उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में जगदीशपुर मुख्य बाजार से होकर गुजरने वाला मुख्य मार्ग प्रशासनिक उपेक्षा के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। सड़क पर करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा हो चुका है और जगह-जगह बने गहरे गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए दैनिक परेशानी का सबब बने हुए हैं। आम तौर पर किसी ग्रामीण संपर्क मार्ग पर दिखने वाली ऐसी बदहाली अब एक प्रमुख व्यापारिक और आवाजाही वाले केंद्र पर नजर आ रही है। इस मुख्य मार्ग से रोजाना गुजरने वाले हजारों लोग न केवल हादसों का शिकार हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के पलटने और जलभराव के कारण रोजाना बड़े पैमाने पर यातायात बाधित हो रहा है।
प्रमुख जनपदों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राजमार्ग नेटवर्क
जगदीशपुर मुख्य बाजार की यह सड़क केवल एक स्थानीय मार्ग नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के कई बड़े शहरों और जनपदों के बीच कनेक्टिविटी का एक बड़ा जरिया है। यह मार्ग अयोध्या, कुमारगंज और सुल्तानपुर को जोड़ने के साथ-साथ लखनऊ और रायबरेली जाने वाले राजमार्गों को भी आपस में मिलाता है। इस वजह से दिन भर में इस सड़क पर हजारों छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। मुख्य बाजार होने के कारण यहां आम खरीदारी करने वालों, व्यापारियों और अंतर-जिला यात्रियों की भीड़ लगी रहती है। इतने महत्वपूर्ण व्यापारिक और परिवहन गलियारे की लंबे समय से मरम्मत न होने से स्थानीय कारोबार और दैनिक आवागमन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
गहरे गड्ढे, जलजमाव और लगातार होते हादसे
सड़क की वर्तमान स्थिति यह है कि डेढ़ से दो फीट तक भरे पानी के नीचे बड़े-बड़े गड्ढे छिपे रहते हैं, जो राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। दोपहिया वाहन, ई-रिक्शा और पैदल चलने वाले लोग अक्सर इन गड्ढों का अंदाजा नहीं लगा पाते और गिरकर चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, स्कूली बच्चों के कपड़े पानी और कीचड़ से खराब हो जाते हैं और कई बार यात्री बसें भी इन गहरे गड्ढों में फंस जाती हैं। एक ई-रिक्शा चालक ने बताया कि जलभराव और गड्ढों की वजह से उनका वाहन सड़क पर पलट गया था। वहीं, ई-रिक्शा में सवार एक यात्री का कहना था कि इस खतरनाक सड़क पर पहले भी कई लोग हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं और आए दिन गाड़ियां पलटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
सड़क के सुधारीकरण में हो रही देरी को लेकर स्थानीय निवासियों और राहगीरों का गुस्सा अब सरेआम फूट रहा है। लोगों का कहना है कि यह कोई गांव की छोटी सड़क नहीं है जिस पर ध्यान न दिया जाए, बल्कि यह एक प्रमुख राजमार्ग का हिस्सा है जिसके रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है।
- मोहम्मद जावेद कुमार: स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद कुमार का कहना है कि सड़क की हालत लंबे समय से खराब चल रही है। इसके सुधारीकरण और निर्माण की मांग को लेकर पूर्व में कई बार स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन और आंदोलन भी किया, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार तंत्र की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया।
- मोहम्मद इमरान: राहगीर और स्थानीय निवासी मोहम्मद इमरान ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में सड़क का निर्माण न होना बेहद निराशाजनक है और जब तक नीतिगत स्तर पर बदलाव नहीं होगा, तब तक इस समस्या का स्थाई समाधान निकलना मुश्किल दिखता है।
- पवन कुमार त्रिपाठी: स्थानीय नागरिक पवन कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, सड़क पर आए दिन लोग गिरकर जख्मी हो रहे हैं और बसों के फंसने से लंबा जाम लग जाता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें भेजी गईं, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके का मुआयना करने पहुंचा और न ही मरम्मत का काम शुरू कराया गया।
प्रशासनिक रुख और शासन को भेजे गए प्रस्ताव की स्थिति
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर से त्वरित राहत के कोई ठोस कदम अभी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से ऑन-कैमरा कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अनौपचारिक बातचीत में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क के जीर्णोद्धार और नए सिरे से निर्माण कार्य के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके राज्य शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति और बजट आवंटन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन से मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है और क्या स्थानीय लोगों को जर्जर सड़क से जल्द राहत मिल पाती है या उन्हें ऐसे ही जलभराव और दुर्घटनाओं के बीच सफर करने पर मजबूर होना पड़ेगा।



















