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जातिगत प्रताड़ना मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, हिमाचल DGP अशोक तिवारी 20 अगस्त को दिल्ली तलबभारत
17 अग॰ 2026, 5:57 pm (36 दिन पहले)· 1

जातिगत प्रताड़ना मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, हिमाचल DGP अशोक तिवारी 20 अगस्त को दिल्ली तलब

शिमला में तैनात डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हिमाचल के डीजीपी अशोक तिवारी को 20 अगस्त को दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे का आंतरिक घमासान अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच चुका है। शिमला में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विजय कुमार रघुवंशी द्वारा लगाए गए जातिगत प्रताड़ना के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक तिवारी को दिल्ली तलब किया है। आयोग के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, डीजीपी को 20 अगस्त को नयी दिल्ली स्थित आयोग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। यह मामला राज्य प्रशासनिक सेवा और पुलिस महकमे में गहरी हलचल का कारण बना हुआ है।

सुनवाई की रूपरेखा और आयोग के निर्देश

आधिकारिक रूप से जारी किए गए नोटिस के मुताबिक, इस संवेदनशील मामले की सीधी सुनवाई राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य पार्थ बिस्वास करेंगे। आयोग ने हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) आर डी नजीम और डीजीपी अशोक तिवारी दोनों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित तमाम प्रासंगिक दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य रूप से अपने साथ लाएं। इसके अलावा, आयोग ने यह भी संकेत दिए हैं कि शिकायतकर्ता डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी को भी सुनवाई प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा जा सकता है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

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विवाद की पृष्ठभूमि और गाड़ियाँ छीने जाने का मामला

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 जून को हुई थी, जब डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में डीएसपी ने आरोप लगाया था कि पूर्व में शिमला के एसपी रहे एक वरिष्ठ अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। इस घटना के तुरंत बाद उनकी सरकारी गाड़ी और सुरक्षा में तैनात पीएसओ (पर्सनल सुरक्षा अधिकारी) को वापस ले लिया गया था। डीएसपी ने अपनी शिकायत में इसे स्पष्ट रूप से जाति आधारित उत्पीड़न करार दिया था। इस विवाद के संबंध में संबंधित थाने में भी शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत मिलने के उपरांत आयोग ने 30 जून को तत्कालीन कार्यवाहक डीजीपी अशोक तिवारी को पहला नोटिस भेजा था और 15 दिनों के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का समय दिया था।

सवाल-जवाब

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हिमाचल के डीजीपी को क्यों तलब किया है?
शिमला में तैनात डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी ने डीजीपी अशोक तिवारी पर जाति आधारित उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिस पर आयोग ने व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया है।
डीजीपी अशोक तिवारी को दिल्ली में किस तारीख को पेश होना है?
डीजीपी अशोक तिवारी को 20 अगस्त को नयी दिल्ली में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी की मूल शिकायत क्या थी?
डीएसपी का आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनसे सरकारी गाड़ी और पीएसओ छीन लिया गया, जिसे उन्होंने जातिगत प्रताड़ना बताया।
इस मामले की सुनवाई आयोग का कौन सा सदस्य कर रहा है?
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य पार्थ बिस्वास इस मामले की सुनवाई करेंगे।
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