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जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए 150 अवैध बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल लाए गए, डिपोर्टेशन की तैयारीभारत
6 अक्तू॰ 2026, 10:44 am (2 घंटे पहले)· 1

जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए 150 अवैध बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल लाए गए, डिपोर्टेशन की तैयारी

जम्मू-कश्मीर से भारतीय वायुसेना के विमान से बागडोगरा लाए गए 150 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को बीएसएफ को सौंप दिया गया है, जिन्हें सीमा पार वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। घाटी के विभिन्न इलाकों से चिन्हित किए गए कुल 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजने के मकसद से पश्चिम बंगाल पहुंचाया गया है। इन सभी व्यक्तियों को भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान के जरिए श्रीनगर से सीधे बागडोगरा हवाई अड्डे तक लाया गया, जहां से उन्हें आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।

डिटेंशन सेंटर में रखने और वापसी की तय प्रक्रिया

हवाई अड्डे पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन प्रवासियों को एक विशेष डिटेंशन सेंटर में रखने की व्यवस्था की गई है। एक प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार स्थापित राजनयिक और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से इन नागरिकों को बांग्लादेश सरकार को सौंपने का प्रयास करेगी। यदि संबंधित देश का प्रशासन इन्हें औपचारिक तौर पर स्वीकार करने में आनाकानी करता है या जिम्मेदारी लेने से मना कर देता है, तो सुरक्षा बलों द्वारा तय नियमों के तहत इन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार धकेलने का कदम उठाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया के 7 अक्टूबर को पूरी होने की संभावना जताई गई है।

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चरणबद्ध तरीके से सीमा पार भेजने की कार्यप्रणाली

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के निष्कासन का काम सीमा के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में कई चरणों में संपन्न किया जाता है। तय रणनीति के तहत अवैध प्रवासियों को सीमा पर लगी बाड़ के पार ले जाकर शून्य रेखा (जीरो लाइन) के बिल्कुल नजदीक पहुंचाया जाता है, जहां से वे स्वयं सीमा लांघकर अपने मुल्क में दाखिल हो जाते हैं। पश्चिम बंगाल में तैनात बीएसएफ के जवान पहले भी इस तरह के अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुके हैं। देश के दूरदराज हिस्सों में पकड़े जाने वाले अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को प्रत्यर्पण अथवा डिपोर्टेशन के लिए अक्सर पश्चिम बंगाल लाया जाता है, क्योंकि यहां से सीमा प्रबंधन और भौगोलिक परिस्थितियां इस कार्य के अनुकूल रहती हैं। कुछ पूर्व मामलों में पड़ोसी मुल्क ने अपने नागरिकों को औपचारिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया था, जबकि कई अन्य मामलों में उनके द्वारा जिम्मेदारी स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया गया था।

अन्य राज्यों से भी जारी है निष्कासन की कार्रवाई

अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर से और भी अवैध नागरिकों को चिन्हित कर दूसरी जगहों पर भेजा जा सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि निष्कासन की अगली कड़ी में और भी बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल के रास्ते सीमा पार कराया जाएगा। जम्मू-कश्मीर से पहले गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे कई प्रमुख राज्यों से पकड़े गए अवैध प्रवासियों को भी इसी मार्ग से देश से बाहर भेजा जा चुका है।

संसद में पेश आंकड़े और चालू वर्ष की स्थिति

आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल की सीमा के जरिए लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा जा चुका है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद के पटल पर रखे गए आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2009 से 2011 के दौरान कुल 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। वहीं गृह मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 तक 28,131 अवैध प्रवासियों को देश से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। वर्तमान समय में देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) का काम तेजी से संचालित किया जा रहा है, जिससे अवैध प्रवासियों की पहचान का दायरा और बढ़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इस सत्यापन अभियान के चलते आने वाले महीनों में डिपोर्ट किए जाने वाले प्रवासियों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

सवाल-जवाब

जम्मू-कश्मीर से कितने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पश्चिम बंगाल लाया गया?
जम्मू-कश्मीर से कुल 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल लाया गया है।
इन प्रवासियों को किस साधन से और कहां पहुंचाया गया?
उन्हें भारतीय वायुसेना के विमान से श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया और फिर बीएसएफ को सौंपा गया।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया कब होने की संभावना है?
अधिकारियों के अनुसार इन प्रवासियों को 7 अक्टूबर को सीमा पार वापस भेजे जाने की संभावना है।
यदि बांग्लादेश सरकार इन्हें स्वीकार करने से मना करती है तो क्या होगा?
यदि आधिकारिक चैनलों से स्वीकार्यता नहीं मिलती, तो सुरक्षा बल इन्हें सीमा की बाड़ के पार जीरो लाइन के पास ले जाकर वापस भेजेंगे।
वर्ष 2026 में अब तक पश्चिम बंगाल के रास्ते कितने लोगों को डिपोर्ट किया गया है?
साल 2026 में अब तक लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को पश्चिम बंगाल के रास्ते वापस भेजा जा चुका है।
पूर्व में किन अन्य राज्यों से प्रवासियों को इस मार्ग से डिपोर्ट किया जा चुका है?
गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से भी अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को इसी रास्ते डिपोर्ट किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·56 मिनट पहले

श्रीनगर से सीधा बागडोगरा विमान ले जाना तो ठीक है, पर जब पड़ोसी देश ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दे, तब ज़बरन सीमा पार धकेलना व्यावहारिक रूप से कितना सफल होगा, इस पर थोड़ा संदेह है।

Ravikash Gupta@ravikash·55 मिनट पहले

अर्जुन, बीएसएफ पहले भी ऐसा करती रही है, तो तरीका तो उनके पास होगा ही।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ऐसे कदम बहुत जरूरी हैं। एयरफोर्स के विमान से इन्हें बंगाल लाकर बीएसएफ को सौंपना सही दिशा में उठाया गया सख्त प्रशासनिक कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण जी, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले साल बंगाल बॉर्डर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान गया था, तब बीएसएफ अधिकारियों ने बताया था कि दूर-दराज के राज्यों से पकड़े गए लोगों को यहीं लाना उनकी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।

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