पश्चिम बंगाल की राजनीतिक जमीन पर उपचुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। कई राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और डीएमके सांसद कनिमोझी के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चली गुप्त बैठक ने राष्ट्रीय राजनीति का पारा चढ़ा दिया है। इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं, जिनमें सबसे अहम चर्चा कांग्रेस को बाहर रखकर एक नए तीसरे मोर्चे के गठन की है। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्रीय दलों के रुख से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्षी खेमे में अंदरखाने समीकरण बदल रहे हैं।
कांग्रेस के मौजूदा रवैये से केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि डीएमके और शरद पवार जैसे मजबूत क्षेत्रीय दल भी असहज और नाखुश बताए जा रहे हैं। ऐसे हालात में कनिमोझी का लगातार क्षेत्रीय क्षत्रपों से मिलना इस बात का संकेत देता है कि देश के ताकतवर क्षेत्रीय दल एक मंच पर आने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को हाशिए पर धकेलते हुए क्षेत्रीय दिग्गजों का यह गुट एक नया विकल्प खड़ा कर सकता है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह पलट सकते हैं।
कनिमोझी और ममता बनर्जी की बंद कमरे में हुई चर्चा
डीएमके की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी ने कोलकाता के दक्षिण कोलकाता स्थित कालीघाट क्षेत्र में ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। यह गुप्त बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। कनिमोझी गुरुवार को लगभग 3:40 बजे ममता बनर्जी के घर पहुंची थीं और लगभग डेढ़ घंटे बाद वहां से बाहर निकलीं। टीएमसी के एक अंदरूनी सूत्र के हवाले से यह बात सामने आई है कि दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, हालांकि इस बातचीत का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस मुलाकात के तुरंत बाद राष्ट्रीय राजधानी से लेकर राज्यों की राजधानियों तक संभावित तीसरे मोर्चे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, खासकर तब जब डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में खटास की खबरें लगातार आ रही हैं।
क्षेत्रीय क्षत्रपों से लगातार मेल-मिलाप का दौर
ममता बनर्जी से मिलने से पहले कनिमोझी ने देश के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं के साथ भी बैठकें की थीं। उन्होंने मुंबई जाकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी, जिसमें पार्टी के सांसद अनिल देसाई और मिलिंद नार्वेकर भी शामिल थे। इस बैठक में मुख्य रूप से परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों, विपक्षी दलों की भावी रणनीति और INDIA गठबंधन के भीतर क्षेत्रीय ताकतों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसके बाद कनिमोझी ने नई दिल्ली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के मुखिया शरद पवार और उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले से भी लंबी मुलाकात की थी। इन सभी दौरों को क्षेत्रीय दलों के बीच आपसी समन्वय और तालमेल बढ़ाने के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
नंदीग्राम उपचुनाव और कांग्रेस से तनातनी की वजह
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपनी पराकाष्ठा पर है। इन सीटों पर छह अक्टूबर को मतदान होना है। खास बात यह है कि टीएमसी और कांग्रेस दोनों ने ही इन विधानसभा सीटों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। इससे पहले ऐसी खबरें भी आई थीं कि टीएमसी ने नंदीग्राम सीट को लेकर कांग्रेस के सामने कोई प्रस्ताव रखा था, लेकिन टीएमसी की तरफ से बाद में इस तरह की किसी भी पेशकश को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। दूसरी तरफ, साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद से डीएमके और कांग्रेस के बीच आपसी रिश्तों के समीकरण बदले हैं। इसी का नतीजा है कि जून के महीने में हुई INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में भी डीएमके ने दूरी बनाए रखी थी। इन तमाम घटनाओं की पृष्ठभूमि में कनिमोझी की क्षेत्रीय दिग्गजों के साथ हो रही मुलाकातों का महत्व काफी बढ़ जाता है।


















