जम्मू-कश्मीर प्रशासन का कामकाज सोमवार से औपचारिक तौर पर जम्मू से संचालित होने लगा है। द्विवार्षिक राजधानी स्थानांतरण की ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत सचिवालय और अन्य मुख्य प्रशासनिक कार्यालय श्रीनगर से स्थानांतरित होकर शीतकालीन राजधानी पहुंच चुके हैं। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने 2 नवंबर को स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में इस व्यवस्था को बहाल करने का कदम आम जनता की भावनाओं और प्राथमिकताओं को प्राथमिकता देकर उठाया गया था।
1872 में डोगरा शासकों द्वारा शुरू हुई ऐतिहासिक व्यवस्था
प्रशासनिक तंत्र को छह-छह महीने के अंतराल पर दो राजधानियों के बीच स्थानांतरित करने का सिलसिला 154 साल पुराना है। डोगरा शासकों ने 1872 में इस द्विवार्षिक परिपाटी की नींव रखी थी, जिसके तहत गर्मियों के दौरान सरकार श्रीनगर से और सर्दियों के महीनों में जम्मू से संचालित की जाती रही है। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी सरकार ने इस परंपरा को दोबारा बहाल करने का फैसला किया।
जनता की आकांक्षाओं और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि कुछ समय के लिए इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था, मगर पिछले साल इसे फिर से चालू कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि प्रशासन ने कश्मीर घाटी में पूरे छह महीने तक जनता की सेवा की है और अब आने वाले छह महीने के दौरान जम्मू संभाग के नागरिकों के लिए भी इसी निष्ठा के साथ काम किया जाएगा। उनके अनुसार, यह व्यवस्था दशकों से दोनों संभागों के नागरिकों की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करती आई है और आगे भी इसी तरह काम करती रहेगी।
चार दशकों का विधायी अनुभव और आगामी बजट सत्र
अब्दुल रहीम राथर ने अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित बजट सत्र के व्यवस्थित संचालन को लेकर भी पूरा भरोसा जताया। अपने चार दशकों के लंबे संसदीय और विधायी अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही का संचालन उनके लिए कोई कठिन कार्य नहीं है। पिछले बजट सत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उस दौरान विपक्ष सहित सदन में मौजूद सभी राजनीतिक दलों के विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याओं और विचारों को खुलकर रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। उस समय लगभग सभी सदस्यों ने कार्यवाही के संचालन पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया था।
मंत्रिमंडल में नए चेहरों का समावेश
सरकार में चार नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी उम्मीदें साझा कीं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल हुए नए और अनुभवी मंत्रियों से यह आशा की जाती है कि वे आम जनता की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं और अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरेंगे तथा जनहित के कार्यों को गति देंगे।

















