सोशल मीडिया पर प्रैंक वीडियो देखकर लोगों को बेवकूफ बनाने की एक अजीबोगरीब घटना तमिलनाडु के सलेम जिले से सामने आई है। अट्टूर तालुक में एक 39 वर्षीय शख्स ने खुद को राजस्व विभाग का वरिष्ठ तहसीलदार बताकर ग्रामीणों को अपने जाल में फंसाया। उसने एक खतरनाक संक्रामक बीमारी का खौफ दिखाकर और सरकारी आर्थिक सहायता का लालच देकर इलाके की लगभग 20 महिलाओं को सिर मुंडवाने के लिए तैयार कर लिया। इस फर्जी दावे पर भरोसा करके तीन बुजुर्ग महिलाओं ने तुरंत सैलून जाकर अपना मुंडन करा लिया। जब कई दिनों के इंतजार के बाद भी उनके खातों में कोई धनराशि जमा नहीं हुई, तो इस बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।
फर्जी प्रशासनिक एडवाइजरी और नकद इनाम का झांसा
अट्टूर पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने सबसे पहले इलाके की एक स्थानीय महिला से मोबाइल पर संपर्क साधा था। उसने बातचीत के दौरान खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए दावा किया कि विदेशों से एक नया और जानलेवा संक्रमण भारत में प्रवेश कर चुका है। उसने पीड़ित महिला को डराते हुए कहा कि यह वायरस मुख्य रूप से इंसान के बालों के माध्यम से फैलता है। संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य सरकार ने आपातकालीन स्वच्छता अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सिर मुंडवाने वाले नागरिकों को वित्तीय प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
आरोपी ने योजना का ब्योरा देते हुए बताया कि बाल कटवाने या मुंडन कराने वाली महिलाओं को 15 हजार रुपये, पुरुषों को 6 हजार रुपये और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को 45 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। पीड़ितों को जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर करने के लिए उसने यह अफवाह भी फैलाई कि पूरे तालुक के लिए सिर्फ 18 विशेष टोकन मंजूर किए गए हैं। अपनी बातों पर यकीन दिलाने के लिए आरोपी ने व्हाट्सएप पर पहले से मुंडन करा चुकी महिलाओं की फर्जी तस्वीरें और 500 रुपये के नोटों के बंडल की फोटो भेजीं, जिससे महिलाओं को लगा कि यह एक असली सरकारी पहल है।
बुजुर्ग महिलाओं का मुंडन और धोखाधड़ी का खुलासा
सरकारी योजना का लाभ उठाने की होड़ में स्थानीय महिला ने अपने पड़ोस की लगभग 20 अन्य महिलाओं को इस अभियान से जुड़ने के लिए राजी कर लिया। इनमें से 63 वर्षीय चित्रा, 62 वर्षीय रामायी और 64 वर्षीय कावेरी नाम की तीन बुजुर्ग महिलाओं ने बिना देर किए पास के सैलून पहुंचकर अपना मुंडन करवा लिया। अन्य कई महिलाएं भी अपना सिर मुंडवाने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थीं।
हालांकि, जब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी भी पीड़ित महिला के बैंक खाते में वादा की गई रकम ट्रांसफर नहीं हुई, तो महिलाओं में संदेह पैदा हुआ। उन्होंने जब आरोपी के मोबाइल नंबर पर कॉल करने की कोशिश की, तो उसका फोन लगातार बंद मिला। धोखाधड़ी की आशंका होने पर सभी महिलाएं अट्टूर तहसील कार्यालय पहुंचीं और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। तहसील अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ऐसी कोई योजना, मुंडन अभियान या बीमारी से जुड़ी एडवाइजरी कभी जारी नहीं की गई है।
इंस्टाग्राम प्रैंक का जूनून और पुलिस की कार्रवाई
ठगी का अहसास होते ही पीड़ित महिलाओं ने अट्टूर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी सर्विलांस के आधार पर आरोपी को ट्रैक किया और अरियालुर जिले के जयंकोंडम तालुक निवासी 39 वर्षीय सतीशकुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान सतीशकुमार ने स्वीकार किया कि वह इंस्टाग्राम पर वायरल होने वाले प्रैंक वीडियो से काफी प्रभावित था और असल जिंदगी में लोगों को बेवकूफ बनाकर मज़ाक करना चाहता था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी रैंडम मोबाइल नंबरों पर कॉल करता था और बातचीत के दौरान सामने वाले की निजी जानकारियां जुटाकर उन्हें झूठे वादों में फंसा देता था। काम होने के बाद वह अपना सिम कार्ड और मोबाइल फोन बंद कर लेता था। पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि सतीशकुमार ने सलेम के अलावा अन्य किन जिलों में इस तरह के फर्जी कॉल करके लोगों को निशाना बनाया है। उल्लेखनीय है कि यह घटना तमिल सिनेमा की प्रसिद्ध फिल्म सिरुथाई के एक हास्य दृश्य की याद दिलाती है, जिसमें अभिनेता कार्ती और कॉमेडियन संथानम पैसे कमाने के उद्देश्य से लोगों को मुंडन कराने के लिए उकसाते हैं।


















