राजस्थान सरकार के उद्योग एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विपक्षी दल कांग्रेस की भाषा और कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दी गई टिप्पणी का जवाब देते हुए राठौड़ ने कहा कि खड़गे की परवरिश बेहतर माहौल में हुई होगी, लेकिन वर्तमान समय में वे गलत संगत का शिकार हो गए हैं। इसी वजह से वे राजनीतिक मर्यादा से बाहर जाकर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की कार्यप्रणाली को दोहरे मानदंडों से युक्त बताते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी जब खुद कोई निर्णय लेती है तो उसे अपनी नीति करार देती है, लेकिन वही काम जब सत्ता पक्ष करे तो उसे राजनीति का नाम दे दिया जाता है।
खड़गे के बयान और कांग्रेस के दोहरे रवैये पर निशाना
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व की बयानबाजी को राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे प्रधानमंत्री के संदर्भ में इस्तेमाल की जा रही भाषा अनुचित है। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में संवाद की गरिमा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए भाषा के स्तर को गिरा रही है। जब भी सरकार जनहित में कोई कदम उठाती है, तो कांग्रेस का रवैया रक्षात्मक और नकारात्मक हो जाता है, जिससे उनकी राजनीतिक हताशा स्पष्ट नजर आती है।
एसआईआर मुद्दे पर राहुल गांधी और कपिल सिब्बल का संदर्भ
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर खड़े किए जा रहे विवादों पर बोलते हुए राठौड़ ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की बातें और बयान इस बात का संकेत देते हैं कि वे विषयों का गहराई से अध्ययन नहीं करते। देश के लोकतांत्रिक इतिहास में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सामान्य और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो पहले भी कई बार संपन्न हो चुकी है।
अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए राठौड़ ने साल 2013 के एक उदाहरण का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में जब मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण हुआ था, तब तत्कालीन कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि अकेले दिल्ली में 13 लाख अयोग्य या दोहरे नाम हटाए गए थे और उस समय कांग्रेस ने इसे बिल्कुल सही और आवश्यक कदम माना था। राठौड़ ने कहा कि आज जब वही प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई जा रही है, तो कांग्रेस इसे लेकर अविश्वास और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
संस्थाओं की साख और ईवीएम विवाद पर बयान
राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेता एक निर्धारित टूलकिट के तहत काम कर रहे हैं। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य देश की निष्पक्ष और सम्मानित संस्थाओं के प्रति आम जनता के भरोसे को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और भारत निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाएं देश के सम्मान और लोकतंत्र का आधार स्तंभ हैं, लेकिन कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए इन पर सवाल उठा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भारत में ईवीएम तकनीक को लाने की शुरुआत खुद कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी। जब तक चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं, तब तक प्रणाली निष्पक्ष लगती है, लेकिन जैसे ही जनता उन्हें नकार देती है, वे ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर उंगली उठाने लगते हैं। राठौड़ ने इस तरह के रवैये को लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला दुष्प्रचार करार दिया।
जेन जी आंदोलन और युवाओं का राजनीतिक इस्तेमाल
देश के युवाओं और तथाकथित जेन जी आंदोलन पर अपनी बात रखते हुए राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि युवाओं के वास्तविक मुद्दों का राजनीतिक पुनर्जन्म या रिलॉन्चिंग के लिए इस्तेमाल किया जाना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी युवाओं के नाम पर अपना राजनीतिक आधार तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के विचारों और जानकारियों से जुड़ा हुआ है। आधुनिक पीढ़ी अत्यंत जागरूक है और उसे किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत आसानी से मैनिपुलेट नहीं किया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें सड़क पर बने अस्थायी मंचों के बजाय उचित और जिम्मेदार मंचों का उपयोग करना चाहिए।
तकनीकी क्षमता और 2036 ओलंपिक की तैयारियां
अपने व्यक्तिगत अनुभवों और जीवन के पाठों का जिक्र करते हुए राठौड़ ने कहा कि किसी भी बड़े राष्ट्रीय मिशन या लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पण और बलिदान की आवश्यकता होती है। वे देश हित में हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने भारत के आईटी क्षेत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारी आईटी कंपनियों के पास अद्भुत क्षमता है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उन्हें वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल रहे हैं।
खेल विभाग का प्रभार संभाल रहे राठौड़ ने राजस्थान में खेलों के विकास और 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने एक रूपक का उपयोग करते हुए कहा कि जिस प्रकार जब तक बीज नहीं बोया जाएगा, तब तक पौधा नहीं उगेगा और न ही फल प्राप्त होंगे, ठीक उसी प्रकार खेल क्षेत्र में भी आधारभूत स्तर पर काम करना जरूरी है। राजस्थान सरकार ने अभी से 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने की दूरगामी योजना पर काम शुरू कर दिया है, ताकि आने वाले समय में देश और प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर परिणाम मिल सकें।

















