छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने और आजीविका के नए रास्ते खोलने के मकसद से एक खास पहल जमीन पर उतारी गई है। पिंक दीदी पिंक ई-ऑटो नामक इस परियोजना के जरिए क्षेत्र की 52 महिलाओं को ई-ऑटो सौंपे गए हैं, ताकि वे खुद वाहन चलाकर नियमित आय अर्जित कर सकें। इस व्यवस्था से जुड़ने के बाद महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार का हाथ बंटा रही हैं, बल्कि अपनी संतानों के बेहतर कल और उनकी पढ़ाई-लिखाई के सपनों को भी मजबूती दे रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से मिला संबल और आजीविका का साधन
इस परियोजना से लाभान्वित होने वालों में जय बिहार समूह की सक्रिय सदस्य राजकुमारी पटेल भी शामिल हैं, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी में इस वाहन ने बड़ा सकारात्मक मोड़ ला दिया है। ई-ऑटो की चाबी मिलने के उपरांत अब वह खुद सड़कों पर गाड़ी चलाकर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं। राजकुमारी पटेल का कहना है कि उनके घर-परिवार का कामकाज पहले भी सामान्य रूप से चल रहा था, मगर ई-ऑटो हाथ में आने के बाद उन्हें अपनी निजी कमाई का एक भरोसेमंद और स्वतंत्र साधन हासिल हो गया है।
कमाई के आंकड़ों पर बात करते हुए राजकुमारी पटेल ने साझा किया कि वह ई-ऑटो के फेरे लगाकर हर रोज लगभग 500 से 600 रुपये तक आसानी से जुटा लेती हैं। प्रतिदिन होने वाली इस नियमित बचत और आमदनी से उनके पूरे परिवार की माली हालत पहले के मुकाबले काफी सुदृढ़ हुई है और रोजमर्रा के जरूरी खर्चों को पूरा करना अब पहले से अधिक आसान हो गया है।
चारदीवारी से निकलकर बनीं आत्मनिर्भर, बच्चों की पढ़ाई पर नजर
अपने बीते दिनों को याद करते हुए राजकुमारी पटेल बताती हैं कि इस योजना से जुड़ने से पहले वह केवल एक गृहिणी थीं और उनका पूरा समय घर-गृहस्थी के सामान्य कामों में ही बीतता था। हालांकि उनके मन में हमेशा यह भावना बनी रहती थी कि वह अपने बूते कुछ काम करें, जिससे परिवार की आर्थिक ताकत बढ़े और बच्चों को बेहतरीन स्कूल में अच्छी तालीम दिलाई जा सके। इसी पक्के इरादे के साथ उन्होंने घर से बाहर निकलकर इस ई-ऑटो योजना का हिस्सा बनने का फैसला किया था।
आज वह अपनी कड़ी मेहनत के दम पर रोजाना धनोपार्जन कर रही हैं और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह तैयार करने में जुटी हैं। उनके अनुसार यह गुलाबी ई-ऑटो उनके लिए सिर्फ एक साधारण सवारी गाड़ी नहीं है, बल्कि यह स्वावलंबन हासिल करने, सामाजिक पहचान बनाने और निजी आकांक्षाओं को सच करने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।
घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक भागीदारी की नई मिसाल
पिंक दीदी पिंक ई-ऑटो परियोजना राज्य में महिलाओं को आजीविका के ठोस अवसर मुहैया कराने के लिहाज से बेहद असरदार साबित हो रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से महिलाएं अपने घर-आंगन के दायित्वों को संभालने के साथ-साथ आय देने वाले कामों में भी पूरी लगन से हाथ बंटा रही हैं। राजकुमारी पटेल जैसी कर्मठ महिलाओं का सफर यह साबित करता है कि जब महिलाओं को समय पर सही साधन, अनुकूल माहौल और प्रोत्साहन दिया जाए, तो वे न केवल अपने जीवन की दिशा बदल सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।























