राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सूर्य नगर इलाके के एक रिहायशी मकान में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब परिजनों की नजर जूते में कुंडली मारकर बैठे एक सांप पर पड़ी। जूते के भीतर जिंदा सांप को देखते ही घर के लोग सहम गए और यह खबर फैलते ही आसपास के स्थानीय निवासियों का जमावड़ा लग गया। हालांकि, किसी भी व्यक्ति ने अपनी तरफ से कोई छेड़छाड़ करने या जीव को जबरन बाहर खींचने का जोखिम नहीं उठाया, बल्कि फौरन सतर्कता बरतते हुए वन्यजीव रेस्क्यू टीम से संपर्क साधा।
सावधानीपूर्वक रेस्क्यू और प्रजाति की पहचान
सूचना प्राप्त होते ही वन्यजीव रेस्क्यूअर विवेक जायसवाल घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। उन्होंने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सबसे पहले तमाशबीन लोगों को जूते से उचित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके बाद अत्यंत सावधानी और पेशेवर तरीके का इस्तेमाल करते हुए जूते के भीतर से सांप को बाहर निकाला गया। जांच के बाद सामने आया कि जूते में पनाह लिए बैठा यह जीव घोड़ा पछाड़ प्रजाति का सांप था। परिवार और इलाके के लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि यह प्रजाति विषैली नहीं होती है। सफल रेस्क्यू प्रक्रिया पूरी करने के उपरांत सांप को मौके से सुरक्षित ले जाया गया।
घोड़ा पछाड़ सांप के व्यवहार की खासियत
रेस्क्यूअर विवेक जायसवाल ने बताया कि पकड़ा गया घोड़ा पछाड़ सांप पूरी तरह जहरमुक्त होता है। स्वभाव के लिहाज से यह मुख्य तौर पर निशाचर जीव माना जाता है, जो रात के अंधेरे में शिकार और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। दिन के उजाले में यह खुद को बचाने के लिए शांत, एकांत और महफूज ठिकानों की तलाश में रहता है। इसी स्वभाव के चलते अंधेरी और बंद जगह तलाशते हुए यह सांप जूते के अंदर दाखिल हो गया था।
जूते पहनने से पहले बरतें यह जरूरी सावधानी
इस घटना के सामने आने के बाद रेस्क्यू टीम ने आम नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। घरों के बाहर, बरामदे या लंबे समय से किसी वीरान कोने में रखे जूतों व अन्य सामान को पहनने अथवा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह झाड़-फूंककर जांच लेना चाहिए। यदि कभी किसी सामान या जूते के भीतर सांप दिख जाए, तो आम लोगों को उसे स्वयं पकड़ने या भगाने की कोशिश कतई नहीं करनी चाहिए। सूर्य नगर के निवासियों ने बिना किसी हड़बड़ी के प्रशिक्षित रेस्क्यूअर को बुलाकर सूझबूझ का परिचय दिया, जिससे बिना किसी नुकसान के जीव को सुरक्षित निकाला जा सका।

















