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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे, घाटी में बढ़ते पर्यटन और रेल सेवा के बीच बदलती जमीनी तस्वीरभारत
5 अग॰ 2026, 4:43 am (6 घंटे पहले)· 2

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे, घाटी में बढ़ते पर्यटन और रेल सेवा के बीच बदलती जमीनी तस्वीर

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, रेल संपर्क और सामाजिक अधिकारों में बड़े बदलाव देखे गए हैं, हालांकि इस फैसले पर राजनीतिक चर्चा अब भी जारी है।

केन्द्र सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों और अनुच्छेद 35ए को समाप्त किए जाने के फैसले को सात साल पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही राज्य का पुनर्गठन कर उसे जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। इस संवैधानिक बदलाव के सात वर्षों के दौरान क्षेत्र में विकास, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और नागरिक अधिकारों के स्तर पर कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले हैं, हालांकि इस निर्णय को लेकर आज भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और 2019 का पुनर्गठन

वर्ष 1947 में महाराजा हरि सिंह ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करके जम्मू-कश्मीर का भारत संघ में विलय स्वीकार किया था। इसके पश्चात भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल करके राज्य को विशेष दर्जा प्रदान किया गया था, जबकि अनुच्छेद 35ए के माध्यम से वहां के स्थायी निवासियों के लिए कुछ विशेष अधिकार निर्धारित किए गए थे। 5 अगस्त 2019 को इन प्रावधानों के खात्मे के बाद राज्य की प्रशासनिक स्थिति में पूर्ण बदलाव आया और इसे दो नए केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी यह निर्णय देश की राजनीति में एक मुख्य चर्चा का विषय बना हुआ है।

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घाटी की शांति, पर्यटन और लाल चौक का बदलता माहौल

स्थानीय नागरिक विमल मेहरा के अनुसार, 5 अगस्त 2019 के बाद से घाटी में स्थिति में सकारात्मक बदलाव महसूस किया गया है। वर्तमान में पर्यटक श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक लाल चौक पर बिना किसी भय के घूमते हैं, राष्ट्रीय ध्वज के साथ तस्वीरें लेते हैं और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाते हैं। जिस स्थान को अतीत में तनाव और विरोध का केंद्र माना जाता था, वहां अब तिरंगा लहराता हुआ दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में हर घर तिरंगा अभियान का आयोजन हो रहा है, धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित की जा रही हैं और वर्षों से बंद पड़े कई मंदिरों को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है।

एक अन्य नागरिक दीपक सिंह बताते हैं कि पहले कश्मीर घाटी में बार-बार हड़ताल, बंद और कर्फ्यू जैसी समस्याएं आम बात थीं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ऐसी स्थितियों में व्यापक कमी आई है। इसके साथ ही, अतीत की तुलना में पत्थरबाजी की घटनाओं पर भी बहुत हद तक अंकुश लगा है और आम जनजीवन अधिक सुगम हुआ है।

व्यापारिक प्रगति, रेल कनेक्टिविटी और सुरक्षा चुनौतियां

जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक, पिछले सात सालों में जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों की गति तेज हुई है। अब भारतीय रेलवे की ट्रेन सेवा घाटी तक पहुंच चुकी है, जिससे आवागमन आसान हुआ है और पर्यटन व्यवसाय को गति मिली है। राज्य में विभिन्न प्रकार की विकास परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है और आतंकवादी घटनाओं की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद, अरुण गुप्ता ने यह स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में घटित हुई कुछ छिटपुट आतंकवादी वारदातें अब भी व्यापारिक और सामाजिक दृष्टिकोण से चिंता का कारण बनी हुई हैं।

नागरिक अधिकार और श्रद्धालुओं की सुरक्षा

श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि का कहना है कि 5 अगस्त 2019 के फैसले के बाद से लंबे समय से वंचित समुदायों को उनके वाजिब अधिकार मिले हैं। गोरखा समुदाय, वाल्मीकि समाज और पीओजेके (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर) से आए विस्थापित लोगों को पहली बार राजनीतिक और रोजगार संबंधी अधिकार प्राप्त हुए हैं। ये सभी वर्ग अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर चुनाव में मतदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम दधीचि ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले सैलानी तथा माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु अब पहले के मुकाबले खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं।

संवैधानिक निर्णय पर बनी हुई है राष्ट्रीय बहस

अनुच्छेद 370 समाप्त होने के सात वर्ष पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर की व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। जहां एक ओर सुरक्षा और अधोसंरचना के मोर्चे पर सुधार देखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के बीच इस फैसले के प्रभावों को लेकर राय अब भी विभाजित है। यही कारण है कि यह मुद्दा भारतीय राजनीति और सार्वजनिक बहसों में आज भी एक अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक विषय बना हुआ है।

सवाल-जवाब

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए कब हटाए गए थे?
केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों और अनुच्छेद 35ए को हटाने का फैसला लिया था।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव हुआ?
राज्य का पुनर्गठन कर उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया।
अनुच्छेद 370 हटाने के 7 साल बाद पर्यटन और कनेक्टिविटी की क्या स्थिति है?
घाटी तक रेल सेवा पहुंच चुकी है, लाल चौक पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आई है।
किन वंचित समुदायों को राजनीतिक और रोजगार अधिकार मिले हैं?
गोरखा समुदाय, वाल्मीकि समाज और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से आए विस्थापितों को मताधिकार और सरकारी नौकरियों के अवसर मिले हैं।
क्या घाटी में सुरक्षा स्थिति में कोई सुधार दर्ज किया गया है?
घाटी में हड़ताल, कर्फ्यू और पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी आई है, हालांकि हालिया आतंकवादी हमलों पर चिंता जताई गई है।
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