मिठाइयों की बात हो और रसीले गुलाब जामुन की चर्चा न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. मिर्जापुर में पारंपरिक स्वाद से भरपूर गुलाब जामुन को लोग बेहद चाव से खाते हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि हलवाई जैसी कोमलता और मिठास घर की रसोई में लाना बेहद कठिन काम है, लेकिन सही तकनीक और नाप-तौल की समझ हो तो इसे बिना किसी परेशानी के बनाया जा सकता है. मिर्जापुर के बरगछा इलाके के रहने वाले अनुभवी कारीगर अंकित गुप्ता ने घर पर ही बेहद कम सामग्री के साथ एकदम मुलायम और स्वादिष्ट गुलाब जामुन तैयार करने की पूरी विधि साझा की है.
सटीक अनुपात से आती है असली बनावट और कोमलता
कारीगर अंकित गुप्ता के मुताबिक अगर मावा, मैदा और बेकिंग सोडे का अनुपात सटीक रखा जाए, तो गुलाब जामुन कभी सख्त नहीं बनते और न ही चाशनी में जाकर बिखरते हैं. इसके लिए सबसे बुनियादी जरूरत 1 किलो मावे की होती है. इस 1 किलो मावे में ठीक 100 ग्राम मैदा मिलाना चाहिए. मैदे की यह मात्रा मावे को सही कसावट देती है, जिससे तलते समय दरारें नहीं पड़ती हैं. इसके साथ ही 100 ग्राम मैदे के अनुपात के अनुसार अपनी जरूरत के मुताबिक चुटकी भर खाने वाला सोडा यानी बेकिंग सोडा मिलाया जाता है. यह सोडा गुलाब जामुन के भीतरी हिस्से को जालीदार और पूरी तरह स्पंजी बनाने का काम करता है.
खुशबू और स्वाद के लिए खास सामग्री
स्वाद और महक को और निखारने के लिए मिश्रण तैयार करते वक्त अपनी पसंद के मुताबिक पिसी हुई इलायची या केसर के रेशे शामिल किए जा सकते हैं. इलायची की भीनी खुशबू और केसर का शाही अंदाज मिठास को और संतुलित बना देता है. सामग्री डालने के बाद मावे और मैदे को हथेलियों से तब तक अच्छी तरह एकसार किया जाता है, जब तक कि पूरा मिश्रण पूरी तरह चिकना न हो जाए. मिश्रण में किसी भी तरह की गांठ या रूखापन नहीं रहना चाहिए, क्योंकि मिश्रण जितना मुलायम गुंथा होगा, लोइयां उतनी ही बेदाग बनेंगी.
एक समान आकार की गोलियां और धीमी आंच पर सिकाई
जब मावे का मिश्रण पूरी तरह चिकना और एकरस हो जाए, तो उसके छोटे-छोटे गोल आकार के पेड़े बना लिए जाते हैं. इस दौरान खास ध्यान यह रखना होता है कि सभी गोलियां लगभग एक ही साइज की हों. एक समान आकार होने से कड़ाही में तलते वक्त सभी गुलाब जामुन एक साथ और अंदर तक समान रूप से पकते हैं. इसके बाद कड़ाही में आवश्यकतानुसार कुकिंग ऑयल या शुद्ध देसी घी गर्म किया जाता है. गोलियों को कड़ाही में डालने के बाद आंच को धीमा कर दिया जाता है. धीमी आंच पर लगातार घुमाते हुए तलने से उनका रंग चारों तरफ से सुनहरा भूरा हो जाता है और अंदर का हिस्सा कच्चा नहीं रहता.
चाशनी में 10 से 15 मिनट का समय
जैसे ही गोलियां सुनहरी और कुरकुरी होकर सिक जाएं, उन्हें सीधे कड़ाही से निकालकर पहले से तैयार की गई चीनी की चाशनी में डुबो दिया जाता है. कारीगर अंकित के अनुसार, इन तले हुए गुलाब जामुनों को चाशनी के भीतर करीब 10 से 15 मिनट तक डूबा रहने देना चाहिए. इतने समय में चाशनी पूरी तरह सोख ली जाती है, जिससे मिठाई भीतर तक रसदार, मीठी और मुंह में घुल जाने वाली बन जाती है. 15 मिनट के बाद इन्हें गर्मागर्म परोसा जा सकता है.
गाय के दूध के मावे का महत्व और शेल्फ लाइफ
कारीगर ने एक बेहद जरूरी सुझाव देते हुए बताया कि अगर गुलाब जामुन बनाने के लिए गाय के दूध से तैयार किए गए मावे का इस्तेमाल किया जाए, तो इसका स्वाद लाजवाब होता है. इसके अलावा गाय के दूध के मावे से बनी यह मिठाई कई दिनों तक सुरक्षित रहती है और जल्दी खराब नहीं होती. वहीं अगर बाजार से खरीदे गए पुआ या तैयार खोए का उपयोग किया जाए तो गुलाब जामुन स्वादिष्ट जरूर बन जाते हैं, लेकिन उनकी शेल्फ लाइफ यानी टिकने की अवधि तुलनात्मक रूप से कम होती है.



















