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झीरम घाटी नक्सली हमले के तेरह साल बाद सभी 10 आरोपियों को अदालत ने ठहराया दोषीछत्तीसगढ़
5 सित॰ 2026, 4:42 pm (20 दिन पहले)· 2

झीरम घाटी नक्सली हमले के तेरह साल बाद सभी 10 आरोपियों को अदालत ने ठहराया दोषी

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले में एनआईए की विशेष अदालत ने तेरह साल बाद फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने इस फैसले पर कांग्रेस की नाराजगी जताई है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में साल 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले पर आखिरकार एनआईए की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। तेरह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने इस मामले में शामिल सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दे दिया है। शुरुआत में इस केस में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान ही इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके चलते फैसला बाकी बचे 10 आरोपियों पर सुनाया गया।

हमले की पृष्ठभूमि

25 मई 2013 का वह दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए एक काला अध्याय साबित हुआ। बस्तर की झीरम घाटी से गुजर रहे कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा काफिले पर नक्सलियों ने सुनियोजित तरीके से घात लगाकर हमला बोल दिया था। इस हमले ने प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, केंद्र में मंत्री रह चुके विद्याचरण शुक्ल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षा में तैनात जवानों की जान ले ली थी। एक साथ इतने बड़े कद के नेताओं की मौत ने इस वारदात को देश की सबसे भयावह राजनीतिक हत्याओं में शुमार कर दिया।

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फैसले की पूरी जानकारी

विशेष एनआईए अदालत में न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने इस केस की सुनवाई की और अपने आदेश में पाया कि आरोपियों पर लगी सभी संगीन धाराएं साबित होती हैं, जिनमें 27 लोगों की जान लेने और 15 से ज्यादा लोगों की हत्या की कोशिश करने के आरोप शामिल थे। इस साल अगस्त महीने की 10, 11 और 12 तारीख को अदालत ने अंतिम बहस पूरी करवाई और उसके बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। शुरुआत में अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख मुकर्रर की थी, मगर बाद में इसे खिसकाकर 5 सितंबर कर दिया गया।

पूर्व मंत्री की प्रतिक्रिया

फैसला आने के बाद पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था, "इस फैसले से झीरम के शहीदों की आत्मा भी रो रही होगी।" डहरिया ने आरोप लगाया कि यह हमला भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था और इसे सुनियोजित टारगेट किलिंग बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस वारदात में 200 से ज्यादा नक्सली शामिल थे, जबकि सजा सिर्फ 10 लोगों को मिली है। उनके मुताबिक कांग्रेस पार्टी इस फैसले से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है।

सवाल-जवाब

झीरम घाटी हमला कब हुआ था?
यह हमला 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुआ था।
इस हमले में कौन-कौन मारे गए थे?
नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।
अदालत ने कितने आरोपियों को दोषी ठहराया है?
एनआईए की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है।
शुरुआत में कितने आरोपी थे?
शुरुआत में 11 आरोपी थे, लेकिन सुनवाई के दौरान एक की मौत हो गई थी।
फैसला किसने सुनाया?
विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने यह फैसला सुनाया।
फैसले की तारीख क्यों बदली गई?
फैसला पहले 31 अगस्त को सुनाया जाना था, जिसे बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया।
पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि इस फैसले से झीरम के शहीदों की आत्मा भी रो रही होगी और कांग्रेस पार्टी इससे संतुष्ट नहीं है।
क्या इस हमले में सिर्फ 10 लोग ही शामिल थे?
डहरिया के मुताबिक इस हमले में 200 से ज्यादा नक्सली शामिल थे, लेकिन सजा सिर्फ 10 लोगों को ही मिली है।
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