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कैलाश मानसरोवर वीडियो पर चीनी दूतावास की पोस्ट से भड़का सोशल मीडिया, तिब्बत का मुद्दा फिर छायाभारत
13 जुल॰ 2026, 1:02 am (35 दिन पहले)· 2

कैलाश मानसरोवर वीडियो पर चीनी दूतावास की पोस्ट से भड़का सोशल मीडिया, तिब्बत का मुद्दा फिर छाया

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने कैलाश मानसरोवर यात्रा का वीडियो शेयर कर दिलों के करीब आने की उम्मीद जताई, जिसके बाद भारतीय सोशल मीडिया पर तिब्बत और सीमा विवाद को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।

कैलाश मानसरोवर यात्रा सदियों से भारतीय आस्था और श्रद्धा के केंद्र में रही है, लेकिन इस बार यह यात्रा भू-राजनीति और डिजिटल कूटनीति की चर्चा का विषय बन गई है। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यात्रा से जुड़ा एक वीडियो साझा किया और साथ में लिखा कि आशा है यह यात्रा दिलों को करीब लाए। यह पोस्ट यू जिंग के हैंडल चाइना स्पॉक्स इंडिया से 12 जुलाई 2026 को आई और देखते ही देखते भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के बीच एक नई बहस छिड़ गई। किसी नपे तुले कूटनीतिक बयान की तरह दिखने वाला यह संदेश असल में भारत और चीन के बीच के पुराने और उलझे हुए रिश्तों की परतें फिर से खोलता नजर आया।

कुछ यूजर्स ने जताया सहयोग का भरोसा

पोस्ट पर आई प्रतिक्रियाओं में एक तबका ऐसा भी रहा जिसने भारत और चीन के बीच नजदीकी और सहयोग की खुलकर वकालत की। पीयूष कुमार यादव नाम के एक यूजर ने लिखा कि भारत और चीन को निश्चित रूप से मिलकर करीब से काम करना चाहिए। उनका कहना था कि यह दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर सकते हैं और एक नई वैश्विक व्यवस्था यानी न्यू वर्ल्ड ऑर्डर खड़ी कर सकते हैं, जिसमें विकासशील देशों की आवाज को ज्यादा तवज्जो मिले।

वहीं अभिनव आलोक नाम के यूजर ने इस पूरे मसले को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नजरिए से देखने की कोशिश की। उनका तर्क था कि भारत और चीन को पश्चिम की उस सोच में नहीं फंसना चाहिए, जिसे थ्यूसिडाइड्स ट्रैप कहा जाता है, यानी वह हालात जहां एक उभरती हुई ताकत और एक पहले से स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव लगभग तय मान लिया जाता है। उनके मुताबिक भारत, चीन और समूचे पूर्व यानी एशियाई सभ्यता की सोच पश्चिमी सोच से बुनियादी तौर पर अलग है, इसलिए दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं और उन्हें किसी पुरानी पश्चिमी थ्योरी के हिसाब से आपस में लड़ने की जरूरत नहीं है।

तिब्बत के मुद्दे पर तीखा पलटवार

इसके उलट बड़ी संख्या में यूजर्स ने चीन की इस सॉफ्ट डिप्लोमेसी को सिरे से खारिज करते हुए तिब्बत और सीमा विवाद जैसे संवेदनशील और असली मुद्दे सामने ला दिए। डॉ. राहुल तिवारी ने इस पूरी बहस में सबसे आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ लिखा कि तिब्बत और तिब्बती लोग पहले से ही भारत के बेहद करीब हैं, बल्कि हकीकत में वे भारत में ही रह रहे हैं, जबकि चीन ने तिब्बत पर कब्जा तो कर रखा है, फिर भी वह तिब्बत की असली भावना और लोगों से कोसों दूर है। अपनी बात को और धार देने के लिए उन्होंने फ्रीतिब्बत जैसे हैशटैग का सहारा लिया, जो सीधे तौर पर चीन के सबसे संवेदनशील और असहज मुद्दे पर उंगली रखता है।

क्या कहती है यह पूरी बहस

इस पूरे सोशल मीडिया रिएक्शन से एक बात बिल्कुल साफ झलकती है कि भारतीय जनता अब सिर्फ मीठी मीठी कूटनीतिक बातों से प्रभावित नहीं होती। एक तबका आर्थिक सहयोग और वैश्विक मंचों पर साझेदारी की संभावनाओं को समझता और उसका स्वागत करता है, तो दूसरा और बड़ा तबका तिब्बत की स्वायत्तता छिनने और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर चीन के लगातार आक्रामक रवैये को लेकर बेहद सतर्क और नाराज नजर आता है। यही वजह है कि यू जिंग की देखने में एक साधारण सी लगने वाली पोस्ट भी बड़ी बहस में बदल गई और लोगों ने इतिहास से लेकर मौजूदा सीमा विवाद तक हर पहलू को सामने रख दिया।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या कैलाश मानसरोवर यात्रा वाकई दोनों देशों के दिलों को सचमुच करीब ला पाएगी। इसका जवाब काफी हद तक इस बात पर टिका है कि बीजिंग असल में जमीन पर अपनी विस्तारवादी नीतियों में कितना बदलाव लाता है। जब तक सीमा पर और तिब्बत को लेकर ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं दिखते, तब तक भारतीय सोशल मीडिया पर ऐसी हर कूटनीतिक पोस्ट पर इसी तरह के तीखे और सतर्क सवाल उठते रहने की पूरी संभावना है।

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सवाल-जवाब

चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने क्या पोस्ट किया?
उन्होंने एक्स पर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ा एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि आशा है यह यात्रा दिलों को करीब लाए।
यह पोस्ट कब आई और किस हैंडल से आई?
यह पोस्ट 12 जुलाई 2026 को यू जिंग के हैंडल चाइना स्पॉक्स इंडिया से आई।
किन यूजर्स ने भारत-चीन सहयोग का समर्थन किया?
पीयूष कुमार यादव ने ग्लोबल साउथ के नेतृत्व और नई वैश्विक व्यवस्था की बात कही, जबकि अभिनव आलोक ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नजरिए से सहयोग का समर्थन किया।
तिब्बत को लेकर सबसे तीखी प्रतिक्रिया किसने दी?
डॉ. राहुल तिवारी ने फ्रीतिब्बत हैशटैग के साथ तिब्बत पर चीन के कब्जे को लेकर सबसे आक्रामक टिप्पणी की।
थ्यूसिडाइड्स ट्रैप का जिक्र किसने और क्यों किया?
अभिनव आलोक ने इसका जिक्र किया और कहा कि भारत-चीन को उभरती और स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव वाली इस पश्चिमी सोच में नहीं फंसना चाहिए।
क्या यह पोस्ट भारत-चीन संबंधों में असल बदलाव लाएगी?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीजिंग तिब्बत और सीमा पर अपनी विस्तारवादी नीतियों में कितना बदलाव लाता है।
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