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जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में चार सौ पचास कैमरों से पहरा, सुरक्षा और निगरानी हुई मजबूतराजस्थान
29 अग॰ 2026, 10:29 am (27 दिन पहले)· 2

जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में चार सौ पचास कैमरों से पहरा, सुरक्षा और निगरानी हुई मजबूत

जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए चार सौ पचास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से चोरी रोकने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और भटके हुए परिजनों को खोजने में बड़ी मदद मिल रही है।

राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक के दायरे में ला दिया गया है। चिकित्सा संस्थान के पूरे परिसर में कुल चार सौ पचास सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए गए हैं। ये उपकरण अब केवल साधारण निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसी भी अप्रिय वाकये की तह तक जाने और प्रशासनिक कामकाज को सुचारू चलाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।

अस्पताल के हर कोने पर पैनी नजर

संस्थान के विभिन्न हिस्सों को इन कैमरों के दायरे में रखा गया है ताकि कोई भी कोना अछूता न रहे। मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों पर विशेष लेंस लगाए गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन इकाई, बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी ब्लॉक, दुर्घटना चिकित्सा केंद्र, वाहन पार्किंग स्थल और मरीजों के आने-जाने के सभी प्रमुख गलियारे इन उपकरणों से पूरी तरह लैस हैं। इन कैमरों की चौबीसों घंटे चलने वाली रिकॉर्डिंग को किसी भी विवाद या दुर्घटना के वक्त डिजिटल सबूत के तौर पर उपयोग में लाया जाता है।

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अपराध और चोरियों पर कसेगा शिकंजा

जोधपुर संभाग का यह सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र होने के कारण यहां हर दिन हजारों की संख्या में रोगी और उनके तीमारदार पहुंचते हैं। इस भारी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर कई बार शातिर चोर और जेबकतरे मोबाइल, पर्स या पार्किंग में खड़े वाहनों पर हाथ साफ करने की कोशिश करते हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने में यह तकनीकी पहरा बेहद कारगर साबित हो रहा है। वारदात होने पर सुरक्षा कर्मी फुटेज की मदद से संदिग्ध का हुलिया और उसका आने-जाने का रास्ता आसानी से ट्रेस कर लेते हैं, जिससे पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

परिजनों के बिछड़ने पर तुरंत मिलती है मदद

संस्थान का दायरा काफी बड़ा होने के कारण ग्रामीण इलाकों से आने वाले कई बार बुजुर्ग या छोटे बच्चे भीड़भाड़ में अपनों से बिछड़ जाते हैं। ऐसे संकट के समय केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से फुटेज खंगालकर भटके हुए व्यक्ति की आखिरी लोकेशन का पता लगाया जाता है। यह तकनीक प्रशासन के लिए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का एक संवेदनशील और प्रभावी माध्यम बन चुकी है।

केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से होती है सीधी निगरानी

इन सभी चार सौ पचास कैमरों को एक मुख्य नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है, जहां कर्मियों की टीम हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए रखती है। अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर विकास राजपुरोहित खुद नियंत्रण कक्ष पहुंचकर इस पूरी प्रणाली की समीक्षा करते हैं। इस हाइटेक निगरानी का एक अन्य फायदा यह भी मिला है कि चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों और अन्य सहायक कर्मचारियों की कार्यस्थल पर उपस्थिति और अनुशासन पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा रहा है।

पुलिस जांच के लिए बन रहे हैं ठोस सबूत

परिसर में किसी भी तरह की संदिग्ध स्थिति या कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर पुलिस और अस्पताल प्रशासन के लिए ये फुटेज सबसे मजबूत प्रमाण साबित हो रहे हैं। संदिग्धों के आने से लेकर जाने तक का पूरा घटनाक्रम इन रिकॉर्डिंग्स के जरिए आसानी से समझा जा सकता है। यही कारण है कि यह निगरानी तंत्र अब संस्थान की सुरक्षा और आपराधिक मामलों की जांच का एक मजबूत आधार बन गया है।

सवाल-जवाब

एमडीएम अस्पताल में कुल कितने सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं?
अस्पताल परिसर में लगभग चार साढ़े चार सौ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
इन कैमरों की निगरानी कहाँ से की जाती है?
सभी कैमरों को एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है जहाँ से चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है।
इन कैमरों से किस तरह की वारदतों को रोकने में मदद मिलती है?
इनसे बाइक चोरी, मोबाइल चोरी, जेबकतरे की गतिविधियों और परिसर में भटकने वाले लोगों को ढूँढने में मदद मिलती है।
अस्पताल में निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कौन करता है?
अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित खुद नियंत्रण कक्ष जाकर मॉनिटरिंग व्यवस्था की समीक्षा करते हैं।
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