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जोधपुर मंडल ने पांच महीनों में बनाई 19.94 लाख यूनिट सौर बिजली, पिछले साल का 87.5% रिकॉर्ड पारराजस्थान
20 सित॰ 2026, 8:47 pm (4 दिन पहले)· 0

जोधपुर मंडल ने पांच महीनों में बनाई 19.94 लाख यूनिट सौर बिजली, पिछले साल का 87.5% रिकॉर्ड पार

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही 19.94 लाख यूनिट सौर ऊर्जा पैदा कर ली है, जो पिछले पूरे वित्त वर्ष के कुल उत्पादन का 87.5 प्रतिशत है।

पश्चिमी राजस्थान में प्रचुर मात्रा में मिलने वाली धूप को उत्तर पश्चिम रेलवे का जोधपुर मंडल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए प्रभावी साधन बना रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अगस्त तक महज पांच महीनों में मंडल ने करीब 19.94 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन दर्ज किया है। सौर ऊर्जा का यह आंकड़ा दिखाता है कि रेलवे परिसरों में हरित ऊर्जा का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पिछले पूरे साल के आंकड़े के बेहद करीब पहुंचा उत्पादन

विगत वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे बारह महीनों में जोधपुर मंडल ने कुल 22.79 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया था। इसके विपरीत, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में केवल पांच महीनों (अगस्त तक) की अवधि में ही 19.94 लाख यूनिट बिजली बनाई जा चुकी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले पूरे साल में तैयार की गई कुल सौर ऊर्जा का लगभग 87.5 प्रतिशत हिस्सा रेलवे ने चालू वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही अर्जित कर लिया है, जो उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय उछाल को दर्शाता है।

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स्वच्छ ऊर्जा से पूरी हो रहीं प्रमुख रेलवे परिसरों की जरूरतें

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी दी कि सौर ऊर्जा उत्पादन में दर्ज की जा रही यह तेज बढ़ोतरी अक्षय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी राजस्थान के इस पूरे इलाके में साल भर प्रचुर धूप उपलब्ध रहती है, जिसका रेलवे योजनाबद्ध तरीके से भरपूर दोहन कर रहा है। इससे रेलवे के कुल ऊर्जा उपभोग में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है।

जोधपुर मंडल के विशाल रेलवे परिसरों, कार्यालयों, वर्कशॉप और स्टेशनों पर दिन-रात भारी मात्रा में विद्युत आपूर्ति की निरंतर आवश्यकता रहती है। इस स्थिति में इन परिसरों में लगे रूफटॉप और अन्य सोलर संयंत्रों से उत्पन्न होने वाली बिजली रेलवे की अपनी आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में बड़ा योगदान दे रही है। सौर ऊर्जा से आपूर्ति सुनिश्चित होने के कारण पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता में तेजी से गिरावट आ रही है, जिससे उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिक टिकाऊ उपयोग संभव हुआ है।

लागत में कमी और यात्री सुविधाओं में निवेश की उम्मीद

हरित ऊर्जा के इस व्यापक इस्तेमाल से रेलवे के नियमित बिजली बिल खर्च में भी भारी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। बिजली पर होने वाली इस वित्तीय बचत का सीधा लाभ रेलवे तंत्र को सुदृढ़ बनाने में मिलेगा। बचाए गए राजस्व और संसाधनों को रेल संचालन के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के विकास और विस्तार से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से लगाया जा सकेगा।

102 स्थानों पर सोलर पैनल सक्रिय, तीन नई साइटों पर काम तेज

जोधपुर मंडल के भीतर स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अब तक कुल 102 विभिन्न स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से जोधपुर स्टेशन, भगत की कोठी स्टेशन, भगत की कोठी डीजल शेड, मेड़ता रोड स्टेशन तथा मेड़ता रोड डेमू शेड जैसे व्यस्त और बड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन 102 स्थानों पर सौर ऊर्जा का नियमित उत्पादन चल रहा है। इसके अतिरिक्त मंडल के तीन अन्य नए स्थानों पर सोलर पैनल की कमीशनिंग की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है, जिसके चालू होते ही उत्पादन क्षमता में और अधिक इजाफा होगा।

सवाल-जवाब

जोधपुर मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक कितनी सौर ऊर्जा का उत्पादन किया है?
मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक लगभग 19.94 लाख यूनिट सौर बिजली तैयार की है।
चालू वर्ष का उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले कैसा रहा है?
पिछले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 22.79 लाख यूनिट उत्पादन हुआ था, जिसका करीब 87.5 प्रतिशत हिस्सा चालू वर्ष के पहले पांच महीनों में ही हासिल कर लिया गया है।
जोधपुर मंडल में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए कौन से प्रमुख स्थान शामिल हैं?
जोधपुर स्टेशन, भगत की कोठी स्टेशन, भगत की कोठी डीजल शेड, मेड़ता रोड स्टेशन और मेड़ता रोड डेमू शेड प्रमुख उत्पादक केंद्रों में शामिल हैं।
मंडल में कितने स्थानों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं?
कुल 102 स्थानों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और तीन अन्य स्थानों पर कमीशनिंग का कार्य प्रगति पर है।
सौर ऊर्जा में बढ़ोतरी से रेलवे को क्या मुख्य लाभ मिलेगा?
इससे पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता घटेगी, बिजली के खर्च में कमी आएगी और बचत का उपयोग यात्री सुविधाओं व संचालन में किया जा सकेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·4 दिन पहले

जोधपुर मंडल का यह सौर ऊर्जा की दिशा में बढ़ता कदम केवल रेलवे के लिए ही नहीं, बल्कि फिल्म उद्योग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। राजस्थान, विशेषकर जोधपुर, हमेशा से बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा की शूटिंग का एक बड़ा केंद्र रहा है। आजकल फिल्म निर्माण में 'ग्रीन फिल्ममेकिंग' और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रेलवे द्वारा स्वच्छ ऊर्जा का यह विस्तार फिल्म यूनिट्स के परिवहन और लॉजिस्टिक्स को पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद करेगा, जिससे इस क्षेत्र में इको-फ्रेंडली सिनेमा पर्यटन को एक नया बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

यह रिपोर्ट केवल रेलवे की तकनीकी सफलता को नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति के विकेंद्रीकरण को दर्शाती है। राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए नेट-जीरो और हरित ऊर्जा लक्ष्यों को जब जोनल और डिवीजनल स्तर पर इस तरह लागू किया जाता है, तभी वास्तविक नीतिगत बदलाव दिखते हैं। जोधपुर मंडल का यह मॉडल यह भी दिखाता है कि कैसे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाकर सरकारी विभाग अपने परिचालन खर्चों को कम कर सकते हैं। इस वित्तीय बचत का सीधा उपयोग यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाना सुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, वित्तीय विश्लेषण के नज़रिए से यह मॉडल बेहद महत्वपूर्ण है। जोधपुर मंडल ने यह साबित किया है कि सौर ऊर्जा को अपनाकर कैसे परिचालन लागत (OPEX) को नियंत्रित किया जा सकता है। रेलवे जैसे भारी ऊर्जा खपत वाले उपक्रमों के लिए बिजली खर्च एक बड़ा वित्तीय बोझ होता है। जब कोई मंडल पाँच महीनों में ही पिछले वर्ष के करीब का उत्पादन हासिल कर ग्रिड पर निर्भरता कम करता है, तो वह सीधे अपने बजट को मजबूत करता है। यह बची हुई पूंजी बुनियादी ढांचे के विकास और यात्री सुविधाओं के लिए 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' (CAPEX) में तब्दील होगी, जो दीर्घकालिक आर्थिक संधारणीयता को बढ़ावा देगी।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा सौर ऊर्जा का यह विकेंद्रीकृत उपयोग सार्वजनिक नीति और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है। यह न केवल पारंपरिक ग्रिड पर निर्भरता को कम करता है, बल्कि सरकारी खजाने पर वित्तीय भार भी घटाता है, जिससे बचे हुए बजट को यात्री सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं में लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल रेल नेटवर्क वाले राज्यों में भी इसी तरह के क्षेत्रीय सौर मॉडलों को लागू कर रेलवे अपने कार्बन-तटस्थता के लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकता है। शासन और बुनियादी ढांचे के स्तर पर यह एक स्थायी सुधार है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नजरिए से, रेलवे परिसरों का आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल बेहद महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा से मिलने वाली निरंतर बिजली आपूर्ति स्टेशनों, यार्डों और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों, प्रकाश व्यवस्था और आपातकालीन संचार प्रणालियों को ग्रिड फेल होने की स्थिति में भी चालू रखेगी। इससे रात के समय होने वाले अपराधों, चोरी और महिला सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। सुरक्षित और उजले रेलवे परिसर अपराधियों के हौसले पस्त करते हैं, जिससे रेल यात्रा और अधिक सुरक्षित बनती है।

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