झारखंड के जमशेदपुर में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय कला को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनूठी पहल शुरू हुई है। यहां के रहने वाले सूरज ने कॉरपोरेट गिफ्टिंग और ऑफिस इस्तेमाल के लिए एक नया आयाम गढ़ा है। अमूमन इस क्षेत्र में प्लास्टिक और वर्जिन लेदर जैसी सामग्रियों का बहुतायत में इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस चलन से हटकर सूरज ने पूरी तरह प्राकृतिक और इको फ्रेंडली उत्पादों को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को अपने इस काम से जोड़ा है, जो जूट और बांस की मदद से बेहद आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों में ऑफिस बैग से लेकर हैंडबैग और कॉरपोरेट डायरी जैसी चीजें शामिल हैं।
छोटानागपुर क्राफ्ट की अनूठी शुरुआत
इस पूरे उद्यम की नींव छोटानागपुर क्राफ्ट के रूप में रखी गई है। इस स्टार्टअप को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध होने वाले प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करना और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की पारंपरिक कला कौशल को एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराना है। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं को बकायदा जोड़ा गया है जो अपने हाथों से इन बेहतरीन चीजों को गढ़ती हैं। इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये दिखने में बेहद प्रीमियम लगते हैं और पारंपरिक सामग्रियों से बने होने के बावजूद आधुनिक कॉरपोरेट संस्कृति की जरूरतों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इन्हें दफ्तर आने-जाने से लेकर बड़े संस्थानों में उपहार के आदान-प्रदान तक के लिए आदर्श माना जा रहा है।
हॉट सेलिंग आइटम बने ऑफिस बैग और डायरी
इस स्टार्टअप के तहत तैयार होने वाले सामानों में ग्राहकों की पसंद का खास ख्याल रखा गया है। सूरज के अनुसार उनके उद्यम के सबसे ज्यादा बिकने वाले यानी हॉट सेलिंग उत्पादों में ऑफिस बैग और कॉरपोरेट डायरी सबसे आगे हैं। बाजार में इन दोनों चीजों की मांग लगातार बनी हुई है। ऑफिस बैग को कामकाजी लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद मुफीद पा रहे हैं, वहीं कॉरपोरेट डायरी को विभिन्न कंपनियां अपने कर्मचारियों को रिवार्ड देने या अपने क्लाइंट्स को तोहफे में देने के लिए बड़े पैमाने पर खरीद रही हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए तैयार किए जाने वाले स्टाइलिश हैंडबैग और क्लच भी खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हो रहे हैं।
पारंपरिक सामग्री को दिया आधुनिक रूप
आज के दौर में जब पूरी दुनिया पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रही है और सस्टेनेबिलिटी की बात कर रही है, तब ऐसे उत्पादों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। आधुनिक समय के उपभोक्ता उन विकल्पों को तरजीह दे रहे हैं जिनसे प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुंचे और साथ ही समाज के पिछड़े या स्थानीय तबके के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें। इसी सोच और दूरदर्शिता के साथ छोटानागपुर क्राफ्ट की रूपरेखा तैयार की गई थी। इस पहल का मूल मंत्र पारंपरिक कलात्मकता को आधुनिक और ट्रेंडी डिजाइनों के साथ बाजार में उतारना है, ताकि आज की युवा पीढ़ी और कॉरपोरेट जगत इन्हें अपना सके।
ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का सशक्त जरिया
इस रचनात्मक पहल से केवल एक स्टार्टअप को ही व्यावसायिक सफलता नहीं मिल रही है, बल्कि इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण महिलाओं के जीवन पर पड़ रहा है। इन उत्पादों के निर्माण से जुड़ी महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं और अपनी आमदनी में इजाफा कर रही हैं। इस प्रक्रिया से उन्हें उनके हुनर की वास्तविक कीमत मिल रही है। सूरज की योजना आने वाले दिनों में इस दायरे को और ज्यादा व्यापक बनाने की है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को इस रोजगार से जोड़ा जा सके और स्थानीय स्तर पर बनने वाले इन पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट बाजार में एक मजबूत पहचान दिलाई जा सके।



















