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जंतर-मंतर प्रदर्शन जांच समिति के पुनर्गठन की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, सीजेआई सूर्यकांत ने नाम सुझाने की कोशिश पर जताई असहमतिभारत
25 अग॰ 2026, 12:49 pm (37 दिन पहले)· 2

जंतर-मंतर प्रदर्शन जांच समिति के पुनर्गठन की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, सीजेआई सूर्यकांत ने नाम सुझाने की कोशिश पर जताई असहमति

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए बनी समिति को दोबारा गठित करने की मांग पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ी आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अलग से तुरंत सुनवाई के बजाय इस अर्जी को मुख्य याचिका के साथ ही सुना जाएगा।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए गठित हाई-पावर एनक्वायरी कमेटी (HPEC) के पुनर्गठन की मांग वाली अर्जी पर तीखी बहस देखने को मिली। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए इस अर्जी पर अलग से तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच समिति के पुनर्गठन की इस याचिका को जंतर-मंतर मामले से जुड़ी मुख्य याचिका के साथ ही सूचीबद्ध किया जाएगा।

जांच समिति के पुनर्गठन की मांग पर उठा विवाद

शीर्ष अदालत द्वारा गठित यह उच्चस्तरीय जांच समिति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस की कथित ज्यादतियों और प्रशासनिक कार्रवाई की जांच के उद्देश्य से बनाई गई थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने इस अर्जी का विशेष उल्लेख करते हुए इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस अनुरोध का कड़ा विरोध किया और अर्जी की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए।

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सॉलिसिटर जनरल की तीखी टिप्पणी और याचिकाकर्ता की सफाई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अर्जी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बेहद शरारतपूर्ण करार दिया। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने न केवल कमेटी के पुनर्गठन की मांग की है, बल्कि इसके लिए कुछ विशिष्ट नाम भी सुझाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अर्जी के जरिए यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि जांच समिति की अगुवाई कौन सा जज करे। अदालत में अपना पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है और यहां कुछ और ही करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके जवाब में वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल अर्जी को सूचीबद्ध कराने का अनुरोध करना था, जबकि इस पर अंतिम फैसला लेने का सर्वाधिकार अदालत के पास ही सुरक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अलग सुनवाई की मांग

मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी याचिका में विशिष्ट नामों का उल्लेख किए जाने पर असंतोष जताया। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अदालत को इस तरह अर्जी में जजों या सदस्यों के नामों का उल्लेख किया जाना बिल्कुल पसंद नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट पूरी क्षमता और निष्पक्षता के साथ मामले से जुड़े हर पहलू, बारीकियों और चिंताओं को ध्यान में रखकर काम करता है। अदालत ने यह भी कहा कि समिति की सहायता के लिए सभी पक्षों द्वारा दी जाने वाली उपयोगी जानकारियों और सुझावों पर विचार किया जाता है, लेकिन निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह अदालत के अधीन है। इस प्रकार शीर्ष अदालत ने अर्जी को अलग से तुरंत सुनने के बजाय मुख्य मामले के साथ ही टैग करने का आदेश जारी किया।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर समिति के पुनर्गठन से जुड़ी अर्जी पर क्या फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने समिति के पुनर्गठन वाली अर्जी पर अलग से तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और इसे मुख्य जंतर-मंतर मामले के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर क्या आपत्ति जताई?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका में जांच समिति की अगुवाई के लिए विशिष्ट नाम सुझाए गए हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
याचिकाओं में नाम सुझाने को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने क्या कहा?
प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत को याचिकाओं में जांच समितियों के लिए विशिष्ट नामों का उल्लेख किया जाना बिल्कुल पसंद नहीं है।
25 अगस्त 2026 की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष किसने रखा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन अदालत में पेश हुए।
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