लोकसभा ने देश में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। संसद में सरकार और विपक्ष के बीच हुई लंबी चर्चा और तीखी बहस के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक को हरी झंडी मिली।
पेपर लीक विरोधी कानून के कड़े प्रावधान और सजा
नया कानून परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले अपराधियों और संगठित गिरोहों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले आरोपियों को 10 साल तक की जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य देश में सक्रिय पेपर लीक इकोसिस्टम को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।
राजनाथ सिंह ने विधेयक पास होने पर जताई खुशी
सदन से विधेयक पारित होने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यापक बहस के बाद लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 का पारित होना भारत की परीक्षा प्रणाली की अखंडता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही उन्होंने चर्चा में भाग लेने वाले सभी सांसदों और राजनीतिक दलों का आभार भी व्यक्त किया।
संसद में जोरदार हंगामा और विपक्षी नेताओं के सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान संसद में जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा छात्र आंदोलनों और परीक्षा धांधली से जुड़े मुद्दों को उठाए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई। विपक्ष ने कानून के क्रियान्वयन और छात्रों के हितों से जुड़े कई सवाल खड़े किए, हालांकि हंगामे के बीच सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा में पास करा लिया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस विधेयक के पारित होने पर आम जनता और अभ्यर्थियों की ओर से मिला-जुला फीडबैक देखने को मिल रहा है। जहां कई लोगों ने कड़े कानून और भारी जुर्माने का स्वागत किया है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि केवल सजा बढ़ा देने से समस्या हल नहीं होगी बल्कि परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

























