राजस्थान का ऐतिहासिक और औद्योगिक शहर पाली सिर्फ अपने कपड़ा व्यापार और समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहाँ की रसोई से उठने वाली खुशबू भी अब देश-विदेश में अपनी धाक जमा चुकी है। इस स्वाद के जादूगर हैं कलीम अख्तर, जिनके हाथ के बने लजीज व्यंजनों के मुरीद बॉलीवुड के दिग्गज सितारे भी हैं। 'ही-मैन' के नाम से मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र से लेकर हिंदी सिनेमा के 'दबंग' सलमान खान तक, हर कोई कलीम के हाथों के जायके का प्रशंसक रहा है। एक बेहद साधारण और छोटे से रेस्टोरेंट से शुरू हुआ कलीम अख्तर का यह सफर आज मायानगरी मुंबई के गलियारों और सिनेमाई सितारों के दिलों तक जा पहुँचा है। उनके इस सफर में कई दिलचस्प मोड़ आए, जिसमें जेल में बंद एक सुपरस्टार को खाना खिलाने से लेकर खुद की ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाने तक की असाधारण कहानियाँ शामिल हैं।
रज़ा मुराद बने मुंबई की राह का जरिया
कलीम अख्तर का बॉलीवुड के साथ जुड़ाव किसी फिल्मी पटकथा की तरह ही बेहद रोमांचक और अप्रत्याशित रहा है। उनके इस जादुई सफर की शुरुआत में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब हिंदी फिल्मों के जाने-माने चरित्र अभिनेता रज़ा मुराद एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में राजस्थान के पाली जिले में आए हुए थे। शूटिंग के व्यस्त कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कलीम अख्तर के यहाँ का बना हुआ भोजन चखा। भोजन का स्वाद इतना लाजवाब और विशिष्ट था कि रज़ा मुराद इसके पूरी तरह दीवाने हो गए। कलीम के हाथों की इस कला से प्रभावित होकर उन्होंने कलीम को मुंबई आने और वहाँ अपनी किस्मत आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। रज़ा मुराद की इस मदद और सलाह ने कलीम अख्तर के लिए फिल्म जगत के सबसे बड़े सितारों के घरों और रसोई के दरवाज़े खोल दिए, जिससे उनका नाम धीरे-धीरे पूरी इंडस्ट्री में फैल गया।
जोधपुर जेल में सलमान खान को खाना खिलाने का दावा
कलीम अख्तर के जीवन का सबसे चर्चित और हैरान करने वाला वाकया अभिनेता सलमान खान से जुड़ा हुआ है। जब मशहूर कांकाणी हिरण शिकार मामले में कानूनी कार्यवाही के बाद सलमान खान को जोधपुर की प्रसिद्ध रातानाडा जेल में बंद किया गया था, तब कलीम अख्तर ने एक बेहद साहसी कदम उठाया था। कलीम अख्तर का यह दावा है कि वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कड़े सुरक्षा घेरे को पार करते हुए जेल परिसर के भीतर प्रवेश किया था और सलमान खान को अपने हाथ का बना भोजन परोसा था। कलीम का कहना है कि जब कोई भी सलमान तक पहुँचने की स्थिति में नहीं था, तब उन्होंने जेल जाकर अभिनेता को स्वादिष्ट और गरमा-गरम खाना खिलाया था। कलीम का यह किस्सा आज भी स्थानीय लोगों और सिनेमा प्रेमियों के बीच बड़े चाव से सुना और सुनाया जाता है।
सिनेमा का जुनून और सुपरहिट राजस्थानी फिल्म
कलीम अख्तर केवल मसालों के साथ जादू बिखेरने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके भीतर सिनेमा के प्रति एक गहरा और अटूट लगाव भी छुपा हुआ था। बचपन के दिनों से ही उनके मन में बड़े पर्दे पर कुछ बड़ा करने और सिनेमाई दुनिया का हिस्सा बनने का एक बड़ा सपना पलता आ रहा था। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए कलीम ने अपने स्कूल के दिनों के पुराने और भरोसेमंद दोस्तों, पूनम और दीपक मेहता के साथ हाथ मिलाया। उन्होंने अपने खुद के बैनर के तहत एक राजस्थानी क्षेत्रीय फिल्म का निर्माण किया, जिसका शीर्षक था 'शिकारी रो भायो भिखारी'। यह फिल्म पाली के लोकप्रिय 'मंथर सिनेमा' में रिलीज हुई और इतिहास रच दिया। यह फिल्म लगातार सत्रह दिनों तक पूरी तरह हाउसफुल रही, जिससे इस सिनेमाघर में टिकट खिड़की पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट गए।
अपने काम के प्रति इसी बेपनाह मोहब्बत को बयां करते हुए कलीम अख्तर ने कहा, "मसाला तो सब डालते हैं सर, हम खाने में मोहब्बत डालते हैं।" कलीम अख्तर का यह सफर साबित करता है कि अगर इंसान के पास हुनर हो और उसमें अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा हो, तो वह एक छोटे से कस्बे से निकलकर भी आसमान की ऊंचाइयों को छू सकता है।



















