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जोरहाट में AN-32 क्रैश: एक दशक में चौथा बड़ा हादसा, जानें इस ट्रांसपोर्ट विमान का दुर्घटनाओं से भरा रिकॉर्डभारत
13 जून 2026, 12:50 pm (46 दिन पहले)· 0

जोरहाट में AN-32 क्रैश: एक दशक में चौथा बड़ा हादसा, जानें इस ट्रांसपोर्ट विमान का दुर्घटनाओं से भरा रिकॉर्ड

असम के जोरहाट में IAF का AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होकर आग की चपेट में आ गया। यह 2016 से अब तक इस विमान का चौथा बड़ा हादसा है, जिनमें से पिछले तीन में 42 लोगों की जान गई।

शनिवार को असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना (IAF) के एक AN-32 परिवहन विमान का लैंडिंग के वक्त नियंत्रण खो जाने से यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमान दो हिस्सों में टूट गया और उसमें आग भड़क उठी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में विमान के पायलट की जान जाने की आशंका है, हालांकि विमान में कितने लोग सवार थे और उनकी क्या स्थिति है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वायुसेना की रीढ़ माना जाने वाला विमान

AN-32 को भारतीय वायुसेना के बेड़े का सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमान कहा जाता है। दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक रसद, हथियार और जवानों को पहुंचाने की जिम्मेदारी अक्सर इसी विमान के कंधों पर रहती है। पूर्वोत्तर, लद्दाख और ऊंचाई वाले मोर्चों पर तो इसे वायुसेना की रीढ़ ही माना जाता है, जहां दूसरे विमानों के लिए उतरना-उड़ना आसान नहीं होता।

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दुर्घटनाओं से जुड़ा लंबा सिलसिला

भरोसे के बावजूद इस विमान का अतीत हादसों से अछूता नहीं रहा है। उपलब्ध आंकड़ों की मानें तो साल 1986 से लेकर अब तक भारत में AN-32 से जुड़े करीब 22 हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। अगर सिर्फ बीते एक दशक यानी 2016 से 2026 के बीच की बात करें, तो जोरहाट की यह घटना इस विमान के साथ चौथा बड़ा हादसा है। इससे पहले के तीन बड़े हादसों में कुल 42 जवान और सैन्यकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं।

बंगाल की खाड़ी में समा गया विमान, सभी 29 की मौत

इस सिलसिले की सबसे दर्दनाक कड़ी 22 जुलाई 2016 को जुड़ी। उस दिन चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा AN-32 विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर अचानक रडार से गायब हो गया। विमान में 29 लोग सवार थे। लंबे और व्यापक खोज अभियान के बाद भी किसी को जीवित नहीं बचाया जा सका और सभी 29 लोगों की मौत हो गई। इसका मलबा करीब आठ साल बाद, 2024 में समुद्र की गहराई में जाकर मिला, लेकिन हादसा आखिर क्यों हुआ, यह सवाल आज भी अनसुलझा है।

2019 में जोरहाट से उड़ान भरते ही हुआ था लापता

इसके तीन साल बाद 3 जून 2019 को एक और AN-32 विमान असम के जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के लिए रवाना हुआ और कुछ ही देर में संपर्क से बाहर हो गया। कई दिनों की कड़ी तलाश के बाद इसका मलबा तातो क्षेत्र की पहाड़ियों में मिला। इस हादसे में विमान पर सवार सभी 13 वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी। पूर्वोत्तर में हुए सबसे दुखद सैन्य विमान हादसों में इसकी गिनती होती है।

बागडोगरा में बाल-बाल बचे थे जवान

तीसरा बड़ा वाकया 7 मार्च 2025 को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पर पेश आया। यहां लैंडिंग के दौरान AN-32 विमान रनवे से फिसलते हुए आगे निकल गया, यानी ओवरशूट कर गया। इस घटना में विमान को भारी नुकसान जरूर पहुंचा, लेकिन राहत की बात यह रही कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बच निकले और किसी की जान नहीं गई।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम है जोरहाट एयरबेस

जिस रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर ताजा हादसा हुआ, वह वायुसेना के लिहाज से बेहद अहम ठिकाना है। पूर्वोत्तर भारत में सैन्य अभियानों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आपातकालीन एयर ऑपरेशन के लिहाज से यह एक प्रमुख केंद्र है। चीन सीमा से नजदीकी और पूर्वोत्तर के संवेदनशील इलाकों की वजह से इस एयरबेस की रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।

जांच के आदेश, अभी साफ नहीं हादसे की वजह

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ, मौसम की मार के चलते या किसी और कारण से। वायुसेना की तकनीकी टीम दुर्घटनास्थल की जांच में जुटी है। पूरे मामले की गहराई से पड़ताल के लिए वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) के आदेश दे दिए हैं।

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