उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां केराकत तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षत्रियपुर गांव के स्कूली बच्चे हर दिन कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। गांव की मुख्य सड़क अत्यंत जर्जर स्थिति में है और थोड़ी सी बारिश होते ही पूरा मार्ग जलजमाव व कीचड़ में तब्दील हो जाता है। रोज स्कूल जाते समय फिसलकर गिरना, स्कूली यूनिफॉर्म गंदी होना और विद्यालय में शिक्षकों की डांट सुनना इन मासूमों की दैनिक नियति बन चुका है। अपनी इस दर्दनाक स्थिति से तंग आकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सैमुअल पॉल से मुलाकात कर पक्की सड़क बनवाने की गुहार लगाई है।
कीचड़ और जलजमाव के बीच मासूमों का दैनिक संघर्ष
गांव के बच्चों के लिए पढ़ाई लिखाई का सफर किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली सात वर्षीय छात्रा दृष्टि विश्वकर्मा ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनके घर से स्कूल की दूरी लगभग ढाई किलोमीटर है, जिसे उन्हें रोजाना पैदल ही तय करना पड़ता है। रास्ते में इतना अधिक कीचड़ रहता है कि संतुलन बिगड़ते ही वे नीचे गिर जाती हैं। दृष्टि ने बताया कि पिछले हफ्ते भी वह रास्ते में गिर गई थी और दो तीन दिन पहले भी फिसल गई थी, जिसके बाद सहपाठी उनका मजाक उड़ाते हैं। उसने भावुक होकर जिलाधिकारी से रास्ता जल्द से जल्द ठीक कराने की अपील की।
वहीं छठी कक्षा की छात्रा आंचल विश्वकर्मा की व्यथा भी ऐसी ही है। आंचल ने बताया कि सड़क की बदतर हालत की वजह से स्कूल वैन गांव के भीतर तक नहीं आ पाती। चक्के स्थित अपने स्कूल जाने के लिए जब बच्चे पैदल निकलते हैं तो अक्सर कीचड़ में फिसल जाते हैं। कपड़े खराब होने पर विद्यालय पहुंचने के बाद अध्यापकों की फटकार झेलनी पड़ती है, जिससे उनका मनोबल प्रभावित होता है।
प्रशासनिक उपेक्षा और चार वर्षों से जारी समस्या
स्थानीय निवासी दीपक कुमार ने बताया कि क्षत्रियपुर गांव में विश्वकर्मा, मौर्या और मिश्रा समाज सहित कई अन्य परिवारों की विशाल आबादी निवास करती है। गांव को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पिछले चार वर्षों से पूरी तरह बदहाल पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर गांव के लोग उपजिलाधिकारी (SDM), क्षेत्राधिकारी (CO), स्थानीय कोतवाल, चौकी इंचार्ज से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों के प्रयास पर रोक और डीएम का आश्वासन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब लगातार शिकायतें देने के बाद भी शासन और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो ग्रामीणों ने स्वयं ही आपस में मिलकर मार्ग को चलने योग्य बनाने की पहल की। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर रास्ते के कीचड़ में राविश (ईंटों का मलबा) बिछाने का काम शुरू किया था। आरोप है कि इसकी सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को काम रोकने के लिए धमकाया। प्रशासन के दबाव के चलते काम बंद करना पड़ा और स्थिति जस की तस बनी रही। हाल ही में परेशान होकर ग्रामीणों ने बच्चों के साथ जिलाधिकारी सैमुअल पॉल से व्यक्तिगत मुलाकात की, जिस पर उन्होंने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जल्द ही पक्की सड़क बनवाने का भरोसा दिया है।



















