हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के जाने का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन जाने से पहले इसका तेवर काफी आक्रामक नजर आ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर जारी है और इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड ने अपनी दस्तक दे दी है। मौसम के इस अचानक आए बदलाव से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को सितंबर के महीने में ही सर्दियों के कपड़ों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
ऑरेंज अलर्ट और मौसम विभाग की चेतावनी
शिमला के मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार सुबह नौ बजे एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की थी। विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों के भीतर चंबा, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना जताई गई थी। इसके साथ ही कुछ चुनिंदा स्थानों पर तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश का अनुमान भी जताया गया था, जिसे देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
विभिन्न जिलों में बारिश के आंकड़े
मौसम विभाग के सुबह 10 बजे जारी किए गए बुलेटिन के अनुसार, पिछले 12 घंटों के दौरान बिलासपुर और मंडी जिलों में व्यापक स्तर पर पानी बरसा है। इसमें सबसे अधिक बारिश बिलासपुर जिले के नैना देवी इलाके में दर्ज की गई, जहां 86.8 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके अलावा मंडी जिले के मुरारी देवी में 50.6 मिलीमीटर, स्लैपर में 48.1 मिलीमीटर और बिलासपुर के मलराओं में 48.0 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। घाघस में 40.2 मिलीमीटर, बरठीं में 38.6 मिलीमीटर, सुंदरनगर में 37.1 मिलीमीटर, गोहर में 35.0 मिलीमीटर और जोगिंदरनगर में 33.0 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके साथ ही सिरमौर जिले के नाहन में 34.2 मिलीमीटर, पांवटा साहिब में 31.0 मिलीमीटर और ऊना जिले के नंगल डैम क्षेत्र में 32.0 मिलीमीटर बारिश मापी गई।
मंडी और मनाली का हाल
मंडी जिले के धर्मपुर और पंडोह समेत कई इलाकों में सुबह से ही बादलों ने डेरा डाल रखा है। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मंडप उपतहसील के निवासी नरेश ठाकुर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि वहां सुबह साढ़े पांच बजे से ही भारी बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश की वजह से क्षेत्र के सभी नदी और नाले उफान पर आ गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस आंधी-तूफान और बारिश की वजह से खेतों में खड़ी मक्की की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। मौसम में अचानक आए इस भारी बदलाव और ठंड के कारण उन्हें अपनी जैकेट बाहर निकालनी पड़ी है और कड़ाके की ठंड महसूस हो रही है।
लाहौल घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी
एक तरफ जहां निचले इलाकों में भारी बारिश से जनजीवन थम सा गया है, वहीं मनाली और लाहौल स्पीति की ऊंची चोटियों पर मौसम का एक अलग ही रूप देखने को मिला है। सितंबर के महीने में यहाँ बर्फबारी दर्ज की गई है। लाहौल घाटी में बारालाचा दर्रे के पास ताजा हिमपात हुआ है, जो इस सीजन की पहली बर्फबारी है। इस दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी घाटी में मौजूद हैं। लाहौल स्पीति में बर्फबारी को लेकर अपने ब्लॉग के माध्यम से महिला मनेपा ने बताया कि गुरुवार को हजारों लोग घाटी में ड्रिलबुरी कोरा यानी परिक्रमा के लिए निकले हुए हैं और इसी दौरान यह बर्फबारी शुरू हुई। उन्होंने बताया कि सितंबर के इस महीने में लोगों को जनवरी जैसी कड़ाके की ठंड का अहसास हो रहा है।
सायर त्योहार और स्थानीय जनजीवन
यह पूरा घटनाक्रम एक ऐसे दिन सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू और कुछ अन्य चुनिंदा जिलों में पारंपरिक सायर का त्योहार मनाया जा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस त्योहार को बरसात के मौसम के आधिकारिक अंत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। सायर त्योहार के साथ ही राज्य में सर्दियों के मौसम का औपचारिक आगाज माना जाता है और इसी दिन से फसलों की कटाई का कार्य भी आरंभ हो जाता है। त्योहार के दिन ही सुबह से बदले हुए मौसम और हल्की ठंड ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।
प्रशासन की चेतावनी और एहतियात
मौसम विभाग ने अपनी चेतावनियों में स्पष्ट किया है कि इस तरह के खराब मौसम के दौरान कुछ स्थानों पर अचानक बाढ़ आने का खतरा बन सकता है। इसके अलावा सड़कों पर भारी जलभराव और कोहरे या बादलों के कारण दृश्यता कम होने की समस्या भी पैदा हो सकती है। निचले और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में जलभराव के साथ-साथ भूस्खलन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों को खराब मौसम, बारिश और आंधी-तूफान के दौरान पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है।



















