकानों पर चिंता

सहायता कार्यों का ब्योरा देने के साथ-साथ भारत ने अफगानिस्तान की धरती पर पनप रहे आतंकवाद और वहां के आतंकी संगठनों को मिलने वाले बाहरी समर्थन पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को इन आतंकी नेटवर्क्स और उनकी पनाहगाहों के खिलाफ एकजुट होकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान के लगभग 4.8 करोड़ नागरिकों की मानवीय जरूरतों और उनकी गंभीर स्थिति को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसके लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।

सवाल-जवाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में किस मुख्य मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और आतंकवादियों को मिलने वाली पनाह को लेकर पाकिस्तान को घेरा।
भारत ने अपने भाषण में किसका उदाहरण दिया?
भारत ने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण दिया जो पाकिस्तान के एबटाबाद में एक सुरक्षित परिसर में छिपा हुआ था।
भारत ने किन आतंकी संगठनों का जिक्र किया?
भारत ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का जिक्र किया जिन्हें आज भी शरण मिल रही है।
UNSC की बैठक में मुख्य रूप से किस देश पर चर्चा हुई?
UNSC की इस बैठक में मुख्य रूप से अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और मानवीय सहायता पर चर्चा हुई।
भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय मदद के तहत क्या भेजा है?
भारत ने अफगानिस्तान को 17 टन जरूरी दवाइयां, मेडिकल सामान, 50 हजार टन से ज्यादा गेहूं और 450 टन से अधिक दवाइयां व वैक्सीन भेजी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·1 दिन पहले

संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत द्वारा ओसामा बिन लादेन और एबटाबाद का स्मरण महज एक पुराना संदर्भ नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में आतंकवाद के वित्तपोषण और राज्य-समर्थित सरक्षण की भू-राजनीतिक वास्तविकता को उजागर करता है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के शहरी इलाकों में फलने-फूलने पर भारत की यह आक्रामक कूटनीति दिखाती है कि वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति अब छिपने की गुफाओं से हटकर उन राजनीतिक और प्रशासनिक नेटवर्कों को नष्ट करने पर केंद्रित हो रही है जो इन्हें बचाते हैं। आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक दबाव क्षेत्रीय कूटनीति और ऊर्जा गलियारों की सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह कूटनीति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सीमा पार आतंकवाद पर अब केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि कड़े भू-राजनीतिक प्रमाणों के साथ दबाव बनाया जा रहा है। एबटाबाद के उदाहरण के जरिए भारत ने वैश्विक मंच पर यह रेखांकित किया है कि आतंकी नेटवर्क और सरकारी संरक्षण के बीच के गठजोड़ को तोड़े बिना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा असंभव है। यह कूटनीतिक रुख भविष्य की रणनीतिक नीतियों को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·1 दिन पहले

संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के मामलों को प्रभावी ढंग से उठाना यह दर्शाता है कि कूटनीतिक मोर्चे पर भारत अब रणनीतिक आक्रामकता के साथ आगे बढ़ रहा है। एबटाबाद और 9/11 के संदर्भों को सीधे तौर पर उजागर करने से उन देशों पर वैश्विक दबाव बढ़ेगा जो आतंकी संगठनों को पनाह देते हैं। इस रुख से आने वाले समय में बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कड़े सुरक्षा प्रस्तावों और वित्तीय निगरानी को और अधिक धार मिलने की पूरी संभावना है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह कूटनीतिक कड़ा रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर सीमा पार आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को बेनकाब करने की दिशा में बड़ा कदम है। एबटाबाद और 9/11 जैसे पुराने मामलों का जिक्र यह साबित करता है कि आतंकी गुफाओं में नहीं बल्कि शहरी आबादी के बीच सुरक्षित पनाह पाते हैं। लश्कर और जैश जैसे संगठनों को मिल रहा संरक्षण इस बात का संकेत है कि जब तक वैश्विक समुदाय इस पूरे तंत्र को ध्वस्त नहीं करता, तब तक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर यह स्पष्ट है कि आतंकवाद का वित्तीय और ढांचागत पोषण सीधे तौर पर क्षेत्रीय व्यापारिक गलियारों और आर्थिक स्थिरता को बाधित करता है। वैश्विक वित्तीय और डिजिटल एसेट्स पर कड़ी नजर रखने वाले नियामकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे आतंकी फंडिंग के उन गुप्त रास्तों को काटें, जो इन सुरक्षित पनाहगाहों और शहरी नेटवर्क को जीवित रखते हैं। जब तक सीमा पार से मिलने वाले इस आर्थिक और भौतिक संरक्षण को पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, वैश्विक निवेशकों और क्षेत्रीय बाजारों के लिए जोखिम बने रहेंगे।

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