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जयपुर में बनेगा राजस्थान का पहला बहुमंजिला वर्टिकल ई-बस डिपो, पचार में 10 हजार वर्गमीटर जमीन आरक्षितराजस्थान
17 सित॰ 2026, 2:49 pm (8 दिन पहले)· 3

जयपुर में बनेगा राजस्थान का पहला बहुमंजिला वर्टिकल ई-बस डिपो, पचार में 10 हजार वर्गमीटर जमीन आरक्षित

जयपुर के पचार में मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत राजस्थान का पहला वर्टिकल ई-बस डिपो बनाया जाएगा। इसके लिए आवंटित 10,000 वर्गमीटर जमीन पर बसों की पार्किंग, चार्जिंग और मेंटेनेंस की बहुमंजिला सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की इस मुहिम के तहत शहर में पहली बार एक बहुमंजिला यानी वर्टिकल ई-बस डिपो का निर्माण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा 2025-26 के अंतर्गत जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड यानी JCTSL के लिए इस परियोजना को हरी झंडी दे दी गई है। यह अनूठा डिपो जयपुर के कालवाड़ रोड के पास स्थित पचार के राजस्व ग्राम में बनाया जाएगा। इसके लिए खसरा नंबर 1455 की कुल 10,000 वर्गमीटर भूमि को आरक्षित किया गया है। अधिकारियों से इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है, जिससे अब शहर की सड़कों पर अधिक इलेक्ट्रिक बसों को उतारने की तैयारी तेज हो गई है। सामान्य तौर पर बनने वाले विस्तृत और फैले हुए डिपो के स्थान पर इस बहुमंजिला स्वरूप को अपनाना राज्य के शहरी नियोजन में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।

वर्टिकल डिजाइन के चयन और भूमि आवंटन की प्रक्रिया

जमीन के आवंटन और इस बहुमंजिला डिजाइन के चयन के पीछे की प्रक्रिया काफी दिलचस्प है। शुरुआती चरण में JCTSL ने इस इलेक्ट्रिक बस डिपो के निर्माण के लिए 20,000 वर्गमीटर भूमि की मांग की थी। इस बड़े भूभाग पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए पार्किंग, दैनिक संचालन, रखरखाव और बड़े चार्जिंग स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का खाका तैयार किया गया था। इस मांग के बाद स्थानीय जोन स्तर पर मंथन हुआ और अंततः 12,300 वर्गमीटर भूमि आवंटित करने का एक प्रस्ताव तैयार किया गया। हालांकि, जब इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए समिति की उच्च स्तरीय बैठक हुई, तो शहर में जमीन के सीमित विकल्पों और भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक नए दृष्टिकोण पर विचार किया गया। समिति के सदस्यों ने भूमि के अधिकतम और सबसे कुशल उपयोग पर चर्चा की और महसूस किया कि पारंपरिक डिपो के बजाय वर्टिकल निर्माण करना कहीं अधिक व्यावहारिक होगा। इस व्यावहारिक समाधान पर सहमति बनने के बाद, अंततः 10,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया, जो JCTSL की शुरुआती मांग से आधी है।

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बहुमंजिला ढांचे के निर्माण पर आपसी सहमति

इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए JCTSL के प्रबंध निदेशक ने 29 जून 2026 को एक आधिकारिक पत्र भेजकर इस आवंटित भूमि पर बहुमंजिला ढांचा तैयार करने की अपनी लिखित मंजूरी दे दी। इस लिखित सहमति के बाद परियोजना की प्रगति का रास्ता साफ हो गया। सीमित क्षेत्रफल में बहुमंजिला इमारत खड़ी करके JCTSL न केवल भूमि की कमी की समस्या का समाधान करेगी, बल्कि एक ही स्थान पर कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं भी विकसित कर सकेगी। इस डिपो का ढांचा कुछ इस तरह तैयार किया जाएगा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं व्यवस्थित और सुचारू तरीके से संचालित हो सकें। पारंपरिक रूप से बस डिपो बहुत अधिक जगह घेरते हैं, लेकिन इस वर्टिकल डिपो के माध्यम से जयपुर विकास प्राधिकरण यानी JDA और परिवहन विभाग मिलकर एक नया उदाहरण स्थापित करने जा रहे हैं।

वर्टिकल डिपो की अत्याधुनिक सुविधाएं और डिजाइन लाभ

इस बहुमंजिला ई-बस डिपो के भीतर कई महत्वपूर्ण सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षित पार्किंग, तेज रफ्तार वाले चार्जिंग स्टेशन और बसों की मरम्मत के लिए अत्याधुनिक मेंटेनेंस यार्ड शामिल होंगे। शहर में ई-बसों के बेड़े में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए इस डिपो के भीतर जगह का कुशल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है। वर्टिकल डिजाइन के लागू होने से कम भूमि पर भी अधिक उपयोगी और सुसज्जित क्षेत्रफल प्राप्त हो सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि भविष्य में जयपुर शहर में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में और वृद्धि की जाती है, तो बसों की पार्किंग और चार्जिंग के लिए नई जमीन खोजने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि इसी वर्टिकल ढांचे को और विस्तारित किया जा सकेगा। यह पूरी परियोजना आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

स्वामित्व और जोनल मास्टर प्लान का कानूनी पहलू

कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की बात करें तो जिस खसरा नंबर 1455 पर इस डिपो का निर्माण होना है, वह जयपुर मास्टर प्लान-2025 और संबंधित जोनल डेवलपमेंट प्लान के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए विशेष स्वीकृतियों की आवश्यकता होती है, इसलिए नगरीय विकास विभाग ने एक विशेष आदेश जारी कर ई-बस डिपो के लिए इस भूमि आवंटन को मंजूरी प्रदान की है। एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के तहत, इस आवंटित की गई पूरी 10,000 वर्गमीटर भूमि का मूल मालिकाना हक और स्वामित्व JDA के पास ही रहेगा। इसका मतलब यह है कि JCTSL को इस जमीन पर केवल डिपो के निर्माण और उसके संचालन की अनुमति दी जाएगी, जबकि इस मूल्यवान भूमि का अंतिम स्वामित्व JDA के अधीन सुरक्षित रहेगा।

ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों में परिवहन कनेक्टिविटी का विस्तार

पचार और कालवाड़ रोड के इस विशेष क्षेत्र में नया ई-बस डिपो स्थापित होने से जयपुर के शहरी और ग्रामीण परिवहन परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। इस डिपो के चालू होने से जयपुर के बाहरी और ग्रामीण इलाकों को मुख्य शहर से जोड़ना बेहद आसान हो जाएगा। विशेष रूप से जोबनेर, कालवाड़, रामकुटिया, माचवा, धर्मपुरा, हाथोज, गोविंदपुरा, भंभौरी और धानक्या जैसी जगहों से शहर आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इन ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में परिवहन के सीमित साधन हैं, लेकिन इस नए डिपो से बसों का संचालन शुरू होने के बाद यात्रियों को नियमित और पर्यावरण अनुकूल बस सेवाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, कालवाड़ से चांदपोल जैसे व्यस्त और प्रमुख रूटों पर भी इलेक्ट्रिक बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे, जिससे दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी का दायरा काफी बढ़ जाएगा।

जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का पर्यावरण अनुकूल लक्ष्य

जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों के इस बढ़ते संचालन से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि शहर के प्रदूषण स्तर में भी भारी कमी आने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PM ई-बस सेवा योजना के तहत देश भर में पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में ये बसें पूरी तरह से हरित तकनीक पर काम करती हैं और इनमें किसी भी प्रकार का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। नए डिपो में स्थापित होने वाले विशेष चार्जिंग बुनियादी ढांचे और त्वरित मेंटेनेंस सुविधाओं के कारण बसों को बिना किसी रुकावट के चलाया जा सकेगा। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने और जयपुर को एक स्मार्ट, स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में यह वर्टिकल डिपो एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

परियोजना के प्रमुख आंकड़े और वर्तमान स्थिति

यदि आंकड़ों और वर्तमान प्रगति पर नजर डालें, तो केंद्र सरकार की PM ई-बस योजना के तहत राजस्थान राज्य के लिए कुल 1,150 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं। राज्य को मिलने वाली इन कुल बसों में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी अधिकतम 450 बसें अकेले राजधानी जयपुर के लिए निर्धारित की गई हैं। इस योजना के क्रियान्वयन की दिशा में अगस्त 2026 में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया गया था, जब मुख्यमंत्री ने जयपुर में 16 नई ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर औपचारिक रूप से इस सेवा का शुभारंभ किया था। अब, पचार में डिपो के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने और इसके वर्टिकल स्वरूप को मंजूरी मिलने के बाद, जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ा दिया गया है।

सवाल-जवाब

जयपुर में पहला वर्टिकल ई-बस डिपो कहां बनाया जा रहा है?
यह वर्टिकल ई-बस डिपो जयपुर के कालवाड़ रोड के पास स्थित पचार के राजस्व ग्राम में बनाया जा रहा है।
डिपो के निर्माण के लिए कितनी भूमि आरक्षित की गई है?
डिपो के निर्माण के लिए खसरा नंबर 1455 की कुल 10,000 वर्गमीटर भूमि आरक्षित की गई है।
इस भूमि का मालिकाना हक किसके पास रहेगा?
इस पूरी भूमि का मालिकाना हक जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के पास ही सुरक्षित रहेगा, जबकि JCTSL इस पर डिपो का संचालन करेगी।
इस वर्टिकल डिपो के निर्माण से किन ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ मिलेगा?
इससे जोबनेर, कालवाड़, रामकुटिया, माचवा, धर्मपुरा, हाथोज, गोविंदपुरा, भंभौरी और धानक्या जैसे ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी मिलेगी।
पीएम ई-बस योजना के तहत जयपुर को कुल कितनी बसें आवंटित की गई हैं?
इस योजना के तहत राजस्थान को कुल 1,150 बसें आवंटित की गई हैं, जिनमें से सबसे अधिक 450 बसें जयपुर के लिए निर्धारित हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

यह परियोजना शहरी भूमि की कमी से निपटने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे और अंतरिक्ष दक्षता का बेहतरीन उदाहरण है। पारंपरिक क्षैतिज डिपो के मुकाबले आधी यानी 10,000 वर्गमीटर भूमि पर बहुमंजिला वर्टिकल ढांचा तैयार करने से न केवल पूंजीगत लागत का इष्टतम उपयोग होगा, बल्कि यह भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े के विस्तार के लिए एक वित्तीय और ढांचागत मॉडल भी साबित होगा। इस तरह की空间 उपयोग रणनीतियाँ कॉर्पोरेट और सार्वजनिक निवेश दोनों दृष्टियों से टिकाऊ साबित होती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

यह नीतिगत निर्णय भारत के शहरी परिवहन में भूमि के कम होते दायरे के बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मिसाल कायम करता है। आधी जमीन पर वर्टिकल ढांचा खड़ा करने की यह पहल दर्शाती है कि भविष्य में सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यय को सीमित रखते हुए बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण कैसे किया जाए। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी भारी भूमि अधिग्रहण के बिना सार्वजनिक परिवहन का विस्तार आसान हो जाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

एक अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा संवाददाता के रूप में, मैं इस बहुमंजिला ई-बस डिपो को सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखता हूँ। इस वर्टिकल ढांचे में भारी मात्रा में महंगी बसें, हाई-वोल्टेज चार्जिंग स्टेशन और लिथियम बैटरियां एक ही जगह मौजूद होंगी। ऐसे में इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना, चोरी व तोड़फोड़ रोकना और कड़े कानूनी सुरक्षा मानकों को लागू करना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

भूमि प्रबंधन और शहरी शासन के नजरिए से यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। मांग से आधी जमीन पर वर्टिकल डिपो बनाने का फैसला यह दिखाता है कि नीतिगत स्तर पर अब सीमित शहरी भूमि के कुशल उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, इस तरह के जटिल बुनियादी ढांचे की असली परीक्षा इसके समयबद्ध क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय में होगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्यों के लिए भी यह शहरी परिवहन नियोजन का एक बेहतरीन नीतिगत खाका साबित हो सकता है, जहां डिपो के लिए जमीन की भारी कमी है।

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