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जातीय जनगणना की नई प्रश्नावली पर कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी हमलावर, 10वें प्रश्न को रद्द करने की मांगबिहार
26 अग॰ 2026, 4:50 pm (30 दिन पहले)· 2

जातीय जनगणना की नई प्रश्नावली पर कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी हमलावर, 10वें प्रश्न को रद्द करने की मांग

गृह मंत्रालय की 40 सवालों वाली जनगणना प्रश्नावली के 10वें सवाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने इसे अस्पष्ट बताते हुए प्रश्नावली रद्द करने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

जातिगत जनगणना के खाके पर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई 40 सवालों की प्रश्नावली सामने आते ही दिल्ली, पटना और कोलकाता तक विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। इस प्रश्नावली को फिलहाल देश के पहाड़ी राज्यों में आजमाया जा रहा है, जिसे अगले वर्ष की शुरुआत से मैदानी क्षेत्रों और अन्य राज्यों में लागू करने की तैयारी है। हालांकि, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत पूरा विपक्ष इस पहल के खिलाफ गोलबंद हो गया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता है और आंकड़ों की सही तस्वीर पेश करने के बजाय लीपापोती की कोशिश की जा रही है। इस विवाद के बीच विपक्षी दलों ने मौजूदा प्रश्नावली को तुरंत रद्द करने और एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की पुरजोर मांग की है।

10वें प्रश्न की अस्पष्टता और प्रामाणिक आंकड़ों पर सवाल

प्रश्नावली के 10वें सवाल को लेकर सबसे अधिक आपत्ति जताई जा रही है। गृह मंत्रालय की प्रश्नावली में शामिल यह 10वां प्रश्न सीधे तौर पर नागरिक की जाति से संबंधित है। कांग्रेस और अन्य सहयोगियों का कहना है कि यह सवाल बेहद अस्पष्ट और खुले स्वरूप वाला यानी ओपन एंडेड है। विपक्ष का तर्क है कि जब तक राज्यों द्वारा सत्यापित और प्रामाणिक जातियों की सूची के आधार पर स्पष्ट विकल्प नहीं दिए जाएंगे, तब तक पूरे देश से सटीक और सही आंकड़े जुटाना असंभव होगा। स्पष्ट विकल्पों के अभाव में प्राप्त आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं, जिससे नीति निर्माण में बाधा आ सकती है। इसी वजह से इस प्रश्न की संरचना में बदलाव करने या पूरी प्रश्नावली को रद्द करने की मांग की जा रही है।

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बिहार और तेलंगाना की वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की मांग

राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। आरजेडी का कहना है कि केंद्र सरकार को राज्यों द्वारा पूर्व में अर्जित अनुभवों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में पहले ही काफी व्यवस्थित और साइंटिफिक पद्धति का उपयोग करके जातिगत डेटा एकत्र किया गया है। आरजेडी ने मांग की है कि केंद्र को पूरे देश में उसी सफल कार्यप्रणाली और प्रणाली को लागू करना चाहिए। पार्टी का मानना है कि चूंकि राज्यों के पास प्रमाणित जातिगत आंकड़े पहले से उपलब्ध हैं, इसलिए उनकी स्थापित प्रक्रिया को अपनाकर ही राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष और सटीक निष्कर्ष प्राप्त किए जा सकते हैं।

सर्वदलीय बैठक की मांग और एकतरफा फैसले पर एतराज

नीतिगत फैसलों में आम सहमति की कमी को लेकर भी विपक्ष आक्रामक है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील राष्ट्रीय विषय पर सरकार ने एकतरफा निर्णय थोपा है। नेताओं के अनुसार, इस श्रेणी के बड़े सामाजिक फैसले लेने से पहले किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के साथ कोई चर्चा या परामर्श नहीं किया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने व्यापक प्रभाव वाले सर्वे से पहले सभी पक्षों की राय लेना आवश्यक था। इसी नाराजगी के चलते विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी है ताकि सर्वसम्मति से एक पारदर्शी और स्वीकार्य प्रश्नावली तैयार की जा सके।

सवाल-जवाब

विपक्ष गृह मंत्रालय की जनगणना प्रश्नावली का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि 40 प्रश्नों की सूची में शामिल 10वां सवाल बेहद अस्पष्ट और ओपन एंडेड है, जिससे देश में जातियों का सही और प्रामाणिक आंकड़ा नहीं मिल पाएगा।
आरजेडी ने केंद्र सरकार से किस मॉडल को लागू करने की मांग की है?
आरजेडी ने मांग की है कि केंद्र सरकार बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई वैज्ञानिक डेटा संग्रह पद्धति को पूरे देश में लागू करे।
वर्तमान में यह 40 सवालों वाली प्रश्नावली कहां आजमाई जा रही है?
गृह मंत्रालय की यह नई प्रश्नावली फिलहाल देश के पहाड़ी राज्यों में ट्रायल के तौर पर आजमाई जा रही है और अगले साल की शुरुआत से इसे मैदानी क्षेत्रों में लागू करने की योजना है।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने सरकार के फैसले पर क्या सवाल उठाया है?
ममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े नीतिगत फैसले पर सरकार ने किसी भी राजनीतिक दल से चर्चा किए बिना एकतरफा निर्णय थोप दिया है।
विपक्षी दलों की मुख्य मांग क्या है?
विपक्षी दल मौजूदा जनगणना प्रश्नावली को तुरंत रद्द करने और सर्वसम्मति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं।
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