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जोधपुर के भगत की कोठी लोको शेड में सुरक्षा मजबूत, 66 इंजनों में लगा कवच सिस्टमराजस्थान
25 अग॰ 2026, 11:15 am (31 दिन पहले)· 4

जोधपुर के भगत की कोठी लोको शेड में सुरक्षा मजबूत, 66 इंजनों में लगा कवच सिस्टम

जोधपुर के भगत की कोठी लोको शेड में सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत पांच महीने में आधे इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच प्रणाली स्थापित कर दी गई है और लोको फेलियर में भी गिरावट आई है।

जोधपुर स्थित रेलवे के भगत की कोठी लोको शेड में सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी क्षमताओं को उन्नत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले पांच महीनों के दौरान इस शेड में निर्धारित लक्ष्य के तहत आधे इलेक्ट्रिक इंजनों में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही विभिन्न तकनीकी सुधारों के कारण इंजनों के खराब होने के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। शेड के भीतर स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देते हुए जांच प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया गया है और करोड़ों रुपये के उपयोगी उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल करने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

कवच प्रणाली की स्थापना और विश्वसनीयता में सुधार

इस शेड के तहत आने वाले कुल 132 इलेक्ट्रिक इंजनों में से 66 यानी ठीक आधे इंजनों में कवच सुरक्षा प्रणाली को फिट किया जा चुका है। बाकी बचे हुए इंजनों में भी इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लगाने का काम तेजी से चल रहा है, जबकि भविष्य में तैयार होने वाले नए इलेक्ट्रिक इंजनों में यह सुविधा पहले से ही मौजूद होगी। इन तकनीकी बदलावों का सकारात्मक प्रभाव इंजनों की कार्यक्षमता और उनकी विश्वसनीयता पर साफ देखा जा सकता है। पिछले साल की समान अवधि के आंकड़ों से तुलना करें तो एचएचपी डीजल लोको के फेल होने के मामलों में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जबकि इलेक्ट्रिक लोको के फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड द्वारा तय किए गए लक्ष्यों की तुलना में डीजल लोको आउटेज में 21 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको आउटेज में 6 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

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स्वदेशी तकनीक से उपकरणों की जांच और संसाधनों का पुनरुपयोग

भगत की कोठी लोको शेड ने स्वदेशी तकनीक के आधार पर एक खास पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच तैयार की है जो तकनीकी नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस उपकरण की मदद से पिस्टन कूलिंग पाइपों को इंजन के अंदर फिट करने से पहले ही उनके ऑयल फ्लो और स्प्रे क्षमता की सटीक जांच कर ली जाती है। इससे किसी भी खराब या दोषपूर्ण पाइप का पता समय रहते चल जाता है और इंजन को होने वाले संभावित बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही शेड ने संसाधनों के सही इस्तेमाल पर जोर देते हुए करीब 4.73 करोड़ रुपये की कुल कीमत वाले 84 उपयोगी लोको उपकरणों को देश भर के अलग-अलग रेलवे शेडों, कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों को भेजा है। इसके अलावा पिछले तीन महीनों की अवधि में 10 इलेक्ट्रिक लोको के टीओएच और 11 एचएचपी डीजल लोको के महत्वपूर्ण अनुरक्षण शेड्यूल को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और जल की बचत के प्रयास

सुरक्षा और तकनीकी कार्यों के अलावा यह शेड पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लगातार नए प्रयास कर रहा है। यहाँ मौजूद कुल 181 इलेक्ट्रिक लोको में से 77 इंजनों में जलरहित यूरिनल स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे पानी की भारी बचत हो रही है और रखरखाव के काम को अधिक सुगम बनाने में सहायता मिल रही है। मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी का कहना है कि आधुनिक तकनीक, उच्च स्तर के रखरखाव और स्वदेशी नवाचारों के जरिए यह शेड रेलवे के सुरक्षा पहले के मूल संकल्प को पूरी मजबूती प्रदान कर रहा है। इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य पटरियों पर दौड़ने वाली ट्रेनों के संचालन को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है ताकि यात्रियों की यात्रा को और अधिक सुरक्षित किया जा सके।

सवाल-जवाब

भगत की कोठी लोको शेड में कितने इंजनों में कवच सिस्टम लगाया गया है?
पाँच महीने के भीतर निर्धारित 132 में से 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच सुरक्षा प्रणाली फिट की जा चुकी है।
लोको फेलियर के मामलों में कितने प्रतिशत की कमी आई है?
पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में एचएचपी डीजल लोको फेलियर में 40 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।
पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच का क्या उपयोग है?
इसके जरिए पिस्टन कूलिंग पाइपों को इंजन में फिट करने से पहले उनकी ऑयल फ्लो और स्प्रे क्षमता की जांच की जाती है जिससे खराब पाइपों की पहचान पहले ही हो जाती है।
कितनी कीमत के उपयोगी लोको उपकरण अन्य इकाइयों को दिए गए हैं?
शेड द्वारा 4.73 करोड़ रुपये मूल्य के 84 उपयोगी लोको उपकरण विभिन्न रेलवे शेडों और कार्यशालाओं को उपलब्ध कराए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

भगत की कोठी लोको शेड का यह तकनीकी कायापलट भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सुरक्षा प्राथमिकताओं को एक नया आयाम देता है। 66 इंजनों में 'कवच' प्रणाली का सफल एकीकरण और फेलियर दरों में 40 प्रतिशत तक की गिरावट यह साबित करती है कि स्वदेशी तकनीक और संसाधन पुनर्चक्रण से बड़े पैमाने पर वित्तीय और परिचालन संबंधी सुधार संभव हैं। आगे चलकर, यह मॉडल देश के अन्य रेलवे शेडों के लिए आधुनिक रखरखाव और हरित पहलों का एक मानक बन सकता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

भगत की कोठी लोको शेड में 'कवच' का त्वरित कार्यान्वयन और इंजनों के फेलियर में आई गिरावट इस बात का प्रमाण है कि सरकारी नीतियां जब ज़मीनी स्तर पर नवाचार से जुड़ती हैं, तो सुरक्षा और आर्थिक दक्षता दोनों मजबूत होती हैं। पी-पाइप फ्लो टेस्ट जैसी स्वदेशी पहलें और जल संरक्षण के उपाय यह दर्शाते हैं कि भारतीय परिवहन क्षेत्र अब केवल परिचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक शासन और संसाधन प्रबंधन में भी आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

भगत की कोठी लोको शेड में कवच प्रणाली का तेजी से विस्तार और स्वदेशी जाँच तकनीकों का उपयोग रेल सुरक्षा को पुख्ता करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। इंजनों के फेल होने के मामलों में आई गिरावट यह साबित करती है कि तकनीकी उन्नयन और समय पर रखरखाव से सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा सीधे तौर पर मजबूत होती है। आने वाले समय में सभी बचे हुए इंजनों में इस प्रणाली के लागू होने से रेल हादसों की आशंकाओं को न्यूनतम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

भगत की कोठी लोको शेड में कवच प्रणाली के विस्तार और स्वदेशी तकनीक से तैयार 'पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच' जैसे नवाचार यह दर्शाते हैं कि निवारक रखरखाव (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने में कितना प्रभावी हो सकता है। इंजनों के फेलियर में 40 प्रतिशत तक की गिरावट और करोड़ों रुपये के उपकरणों का पुनरुपयोग इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी आधुनिकीकरण और संसाधन प्रबंधन से रेलवे न केवल हादसों की आशंकाओं को कम कर रहा है, बल्कि परिचालन दक्षता को भी नए स्तर पर ले जा रहा है।

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